कैमरून के याउंडे में विश्व व्यापार संगठन (WTO) का 14वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) एक ऐसे समय में शुरू हुआ है जब वैश्विक व्यापार नियमों की प्रासंगिकता पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इस सम्मेलन को वैश्विक व्यापार के लिए एक ‘टर्निंग पॉइंट’ माना जा रहा है। भारत ने इस मंच पर स्पष्ट रूप से अपनी प्राथमिकताओं को रखा है, जिसमें सबसे प्रमुख ‘विवाद निपटान प्रणाली’ (Dispute Settlement System) की बहाली है।
पीयूष गोयल का बड़ा बयान: “सिस्टम की कार्यक्षमता जरूरी”
सम्मेलन के पहले दिन भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सदस्य देशों का आह्वान किया कि वे WTO की विवाद निपटान प्रणाली को फिर से पूर्ण रूप से कार्यात्मक बनाने की दिशा में काम करें। उन्होंने कहा, “एक निष्क्रिय विवाद निपटान प्रणाली ने सदस्यों को प्रभावी समाधान से वंचित कर दिया है। हमें एक स्वचालित और बाध्यकारी विवाद निपटान प्रणाली को हर हाल में बहाल करना चाहिए।”
ई-कॉमर्स मोराटोरियम पर भारत का कड़ा रुख
भारत ने ई-कॉमर्स पर सीमा शुल्क (Customs Duties) की छूट को आगे बढ़ाने के प्रस्ताव पर सावधानीपूर्वक पुनर्विचार करने की जरूरत बताई है।
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क्या है मुद्दा? 1998 से ही इलेक्ट्रॉनिक ट्रांमिशन (जैसे स्ट्रीमिंग, ई-बुक्स, सॉफ्टवेयर) पर सीमा शुल्क नहीं लगाने का नियम चला आ रहा है।
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भारत की आपत्ति: भारत, दक्षिण अफ्रीका और इंडोनेशिया जैसे देशों का तर्क है कि यह मोराटोरियम विकासशील देशों को नुकसान पहुँचा रहा है। इससे डिजिटल रूप से दी जाने वाली सेवाओं से राजस्व (Revenue) जुटाने की क्षमता कम होती है।
विकसित बनाम विकासशील राष्ट्र: हितों का टकराव
सम्मेलन में जहाँ अमेरिका जैसे विकसित देश WTO में आमूल-चूल बदलाव और ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ (MFN) जैसे सिद्धांतों पर पुनर्विचार की वकालत कर रहे हैं, वहीं भारत अपनी ‘पॉलिसी स्पेस’ (नीतिगत स्वतंत्रता) को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहा है। भारत का मानना है कि भविष्य में डिजिटल व्यापार के क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं हैं, इसलिए नियमों को ऐसा नहीं होना चाहिए जो विकासशील देशों की प्रतिस्पर्धात्मकता को रोकें।
डिजिटल डिवाइड की चुनौती
एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, विकसित राष्ट्र रोबोटिक्स, एआई और 3डी प्रिंटिंग जैसी तकनीकों में भारी निवेश कर रहे हैं, जबकि विकासशील देश अभी भी बुनियादी सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) बुनियादी ढांचे के निर्माण में संघर्ष कर रहे हैं। भारत ने जोर दिया है कि WTO के सुधार पारदर्शी, समावेशी और विकास को केंद्र में रखने वाले होने चाहिए।
निष्कर्ष
WTO MC14 का परिणाम यह तय करेगा कि भविष्य का वैश्विक व्यापार कितना न्यायसंगत और पूर्वानुमानित होगा। भारत इस मंच पर न केवल अपने हितों की रक्षा कर रहा है, बल्कि ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) की आवाज बनकर भी उभरा है।
