कथित बैंक लोन धोखाधड़ी की जांच का सामना कर रहे रिलायंस अनिल धीरेंद्र अंबानी समूह (ADAG) के चेयरमैन अनिल अंबानी ने एक बड़ा कदम उठाया है। अंबानी ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर अपना बकाया कर्ज चुकाने की इच्छा जताई है। उन्होंने मांग की है कि कानूनी रूप से कर्ज की राशि तय करने और पुनर्भुगतान का शेड्यूल (Repayment Schedule) निर्धारित करने के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट से भी की गुहार
अनिल अंबानी ने यही अनुरोध सुप्रीम कोर्ट से भी किया है, जो वर्तमान में उनके समूह के खिलाफ जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। उन्होंने सुझाव दिया है कि:
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कानूनी और वित्तीय विशेषज्ञों की एक तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी या कर्जदाताओं की कमेटी (Committee of Lenders) बनाई जाए।
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यह कमेटी IBC और अन्य समझौतों के तहत वसूलियों का हिसाब लगाकर शुद्ध मूल राशि (Net Principal Exposure) तय करे।
‘मैं भगोड़ा नहीं हूँ’— अंबानी का तर्क
अनिल अंबानी ने हाल ही में ‘स्टर्लिंग बायोटेक’ मामले का हवाला दिया, जहाँ सुप्रीम कोर्ट ने बकाया चुकाने पर आरोपियों के खिलाफ आपराधिक आरोप हटाने की अनुमति दी थी। अंबानी ने अपने पत्र में स्पष्ट किया:
“मैं कोई भगोड़ा नहीं हूँ। मैंने सुप्रीम कोर्ट को वचन दिया है कि मैं कोर्ट की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ूँगा। मेरा समूह उन कंपनियों से बेहतर स्थिति में है जो देश छोड़कर भाग गई हैं। यदि उनके लिए समाधान संभव है, तो मेरे मामले में भी मेरिट के आधार पर ऐसा किया जाना चाहिए।”
50 लाख शेयरधारकों का हवाला
अंबानी के अनुसार, एक ‘स्ट्रक्चर्ड रेजोल्यूशन’ न केवल बैंकों के हित में होगा, बल्कि 50 लाख छोटे शेयरधारकों के हितों की भी रक्षा करेगा। इससे वर्तमान में चल रही कई समानांतर न्यायिक प्रक्रियाओं पर भी विराम लग सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और ED का हलफनामा
दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एक हलफनामे पर भी चर्चा हुई। इसमें आरोप लगाया गया है कि कुछ मामलों में IBC (दिवाला और दिवालियापन संहिता) का दुरुपयोग किया गया है।
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अदालत ने एक उदाहरण का जिक्र किया जहाँ लगभग ₹2,983 करोड़ के दावों को मात्र ₹26 करोड़ के समझौते के साथ खत्म कर दिया गया।
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मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की गहनता से निगरानी कर रही है।
News Drift Analysis: अनिल अंबानी की यह पहल उनके समूह को कानूनी संकट से उबारने की एक रणनीतिक कोशिश मानी जा रही है। अब देखना यह होगा कि वित्त मंत्रालय और सुप्रीम कोर्ट इस ‘सेटलमेंट’ प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाते हैं, खासकर तब जब ED ने IBC प्रक्रियाओं के दुरुपयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
