निवार की सुबह पश्चिम एशिया के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ (Operation Roaring Lion) और ‘ऑपरेशन एपिक फ्युरी’ (Operation Epic Fury) का आगाज़ करते हुए राजधानी तेहरान समेत ईरान के 10 प्रमुख शहरों पर भीषण हवाई हमले किए हैं। इन हमलों ने न केवल ईरान के सैन्य ढांचे को हिला कर रख दिया है, बल्कि भारी नागरिक हताहतों की खबर ने पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया है।
भीषण तबाही: 201 मौतें और स्कूल पर मिसाइल हमला
ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, अब तक कम से कम 201 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 747 से अधिक लोग घायल हैं।
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छात्राओं की मौत: सबसे हृदयविदारक घटना दक्षिणी प्रांत होर्मोज्गन के मिनाब (Minab) शहर में हुई, जहाँ एक गर्ल्स स्कूल पर मिसाइल गिरने से 85 छात्राओं की मौत हो गई और 45 से अधिक घायल हैं।
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तेहरान में तबाही: तेहरान के मेहराबाद एयरपोर्ट और मध्य तेहरान के रिहायशी इलाकों में भारी बमबारी की गई है।
बड़ा दावा: ईरानी रक्षामंत्री और IRGC कमांडर ढेर
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, इजराइली एयरस्ट्राइक में ईरान के रक्षामंत्री अमीर नासिरजादेह (Amir Nasirzadeh) और रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के प्रमुख कमांडर मोहम्मद पाकपोर (Mohammad Pakpour) की मौत हो गई है। यदि इस खबर की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो यह ईरान के सैन्य नेतृत्व के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका होगा।
डोनाल्ड ट्रंप का संबोधन: “खतरनाक शासन का अंत करीब”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक 8 मिनट का वीडियो जारी कर इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि की। ट्रंप ने इसे “मेजर कॉम्बैट ऑपरेशन” करार देते हुए कहा:
“हमने ईरानी शासन से उत्पन्न होने वाले आसन्न खतरों को खत्म करने और अमेरिकी नागरिकों की रक्षा के लिए यह कदम उठाया है। ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति कभी नहीं दी जाएगी। ईरानी सुरक्षा बल या तो हथियार डाल दें या निश्चित मृत्यु का सामना करें।”
ईरान का पलटवार: खाड़ी देशों में हड़कंप
हमले के जवाब में ईरान ने भी बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है:
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मिसाइल वर्षा: ईरान ने इजरायल और अमेरिका के क्षेत्रीय ठिकानों पर दर्जनों मिसाइलें दागी हैं।
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खाड़ी देशों पर हमला: संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया गया है। दुबई के ‘पाम जुमेराह’ इलाके में भी मिसाइल गिरने की खबरें हैं।
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होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद करने की धमकी दी है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति ठप होने का खतरा पैदा हो गया है।
विवाद की जड़ क्या है? (The Core Dispute)
इजरायल और ईरान के बीच की दुश्मनी कोई नई नहीं है, लेकिन हालिया तनाव के तीन मुख्य कारण हैं:
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परमाणु कार्यक्रम: इजरायल का मानना है कि ईरान गुप्त रूप से परमाणु हथियार बना रहा है, जो इजरायल के अस्तित्व के लिए सीधा खतरा है।
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प्रॉक्सि वार (Proxy War): ईरान ‘हमास’, ‘हिजबुल्लाह’ और ‘हुती’ विद्रोहियों को समर्थन देता है। इजरायल का आरोप है कि ईरान इन समूहों के जरिए उस पर चारों तरफ से हमले करवा रहा है।
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अस्तित्व की लड़ाई: ईरान खुले तौर पर इजरायल को “अवैध देश” मानता है, जबकि इजरायल का कहना है कि वह अपनी रक्षा के लिए ईरान के सैन्य ठिकानों को तबाह करने का हक रखता है।
अमेरिका का रोल: रक्षक या हमलावर?
इस बार का हमला पिछले हमलों से अलग है क्योंकि इसमें अमेरिका सीधे तौर पर शामिल है।
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ट्रंप की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति: राष्ट्रपति ट्रंप ने सत्ता में आते ही ईरान के प्रति बेहद सख्त रुख अपनाया है। उनका स्पष्ट संदेश है कि वे ईरान के “आतंकी नेटवर्क” को जड़ से उखाड़ना चाहते हैं।
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रणनीतिक समर्थन: अमेरिका ने न केवल इजरायल को मिसाइलें और विमान दिए, बल्कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्युरी’ के तहत खुद के बमवर्षक विमानों (B-2 Bombers) का भी इस्तेमाल किया है।
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घरेलू राजनीति: ट्रंप अमेरिका के भीतर यह संदेश देना चाहते हैं कि उनके नेतृत्व में अमेरिका फिर से दुनिया का ‘पुलिसमैन’ बन गया है और अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा के लिए वह किसी भी देश पर हमला कर सकता है।
ईरान की प्रतिक्रिया: ‘सुसाइड मिशन’ या कूटनीति?
ईरान ने इस हमले को अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला माना है।
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रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की भूमिका: शीर्ष कमांडरों की मौत के बाद IRGC अब “अंतिम युद्ध” की बात कर रहा है।
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तेल का हथियार: ईरान ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ को बंद कर सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो दुनिया की 20% तेल सप्लाई रुक जाएगी, जिससे भारत समेत पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी।
आगे का रास्ता क्या है? (The Way Forward)
अब दुनिया के सामने तीन मुख्य स्थितियाँ (Scenarios) बन सकती हैं
| स्थिति | परिणाम |
| पूर्ण युद्ध (Full Scale War) | यदि ईरान बड़े पैमाने पर इजरायल के शहरों पर मिसाइल दागता है, तो यह युद्ध महीनों खिंच सकता है और इसमें रूस भी शामिल हो सकता है। |
| सत्ता परिवर्तन (Regime Change) | अमेरिका और इजरायल का लक्ष्य ईरान की वर्तमान सरकार को अस्थिर करना है ताकि वहां एक ‘पश्चिम-समर्थक’ शासन आ सके। |
| संयुक्त राष्ट्र का हस्तक्षेप | भारत और अन्य तटस्थ देश युद्धविराम (Ceasefire) के लिए दबाव डाल सकते हैं, हालांकि वर्तमान में इसकी संभावना कम दिख रही है। |
भारत के लिए यह खबर चिंताजनक है। ईरान में भारत का ‘चाबहार पोर्ट’ प्रोजेक्ट खतरे में पड़ सकता है। साथ ही, खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती होंगी।
