राजधानी लखनऊ में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत आवेदन करने के बावजूद आवेदकों को न तो समय पर जानकारी मिल रही है और न ही प्रथम अपील के बाद ठोस कार्रवाई देखने को मिल रही है।
समयसीमा में नहीं मिला जवाब
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक RTI आवेदन दिनांक 03 फरवरी 2026 को दाखिल किया गया, जिसे 06 फरवरी 2026 को ऑनलाइन प्राप्त दर्शाया गया। लेकिन निर्धारित 30 दिनों की समयसीमा के भीतर कोई जवाब उपलब्ध नहीं कराया गया।
आवेदक का कहना है कि संबंधित अधिकारी से संपर्क करने के प्रयास भी किए गए, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। यह स्थिति RTI अधिनियम के प्रावधानों के अनुपालन पर प्रश्न खड़े करती है।

प्रथम अपील में भी टालमटोल
समयसीमा में जवाब न मिलने पर 10 मार्च 2026 को प्रथम अपील दायर की गई। इसके बाद सुनवाई की तिथि 10 अप्रैल 2026 निर्धारित की गई, जो लगभग एक माह बाद की थी।
निर्धारित तिथि पर आवेदक कार्यालय पहुँचा, लेकिन प्रथम अपील अधिकारी (FAA) स्वयं उपस्थित नहीं मिले।
सुनवाई बनी औपचारिकता
आवेदक के अनुसार, सुनवाई के दौरान एक कर्मचारी द्वारा केवल औपचारिक कार्यवाही की गई। फाइल पर हस्ताक्षर कराकर आवेदक की उपस्थिति दर्ज कर ली गई, जबकि मामले पर कोई विस्तृत सुनवाई या पक्षों के बीच चर्चा नहीं हुई।
कर्मचारी द्वारा 15 दिनों के भीतर जवाब उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया।
आज 15 अप्रैल 2026 तक सन्नाटा
हालांकि 15 दिन के अंदर जवाब देने का कर्मचारी द्वारा बोला गया लेकिन 5 दिन इसके भी बीत गए और जानकारी के नाम पर कुछ भी नहीं , शायद इन्हे भी पता है कि RTI का जवाब न देना कोई बड़ी बात नहीं , और हो सकता है इन्हे जवाब न देने का अभ्यास हो गया हो । इससे यह स्पष्ट होता है कि विभाग में RTI कानून को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
जवाबदेही पर उठे सवाल
RTI जैसे महत्वपूर्ण कानून के तहत जानकारी मांगना नागरिक का अधिकार है, लेकिन जब अधिकारी ही इसे नजरअंदाज करें, तो यह व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। इस पूरे मामले में न तो PIO की जवाबदेही तय हुई और न ही प्रथम अपील अधिकारी द्वारा कोई ठोस कदम उठाया गया। जिससे ये स्पष्ट है की ये PIO इस कानून को खेल समझ बैठे हैं ।
ऐसे PIO कानूनों की अवहेलना के बावजूद अगर विभागीय कार्यवाही और जवाबदेही से बचते रहे तो ये पूरे सिस्टम को सवालों के घेरे में ला खड़ा करेगा।
अभी उम्मीद बाकी:
आवेदक का कहना है कि तय समय सीमा के बाद द्वितीय अपील करेंगे और वहां से संतोषजनक जवाब और मांगी गयी सूचना मिलेगी और PIO को दंडित भी किया जाएगा , हालांकि आवेदक का यह भी कहना है कि अगर जवाब न मिला और जिम्मेदार PIO पर कार्यवाही न हुई तो उच्च न्यायालय का रास्ता लेना तय है। यानी कि शायद जवाब न देने को अभ्यास बना चुके PIO महोदय को कानून की अवहेलना करना महंगा पड़ सकता है।
सुधार की जरूरत
ऐसे मामलों में ये आवश्यक है कि –
- अधिकारियों की जवाबदेही तय हो
- समयसीमा का सख्ती से पालन कराया जाए
- RTI मामलों की मॉनिटरिंग की जाए
यह मामला दर्शाता है कि लखनऊ विकास प्राधिकरण में RTI प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। उत्तरप्रदेश सरकार और शासन को भी ये देखना होगा कि RTI जैसे कानूनों का सख्ती से पालन हो , अगर ऐसा नहीं हुआ तो आम नागरिक का भरोसा इस व्यवस्था से उठ सकता है।
