नोएडा: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण साझा किया है। ग्रेटर नोएडा में KDSG सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के उद्घाटन के अवसर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल सरकारी तंत्र के भरोसे बढ़ती आबादी को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देना संभव नहीं है। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में ‘पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप’ (PPP) और निजी निवेश को समय की मांग बताया।
स्वास्थ्य सेवा में ‘भरोसे’ और ‘व्यवहार’ की भूमिका
मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मियों को संबोधित करते हुए एक बहुत ही मानवीय पहलू पर जोर दिया। उन्होंने कहा:
“जब कोई मरीज डॉक्टर के पास आता है, तो वह बहुत उम्मीद और विश्वास के साथ आता है। डॉक्टर का अच्छा व्यवहार और सहानुभूतिपूर्ण रवैया ही मरीज की आधी बीमारी ठीक कर देता है।”
योगी आदित्यनाथ के अनुसार, चिकित्सा केवल दवाओं का खेल नहीं है, बल्कि यह सटीक सलाह, किफायती इलाज और पारदर्शिता का संगम होना चाहिए।
उत्तर प्रदेश में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का कायाकल्प
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में हुए बदलावों का विवरण देते हुए बताया कि कैसे यूपी ‘बीमारू राज्य’ की छवि से बाहर निकल रहा है:
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मेडिकल कॉलेजों की संख्या: साल 2017 से पहले राज्य में केवल 17 मेडिकल कॉलेज थे, लेकिन आज यह संख्या बढ़कर लगभग 81 हो गई है।
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एक जिला, एक मेडिकल कॉलेज: सरकार का लक्ष्य प्रदेश के सभी 75 जिलों में कम से कम एक मेडिकल कॉलेज स्थापित करना है, ताकि स्थानीय स्तर पर ही डॉक्टरों की कमी पूरी हो सके और मरीजों को दूर न जाना पड़े।
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KDSG अस्पताल: पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान कपिल देव और उद्यमी सुनील कुमार गुप्ता द्वारा स्थापित यह अस्पताल, महाराष्ट्र के प्रतिष्ठित DY पाटिल ग्रुप के सहयोग से संचालित होगा। यह न केवल नोएडा बल्कि पूरे NCR के लोगों के लिए वरदान साबित होगा।
आयुष्मान भारत और राज्य की कल्याणकारी योजनाएं
स्वास्थ्य को हर नागरिक का अधिकार बताते हुए मुख्यमंत्री ने आयुष्मान भारत (PM-JAY) योजना की सफलता का जिक्र किया:
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देशव्यापी प्रभाव: भारत में 60 करोड़ से अधिक लोग इस योजना के दायरे में हैं।
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यूपी का नेतृत्व: उत्तर प्रदेश 5.6 करोड़ से अधिक ‘गोल्डन कार्ड’ जारी कर देश में सबसे आगे है।
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कैशलेस इलाज: पात्र नागरिकों को सालाना 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है।
इन वर्गों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा कवच
लेख में इस बात का भी उल्लेख है कि योगी सरकार ने उन लोगों का भी ध्यान रखा है जो आयुष्मान योजना में कवर नहीं हैं। राज्य सरकार ने शिक्षकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा वर्करों, शिक्षा मित्रों और रसोइयों के लिए भी 5 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवर विस्तारित किया है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री राहत कोष से पिछले एक साल में 1,300 करोड़ रुपये की सहायता गरीब मरीजों को प्रदान की गई है।
मुख्यमंत्री का यह संबोधन स्पष्ट करता है कि उत्तर प्रदेश अब स्वास्थ्य सेवा को एक सेवा और मिशन के रूप में देख रहा है। निजी क्षेत्र को मेडिकल शिक्षा और अस्पताल सेवाओं में आमंत्रित करके, सरकार राज्य में एक ऐसा ‘हेल्थ इकोसिस्टम’ बनाना चाहती है जहाँ आधुनिक तकनीक और मानवीय संवेदना एक साथ चल सकें।
