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    Home»दुनिया»समुद्र में युद्ध के नियम और अमेरिका का हमला—क्या यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है?
    समुद्र में युद्ध के नियम और अमेरिका का हमला—क्या यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है?

    समुद्र में युद्ध के नियम और अमेरिका का हमला—क्या यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है?

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    By News Drift on March 6, 2026 दुनिया
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    पश्चिम एशिया (West Asia) में चल रहा तनाव अब भारतीय उपमहाद्वीप के करीब पहुंच गया है। हाल ही में श्रीलंका के तट के पास एक अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी युद्धपोत IRIS Dena को डुबोए जाने की खबर ने वैश्विक राजनीति और समुद्री कानूनों (Maritime Laws) पर एक नई बहस छेड़ दी है। इस हमले में लगभग 80 नाविकों के मारे जाने की आशंका है।

    लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा में किसी देश के जहाज को इस तरह डुबोना वैध है? आइए समझते हैं इसके पीछे का कानूनी और सामरिक गणित।

    क्या था पूरा मामला?

    ईरानी युद्धपोत ‘IRIS Dena’ भारत में आयोजित MILAN-2026 (बहुपक्षीय नौसेना अभ्यास) में भाग लेकर वापस लौट रहा था। श्रीलंका के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के बाहर, अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक अमेरिकी पनडुब्बी ने Mark-48 टॉरपीडो से इस पर हमला किया। अमेरिका और इजरायल का ईरान के साथ चल रहा संघर्ष अब इस क्षेत्र तक फैल चुका है।

    समुद्र में युद्ध के नियम क्या कहते हैं?

    आम तौर पर समुद्र में शांति बनाए रखने के लिए UNCLOS (United Nations Convention on the Law of the Sea) का पालन किया जाता है। लेकिन युद्ध की स्थिति में नियम बदल जाते हैं:

    • UNCLOS की सीमा: UNCLOS मुख्य रूप से शांति काल के शासन पर केंद्रित है। युद्ध के दौरान ‘Law of Naval Warfare’ (नौसेना युद्ध के कानून) लागू होते हैं।

    • वैध लक्ष्य (Legitimate Target): अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार, यदि दो देश सशस्त्र संघर्ष में हैं, तो एक-दूसरे के सैन्य जहाजों को ‘वैध लक्ष्य’ माना जा सकता है, चाहे वे कहीं भी हों।

    • आत्मरक्षा का अधिकार: संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 51 (Article 51) किसी भी देश को सशस्त्र हमले की स्थिति में ‘आत्मरक्षा’ (Self-defense) का अधिकार देता है। अमेरिका इस हमले को इसी आधार पर जायज ठहरा सकता है।

    Mark-48 टॉरपीडो: वह हथियार जिसने जहाज के परखच्चे उड़ा दिए

    इस हमले में अमेरिका के सबसे घातक हथियार Mark-48 टॉरपीडो का इस्तेमाल किया गया। इसकी खासियतें इसे विनाशकारी बनाती हैं:

    • वजन: लगभग 1700 किलोग्राम।

    • काम करने का तरीका: यह जहाज से सीधे टकराने के बजाय उसके नीचे जाकर फटता है।

    • विस्फोट: इसके फटने से गैस का एक बड़ा बुलबुला बनता है जो जहाज की ‘कील’ (रीढ़ की हड्डी) को तोड़ देता है, जिससे जहाज दो हिस्सों में बंटकर तुरंत डूब जाता है।

    विशेषज्ञों की राय और चिंताएं

    भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारियों और विशेषज्ञों ने इस घटना पर चिंता व्यक्त की है:

    • शांतिपूर्ण मार्ग (Peaceful Passage): विशेषज्ञों का कहना है कि IRIS Dena एक अभ्यास से लौट रहा था और ‘शांतिपूर्ण मार्ग’ पर था। अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ऐसे हमले को ‘तनाव बढ़ाने वाला’ (Escalation) माना जा रहा है।

    • सुरक्षा का सवाल: पूर्व वाइस एडमिरल जी अशोक कुमार के अनुसार, समुद्री क्षेत्र में युद्ध या शांति के लिए कोई स्पष्ट भौतिक सीमा नहीं होती, लेकिन अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पास ऐसा होना क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।

    इतिहास के पन्नों में टॉरपीडो हमले

    दूसरे विश्व युद्ध के बाद से पनडुब्बी द्वारा टॉरपीडो से किसी बड़े युद्धपोत को डुबोने की घटनाएं बहुत दुर्लभ रही हैं:

    1. INS Khukri (1971): भारत-पाक युद्ध के दौरान पाकिस्तानी पनडुब्बी ने इसे डुबोया था।

    2. ARA General Belgrano (1982): फॉकलैंड युद्ध के दौरान ब्रिटेन ने अर्जेंटीना के इस जहाज को डुबोया।

    3. ROKS Cheonan (2010): उत्तर कोरिया द्वारा दक्षिण कोरियाई जहाज पर संदिग्ध हमला।

    IRIS Dena पर हुआ यह हमला केवल दो देशों की दुश्मनी नहीं है, बल्कि यह हिंद महासागर में बढ़ती सैन्य सक्रियता का संकेत भी है। जहां एक ओर अंतरराष्ट्रीय कानून आत्मरक्षा की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर ‘शांतिपूर्ण मार्ग’ का उल्लंघन वैश्विक व्यापार और सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां पेश करता है।

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