केंद्र सरकार ने आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ा और रणनीतिक कदम उठाते हुए भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों (Land Bordering Countries) के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नियमों को सरल बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस संबंध में ‘प्रेस नोट-3 (2020)’ के प्रावधानों में संशोधन को मंजूरी दी गई।
यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2020 में गलवान घाटी संघर्ष के बाद भारत ने चीन समेत पड़ोसी देशों से आने वाले निवेश के लिए ‘सरकारी मंजूरी’ को अनिवार्य कर दिया था।
क्यों बदला गया नियम? (मुख्य कारण)
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निवेश को प्रोत्साहन: अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, कुल FDI इक्विटी प्रवाह में चीन की हिस्सेदारी महज 0.32%(लगभग 2.51 अरब डॉलर) रही है। कड़े नियमों के कारण निवेश की गति धीमी थी।
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विनिर्माण हब बनने की दिशा में कदम: भारत खुद को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करना चाहता है। निवेश नियमों में सरलता से पड़ोसी देशों की कंपनियों को भारत में यूनिट्स लगाने में आसानी होगी।
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चीन के साथ व्यापारिक संतुलन: 2024-25 में चीन से आयात बढ़कर 113.45 अरब डॉलर हो गया है, जबकि निर्यात घटकर 14.25 अरब डॉलर रह गया है। व्यापार घाटे को पाटने के लिए स्थानीय विनिर्माण में विदेशी निवेश को बढ़ावा देना जरूरी है।
प्रेस नोट-3 (2020) क्या था?
साल 2020 में जारी इस नोट के तहत चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान के किसी भी निवेशक के लिए भारत के किसी भी क्षेत्र में निवेश करने से पहले सरकारी मंजूरी (Prior Govt Approval) लेना अनिवार्य था। इसका उद्देश्य कोविड-19 के दौरान भारतीय कंपनियों के “अवसरवादी अधिग्रहण” (Opportunistic Takeovers) को रोकना था।
विशेष नोट: हालांकि नियमों को सरल बनाया गया है, लेकिन सुरक्षा और रणनीतिक क्षेत्रों (Sensitive Sectors) में अभी भी कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
दिवाला कानून (IBC) और कंपनी अधिनियम में भी संशोधन
कैबिनेट ने केवल FDI ही नहीं, बल्कि व्यापार को आसान बनाने (Ease of Doing Business) के लिए दो अन्य प्रमुख कानूनों में बदलाव को भी मंजूरी दी है:
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IBC (संशोधन) विधेयक, 2025: दिवाला और ऋण शोधन अक्षमता संहिता में सुधार किया जा रहा है ताकि कंपनियों के दिवालिया होने के मामलों का निपटारा तेजी से हो सके और लंबी कानूनी प्रक्रियाओं से बचा जा सके। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसे बजट सत्र के दूसरे भाग में पेश कर सकती हैं।
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कंपनी अधिनियम, 2013: कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा संचालित इस एक्ट में संशोधनों का उद्देश्य आवेदन स्वीकार करने में लगने वाले समय को कम करना और अनुपालन (Compliance) को आसान बनाना है।
News Drift का विश्लेषण: क्या होगा असर?
भारत का यह कदम स्पष्ट रूप से चीन के साथ आर्थिक संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करने का संकेत है। सीमा पर तनाव के बावजूद, व्यापारिक हितों और सप्लाई चेन की मजबूती के लिए सरकार अब व्यावहारिक दृष्टिकोण अपना रही है। इससे उन टेक-स्टार्टअप्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को राहत मिलेगी जो निवेश के लिए सरकारी फाइलों के अटकने से परेशान थे।
