पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष अब एक नए और अधिक खतरनाक चरण में प्रवेश कर गया है। ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच जुबानी जंग और सैन्य लामबंदी ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। ताज़ा समाचार रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने अमेरिका को किसी भी जमीनी सैन्य कार्रवाई (ground ops) के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है, जबकि दूसरी ओर अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपने हजारों अतिरिक्त ‘मरीन्स’ (Marines) तैनात कर दिए हैं।
ईरान की चेतावनी और कूटनीतिक हलचल
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कलीबाफ ने अमेरिका पर दोहरा खेल खेलने का आरोप लगाया है। उनके अनुसार, वॉशिंगटन एक तरफ बातचीत का संदेश भेज रहा है, तो दूसरी तरफ गुपचुप तरीके से सैन्य हमले की योजना बना रहा है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी हमले का जवाब देने के लिए ‘तैयार’ हैं और अमेरिकी सैनिकों के आने का इंतज़ार कर रहे हैं ताकि वे अपनी रक्षा कर सकें।
इस बीच, इस्लामाबाद में सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की के शीर्ष राजनयिकों के बीच उच्च स्तरीय बातचीत शुरू हुई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को शिपिंग के लिए फिर से खुलवाना और युद्ध को रोकना है। ज्ञात हो कि फरवरी के अंत से जारी इस संघर्ष के कारण वैश्विक खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर बुरा असर पड़ा है।
इजरायल और ईरान: मिसाइल और हवाई हमलों का दौर
इजरायली सेना ने पिछले 24 घंटों में तेहरान सहित मध्य और पश्चिमी ईरान में 140 से अधिक हवाई हमले किए हैं। इनके निशाने पर मुख्य रूप से बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च साइट्स और सैन्य ठिकाने थे। जवाब में, इजरायल के दक्षिणी शहर ‘बीयर शेवा’ (Beer Sheva) के पास ईरानी मिसाइलें गिरी हैं, जिससे एक केमिकल प्लांट को नुकसान पहुँचा है और कई लोग घायल हुए हैं।
भारतीय सेना के लिए सैन्य सबक
पश्चिम एशिया के इस युद्ध ने आधुनिक युद्ध कौशल के प्रति भारत के नजरिए को भी प्रभावित किया है। भारतीय सैन्य नेतृत्व वर्तमान संघर्ष से कुछ प्रमुख सबक ले रहा है:
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एयर डिफेंस और ड्रोन तकनीक: भारतीय सेना अब ‘एंटी-ड्रोन सिस्टम’ की खरीद और उन्हें मौजूदा हवाई रक्षा प्रणालियों के साथ एकीकृत करने पर जोर दे रही है। छोटे दुश्मन ड्रोनों के खिलाफ एक ‘प्रभावी छतरी’ (effective umbrella) बनाना प्राथमिकता बन गई है।
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रॉबोटिक क्षमता: भविष्य के युद्धों में लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन को बाधित करने के लिए ‘स्वार्म ड्रोन्स’ (Swarm drones) और रोबोटिक तकनीक के महत्व को पहचाना गया है।
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सुरक्षात्मक उपाय: सेना अब फैलाव (dispersion), छलावरण (camouflage), और भूमिगत बुनियादी ढांचे (underground infrastructure) जैसे निष्क्रिय सुरक्षा उपायों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही है ताकि हवाई हमलों से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
निष्कर्ष
पश्चिम एशिया का यह संकट केवल दो देशों के बीच की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और सैन्य रणनीतियों को बदलने वाला साबित हो रहा है। जहाँ एक ओर कूटनीतिक रास्ते खोजने की कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी ओर बढ़ती सैन्य सक्रियता किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध की ओर इशारा कर रही है।
