अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) ने वैश्विक खेल जगत में निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। नए नियमों के अनुसार, अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की महिला प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाली हर एथलीट को अनिवार्य रूप से SRY जीन स्क्रीनिंग (एक प्रकार का सेक्स टेस्ट) से गुजरना होगा।
क्या है SRY जीन और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
SRY (Sex-determining Region Y) डीएनए का वह हिस्सा है जो आमतौर पर Y क्रोमोसोम पर पाया जाता है। यह शरीर में टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन और पुरुष यौन विकास की प्रक्रिया को शुरू करने के लिए जिम्मेदार होता है।
IOC का मानना है कि वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि एथलीट के शरीर में पुरुष क्रोमोसोम होने से उसे प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिलती है। आंकड़ों के अनुसार, एलीट स्तर पर:
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दौड़ और तैराकी में पुरुषों को 10-12% का लाभ मिलता है।
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जंपिंग और थ्रोइंग इवेंट्स में यह लाभ 20% से अधिक हो जाता है।
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पावर और स्ट्रेंथ (जैसे मुक्केबाजी और वेटलिफ्टिंग) वाले खेलों में यह अंतर 100% तक भी जा सकता है।
क्यों लिया गया यह निर्णय?
हाल के वर्षों में ट्रांसजेंडर महिलाओं और DSD (Differences in Sex Development) एथलीटों की भागीदारी खेल जगत में चर्चा का सबसे विवादास्पद विषय रही है। पेरिस ओलंपिक में इमान खलीफ़ की भागीदारी के बाद इस मुद्दे ने और जोर पकड़ा। IOC ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय ‘महिला श्रेणी की सुरक्षा और निष्पक्षता’ बनाए रखने के लिए लिया गया है।
परीक्षण की प्रक्रिया और प्रभाव
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अनिवार्य स्क्रीनिंग: यह नियम एलीट स्तर के ओलंपिक खेलों पर लागू होगा। हालांकि, स्थानीय या ग्रासरूट स्तर के खेलों को इससे बाहर रखा गया है।
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जीवन में एक बार: यदि कोई एथलीट इस टेस्ट में नेगेटिव (नेगेटिव यानी महिला क्रोमोसोम की पुष्टि) पाई जाती है, तो उसे जीवन में दोबारा यह टेस्ट नहीं देना होगा।
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पॉजिटिव रिपोर्ट का असर: यदि किसी एथलीट का SRY टेस्ट पॉजिटिव आता है, तो वह महिला श्रेणी में भाग नहीं ले पाएगी। हालांकि, वे पुरुष श्रेणी या मिश्रित (Mixed) श्रेणी में प्रतिस्पर्धा के लिए पात्र होंगे।
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अपवाद: कुछ दुर्लभ मामलों में, जैसे ‘कम्प्लीट एंड्रोजन इंसेंसिटिविटी सिंड्रोम’, जहाँ शरीर टेस्टोस्टेरोन का लाभ नहीं उठा पाता, एथलीटों को छूट मिल सकती है।
क्या एथलीट मना कर सकते हैं?
हाँ, एथलीट इस टेस्ट के लिए मना कर सकते हैं, लेकिन ऐसी स्थिति में उन्हें IOC द्वारा आयोजित किसी भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता (ओलंपिक, विंटर ओलंपिक, यूथ ओलंपिक आदि) में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
निष्कर्ष
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय खेल जगत में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाने की एक कोशिश है। हालांकि, मानवाधिकारों और वैज्ञानिक सटीकता को लेकर अभी भी कुछ विशेषज्ञों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
