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    Home»राष्ट्रीय»होर्मुज जलडमरूमध्य में भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत: ईरानी जलक्षेत्र से निकले भारतीय गैस टैंकर ‘जग वसंत’ और ‘पाइन गैस’
    होर्मुज जलडमरूमध्य में भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत: ईरानी जलक्षेत्र से निकले भारतीय गैस टैंकर ‘जग वसंत’ और ‘पाइन गैस’

    होर्मुज जलडमरूमध्य में भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत: ईरानी जलक्षेत्र से निकले भारतीय गैस टैंकर ‘जग वसंत’ और ‘पाइन गैस’

    0
    By News Drift on March 24, 2026 राष्ट्रीय
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    पश्चिम  एशिया में जारी युद्ध और तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। फारस की खाड़ी में फंसे दो भारतीय झंडे वाले एलपीजी (LPG) टैंकर— ‘जग वसंत’ (Jag Vasant) और ‘पाइन गैस’ (Pine Gas) — सोमवार को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सुरक्षित पार कर भारत की ओर रवाना हो गए हैं।

    ईरानी जलक्षेत्र का सहारा: एक रणनीतिक कदम

    हैरान करने वाली बात यह है कि इन जहाजों ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र के बजाय ईरान के प्रादेशिक जलक्षेत्र (Territorial Waters) का रास्ता चुना।

    • चेकपॉइंट और सुरक्षा: विशेषज्ञों का मानना है कि तेहरान वर्तमान में इस समुद्री मार्ग पर एक ‘चेकपॉइंट’ चला रहा है और केवल उन्हीं देशों के जहाजों को निकलने की अनुमति दे रहा है जिनसे उनके कूटनीतिक संबंध स्थिर हैं।

    • पहचान का प्रसारण: दोनों जहाजों ने अपनी पहचान स्पष्ट करने के लिए लगातार रेडियो पर प्रसारित किया कि वे ‘भारतीय जहाज’ हैं, ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी या हमले की स्थिति से बचा जा सके।

    कूटनीति का असर: मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की बातचीत

    जहाजों की यह सुरक्षित निकासी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान के बीच हुई हालिया बातचीत का परिणाम मानी जा रही है।

    • विदेश मंत्री का बयान: हाल ही में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा था कि जहाजों की आवाजाही के लिए कोई ‘ब्लैंकेट एग्रीमेंट’ नहीं है, बल्कि हर जहाज की आवाजाही को एक व्यक्तिगत मामले (Individual Happening) के रूप में देखा जा रहा है और तेहरान के साथ लगातार बातचीत जारी है।

    • अब्बास अरागची का रुख: ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने भी संकेत दिया था कि ईरान उन देशों के लिए ‘खुला’ है जो अपने जहाजों के सुरक्षित मार्ग के लिए चर्चा करना चाहते हैं।

    भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मार्ग?

    होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवन रेखा है। भारत के लिए इसकी अहमियत इन आंकड़ों से समझी जा सकती है:

    • LPG निर्भरता: भारत की 90% एलपीजी आपूर्ति इसी रास्ते से आती है।

    • कुल खपत का 54%: भारत की वार्षिक एलपीजी खपत (करीब 33 मिलियन टन) का लगभग 54% हिस्सा इसी संकीर्ण समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।

    • चालक दल की सुरक्षा: इन दो जहाजों पर 60 भारतीय नाविक सवार हैं, जो मार्च के शुरुआती सप्ताह से ही वहां फंसे हुए थे।

    फंसे हुए जहाजों की स्थिति

    शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, रविवार तक फारस की खाड़ी में भारत के 22 मर्चेंट जहाज फंसे हुए थे, जिनमें 611 नाविक मौजूद थे। ‘जग वसंत’ और ‘पाइन गैस’ के निकलने के बाद अब वहां 20 भारतीय जहाज बचे हैं। ये जहाज करीब 92,000 टन एलपीजी लेकर आ रहे हैं, जो भारत की एक दिन से अधिक की खपत को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।

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