मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश नें नंबर 1 बनकर दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2024 -25 में उत्तर प्रदेश में दुग्ध उत्पादन 388.15 लाख मीट्रिक टन हो गया है। दुग्ध उत्पादन में उत्तरप्रदेश ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों को पीछे छोड़ते हुए देश का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य बनने का गौरव प्राप्त किया है।
उत्तर प्रदेश का दबदबा: देश में नंबर-1
भारत के कुल दुग्ध उत्पादन में उत्तर प्रदेश का क्या महत्व है ये इस बात से समझा सकता है कि देश में कुल दुग्ध उत्पादन का लगभग 54 प्रतिशत हिस्सा केवल पांच राज्यों से आता है, जिनमें उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 15.66 प्रतिशत है – जो देश में सबसे अधिक है। यह उपलब्धि प्रदेश के मजबूत डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर, सरकारी योजनाओं और ग्रामीण स्तर पर बढ़ती भागीदारी का परिणाम है।
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2017 के बाद की दुग्ध क्रांति:
यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो उत्तरप्रदेश में वर्ष 2016-17 में दुग्ध उत्पादन लगभग 277 लाख मीट्रिक टन था जो लगभग 40 % की वृद्धि दर्शाते हुए 2024-25 में बढ़कर 388.15 लाख मीट्रिक टन हो गया है। यह वृद्धि प्रदेश में दुग्ध उत्पादन में क्रांति को प्रदर्शित करती है। इसके अतिरिक्त प्रदेश सरकार ने वर्ष 2025 -26 हेतु दुग्ध उत्पादन के लिए 447.83 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा है। जो प्रदेश सरकार द्वारा इस क्षेत्र में गंभीर प्रयासों को प्रदर्शित करता है।

महिला शक्ति बनी दुग्ध क्रांति की रीढ़:
उत्तर प्रदेश में दुग्ध उत्पादन की इस तेजी के पीछे ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी सबसे बड़ा कारण बनकर उभरी है।
- राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत लाखों महिलाएं डेयरी से जुड़ीं
- 31 जिलों में महिला समूहों द्वारा रोजाना करीब 10 लाख लीटर दूध संग्रहण
- अब तक कुल कारोबार ₹5,000 करोड़ से अधिक
- प्रदेश की पांच प्रमुख डेयरी कंपनियों से लगभग 4 लाख महिला किसान सीधे जुड़ी हुई हैं। फरवरी 2026 तक इन कंपनियों का टर्नओवर भी ₹5,000 करोड़ तक पहुंच चुका है।
यह न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे रहा है।
प्रदेश सरकार द्वारा चलाया जा रहा प्रमुख मिशन:
नंद बाबा दुग्ध मिशन:
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ₹1000 करोड़ की लागत से प्रदेश को दुग्ध उत्पादन में अग्रणी राज्य बनाये रखने एवं इसके लिए प्रत्येक गांव में दुग्ध सहकारी समितियां गठित कर दुग्ध उत्पादकों को गाँव में ही उनके दूध के उचित मुल्य पर विक्रय की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नन्द बाबा दुग्ध मिशन का संचालन किया गया है।
इस मिशन के तहत चार प्रमुख योजनाएं संचालित हैं :
1. मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना:
- प्रदेश में स्वदेशी उन्नत नस्ल की गायों की संख्या में वृद्धि एवं नस्ल सुधार।
- यह योजना प्रदेश के समस्त जनपदों में लागू है।
- योजनान्तर्गत गिर, साहीवाल, हरियाणा एवं थारपारकर नस्ल की 02 गाय की इकाई की लागत ₹2 लाख का अधिकतम 40 प्रतिशत, अधिकतम ₹80000/- अनुदान देय है।
- योजना के 50 प्रतिशत लाभार्थी महिलाओं हेतु आरक्षित।
- क्रय की जाने वाली गाय प्रथम अथवा द्वितीय ब्यात की होगी।
- एक पशुपालक को केवल एक इकाई (2 गाय)।
- पशु बीमा एवं गाय की पहचान हेतु ईयर टेगिंग कराया जाना अनिवार्य होगा।
पात्रता और लाभार्थी चयन प्रक्रिया:
- आवेदन हेतु विज्ञापन सम्पूर्ण प्रदेश में (1 माह का समय देते हुए) किया जाएगा ।
- आवेदक की आयु 18 वर्ष से अधिक हो।
- दुग्ध उत्पादक/पशुपालक के पास पशुओं के रखने हेतु स्थल उपलब्ध हो।
- पशुपालक के पास पहले से 02 गाय से अधिक गिर, साहीवाल, हरियाणा, थारपारकर अथवा संकर प्रजाति की एफ-1 न हो।
- आवेदन ऑनलाईन निर्धारित प्रारूप पर किये जायेगें परन्तु जब तक नन्द बाबा दुग्ध मिशन का पोर्टल ऑनलाईन नहीं होता है तब तक पशुपालकों द्वारा आवेदन पत्र ऑफलाईन मोड में सम्बन्धित जनपद के मुख्य विकास अधिकारी अथवा मुख्य पशु चिकित्साधिकारी अथवा उप दुग्धशाला विकास अधिकारी के कार्यालय में रजिस्टर्ड डाक द्वारा अथवा सीधे जमा किये जायेंगे।
- लाभार्थी का चयन ई-लॉटरी के माध्यम किया जायेगा।
- लाभार्थी द्वारा गाय क्रय के उपरान्त अधिकतम 01 माह में अनुदान हेतु आवेदन किया जायेगा।
- अनुदान की धनराशि का भुगतान लाभार्थी के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से अवमुक्त किया जायेगा।
2. मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना:
- इस योजना के तहत उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी नस्ल की गायों के पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
- गिर, साहीवाल, थारपारकर, हरियाणा और गंगातीरी जैसी नस्लों की गाय पालने पर पशुपालकों को ₹10,000 से ₹15,000 तक की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। यह राशि गाय की दूध देने की क्षमता के आधार पर निर्धारित की जाती है।
- यह योजना उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों में लागू है और इसका लाभ व्यक्तिगत पशुपालकों को दिया जाता है।
योजना की मुख्य शर्तें
- योजना का लाभ केवल व्यक्तिगत लाभार्थी को ही मिलेगा
- एक पशुपालक अधिकतम 2 गायों पर ही प्रोत्साहन प्राप्त कर सकता है
- गाय के पहले, दूसरे और तीसरे ब्यात के लिए जीवनकाल में एक बार ही लाभ दिया जाएगा
- आवेदन करने वाले की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए
आवेदन प्रक्रिया
- पशुपालकों को गाय के ब्यात (दूध देने की शुरुआत) की तिथि से 45 दिनों के भीतर आवेदन करना आवश्यक है।
फिलहाल, ऑनलाइन पोर्टल पूरी तरह सक्रिय न होने की स्थिति में आवेदन: संबंधित जनपद के मुख्य विकास अधिकारी (CDO) कार्यालय में सीधे या रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से जमा किए जा सकते हैं
भुगतान कैसे होगा?
योजना के तहत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजी जाती है।
3. नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना
- इसका उद्देश्य प्रदेश में बेहतर नस्ल के गोवंश को बढ़ावा देना और दुग्ध उत्पादन बढ़ाना।
- यह योजना राज्य के 18 मंडल मुख्यालय वाले जिलों में संचालित हो रही है, जिसमें किसानों को आधुनिक डेयरी यूनिट स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है।
- योजना के तहत 25 गायों की एक इकाई स्थापित करने का प्रावधान है। इसमें साहीवाल, गिर, थारपारकर और अधिकतम 5 गंगातीरी नस्ल की गायें शामिल की जा सकती हैं।
- इस यूनिट की लागत करीब ₹61 से ₹62.5 लाख तय की गई है, जिस पर सरकार 50 प्रतिशत तक, यानी अधिकतम ₹30.50 लाख से ₹31.25 लाख तक का अनुदान देती है।
कैसे मिलेगा अनुदान (3 चरणों में भुगतान):
पहला चरण: आधारभूत ढांचा तैयार होने पर (25%)
दूसरा चरण: गायों की खरीद पूरी होने पर (12.5%)
तीसरा चरण: कम से कम 10 बछड़ों के जन्म के बाद (12.5%)
फाइनेंस स्ट्रक्चर (पूरी लागत का बंटवारा):
- लाभार्थी अंश: 15%
- बैंक ऋण: 35%
- सरकारी अनुदान: 50%
गाय खरीद से जुड़े जरूरी नियम:
- गायें यथासंभव प्रदेश के बाहर, उनके मूल प्रजनन क्षेत्रों से खरीदी जाएं
- सभी पशुओं का ईयर टैग और बीमा अनिवार्य
- गाय पहली या दूसरी ब्यात की हो ब्यात 45 दिन से अधिक पुराना न हो
पात्रता की शर्तें:
- कम से कम 3 साल का गोपालन/भैंस पालन का अनुभव
- अनुभव का प्रमाण मुख्य पशु चिकित्साधिकारी द्वारा सत्यापित
- पहले कामधेनु/मिनी/माइक्रो कामधेनु योजना का लाभ ले चुके लोग पात्र नहीं
भूमि से जुड़ी शर्तें:
- 0.5 एकड़ जमीन (इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए)
- 1.5 एकड़ जमीन (चारा उत्पादन के लिए)
- जमीन स्वयं की/पैतृक/साझेदारी या 7 साल के पंजीकृत अनुबंध पर हो
- भूमि जलभराव से मुक्त होनी चाहिए
4. मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना:
- प्रदेश में उच्च उत्पादन क्षमता वाले गोवंश को बढ़ावा देने के लिए सरकार की मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना लागू है।
- यह योजना राज्य के सभी जिलों में संचालित हो रही है, जिसमें छोटे और मध्यम स्तर के पशुपालकों को डेयरी यूनिट स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है।
- इस योजना के तहत 10 गायों की डेयरी इकाई स्थापित की जाती है। इसमें साहीवाल, गिर और थारपारकर नस्ल की गायें शामिल होंगी।
- इस इकाई की कुल लागत ₹23.60 लाख निर्धारित है, जिस पर सरकार 50 प्रतिशत यानी अधिकतम ₹11.80 लाख तक का अनुदान देती है।
दो चरणों में मिलेगा अनुदान:
- पहला चरण: आधारभूत ढांचा तैयार होने के बाद (कुल लागत का 25%)
- दूसरा चरण: गायों की खरीद पूरी होने पर (कुल लागत का 25%)
फाइनेंस का पूरा गणित:
- लाभार्थी अंश: 15%
- बैंक ऋण: 35%
- सरकारी अनुदान: 50%
गाय खरीद के जरूरी नियम:
- गायों की खरीद यथासंभव प्रदेश के बाहर, उनके मूल प्रजनन क्षेत्रों (ब्रिडिंग ट्रैक्ट) से की जाएगी
- सभी पशुओं का ईयर टैग और बीमा अनिवार्य होगा
- गाय पहली या दूसरी ब्यात की होनी चाहिए
- ब्यात 45 दिन से अधिक पुराना नहीं होना चाहिए
पात्रता की शर्तें:
- आवेदक के पास कम से कम 3 वर्ष का गोपालन या भैंस पालन का अनुभव होना चाहिए
- अनुभव का प्रमाण संबंधित मुख्य पशु चिकित्साधिकारी से सत्यापित होना जरूरी है
- पहले कामधेनु, मिनी/माइक्रो कामधेनु, नन्दिनी योजना या मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना का लाभ ले चुके लोग पात्र नहीं होंगे
भूमि से जुड़ी शर्तें:
- 0.20 एकड़ जमीन (इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए)
- 0.80 एकड़ जमीन (चारा उत्पादन के लिए)
- जमीन स्वयं की, पैतृक/साझेदारी या कम से कम 7 साल के पंजीकृत अनुबंध पर हो
- भूमि जलभराव से मुक्त होनी चाहिए
आवेदन प्रक्रिया:
- आवेदन निर्धारित प्रारूप में ऑनलाइन किया जाएगा
- जब तक नन्द बाबा दुग्ध मिशन का पोर्टल पूरी तरह सक्रिय नहीं होता, तब तक आवेदन ऑफलाइन भी स्वीकार किए जाएंगे
- आवेदन पत्र संबंधित जिले के मुख्य विकास अधिकारी (CDO) या मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (CVO) कार्यालय में रजिस्टर्ड डाक या सीधे जमा करना होगा
चयन कैसे होगा?
यदि आवेदन ज्यादा आते हैं, तो चयन ई-लॉटरी सिस्टम के माध्यम से किया जाएगा, जिसकी निगरानी मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति करेगी।
अनुदान का भुगतान:
अनुदान की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में DBT (Direct Benefit Transfer) के जरिए भेजी जाएगी।
उत्तर प्रदेश का दुग्ध उत्पादन में नंबर-1 बनना केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण और सरकारी योजनाओं की सफलता का प्रमाण है। आने वाले समय में यदि यही रफ्तार बनी रही, तो यूपी न केवल देश बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी डेयरी सेक्टर में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।
