Lucknow News: राजधानी लखनऊ को देश के सबसे स्वच्छ शहरों में शामिल किए जाने और स्वच्छता रैंकिंग में तीसरे स्थान पर आने के दावों के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। एक तरफ जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शहर को और स्वच्छ बनाने के प्रयासों की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी इन प्रयासों पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
ताजा मामला फैजुल्लागंज (जोन-3) के भरत नगर, सुखसागर नगर (लाला मंदिर के पास) का है, जहां 9 अप्रैल 2026 को नालियों की सफाई के बाद निकाली गई गंदगी को सड़क पर ही छोड़ दिया गया। यह गंदगी आज 13 अप्रैल तक भी नहीं हटाई गई, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

सफाई के नाम पर अधूरा काम
- स्थानीय स्तर पर नाली की सफाई तो की गई, लेकिन उससे निकले कचरे को उठाने की जिम्मेदारी पूरी नहीं की गई। परिणामस्वरूप, सड़क पर गंदगी के ढेर जमा हो गए हैं, जो बदबू और संक्रमण का कारण बन रहे हैं।
- यानी, सफाई का काम आधा अधूरा छोड़ दिया गया, जिससे समस्या कम होने के बजाय और बढ़ गई।
दो शिकायतें, फिर भी कार्रवाई नहीं
इस मामले को लेकर राजधानी लखनऊ के स्थानीय निवासी द्वारा दो बार शिकायत दर्ज कराई गई—
10 अप्रैल 2026
शिकायत संख्या: 26041015585763909
12 अप्रैल 2026
शिकायत संख्या: 260412153681575584
दोनों बार शिकायत पर “आपकी शिकायत दर्ज कर ली गई है” का जवाब मिला और 11 अप्रैल 2026 को किसी कर्मचारी द्वारा फोन करके आश्वासन दिया गया शाम तक सफाई हो जायेगी लेकिन जमीन पर कुछ नहीं हुआ और न ही दुबारा को फोन कॉल आया।
पार्षद को भी दी गई सूचना, फिर भी चुप्पी
- मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय पार्षद को भी व्हाट्सएप के माध्यम से जानकारी दी गई लेकिन पार्षद जी ने संज्ञान लेना आवश्यक नहीं समझा।
- खैर मामला जस का तस रहा न तो कोई निरीक्षण हुआ और न ही सफाई की व्यवस्था कराई गई।
👉 इससे यह सवाल उठता है कि क्या जनप्रतिनिधि स्तर पर भी निगरानी कमजोर हो गई है?
स्थानीय लोगों की बढ़ी परेशानी
- सड़क पर कचरे के ढेर से आवाजाही में दिक्कत
- बदबू और संक्रमण का खतरा
- नालियों का मलबा सूख कर उड़ कर घरों में पहुँच रहा और सड़क पर फ़ैल रहा
- बच्चों और बुजुर्गों के लिए जोखिम
- स्थानीय निवासियों का कहना है कि सफाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जा रही है, जबकि असल समस्या जस की तस बनी हुई है।
प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल
यह मामला कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है—
- क्या स्वच्छता रैंकिंग केवल कागजी उपलब्धि है?
- क्या शिकायत निस्तारण प्रणाली प्रभावी नहीं रही?
- क्या अधिकारी जमीनी निरीक्षण नहीं कर रहे?
- क्या कर्मचारियों की जवाबदेही तय नहीं हो रही?
👉 यह घटना नगर निगम की मॉनिटरिंग और जवाबदेही प्रणाली की कमजोरी को उजागर करती है।
News Drift की मांग
News Drift प्रशासन से मांग करता है कि—
✔ तत्काल सड़क से गंदगी हटाई जाए
✔ संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों पर कार्रवाई हो
✔ शिकायत निस्तारण प्रणाली को पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाए
✔ जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित की जाए
निष्कर्ष
जब एक ओर शहर को स्वच्छता में शीर्ष स्थान मिलने के दावे किए जाते हैं और दूसरी ओर जमीनी स्तर पर ऐसी लापरवाही सामने आती है, तो यह साफ संकेत है कि सिस्टम में सुधार की तत्काल जरूरत है।
👉 अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला केवल एक इलाके तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे शहर की सफाई व्यवस्था की सच्चाई को उजागर करेगा।
