उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान में मत्स्य पालन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से दो दिवसीय ‘मीन महोत्सव’का सफल आयोजन किया गया। 27 और 28 फरवरी को आयोजित इस महोत्सव ने प्रदेश के मत्स्य पालकों और उद्यमियों के लिए एक साझा मंच तैयार किया, जहाँ आधुनिक तकनीक और व्यापारिक संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
उद्घाटन और मुख्य अतिथि
महोत्सव का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. एस.पी. सिंह बघेल (केंद्रीय राज्य मंत्री, पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य) और डॉ. संजय निषाद (मत्स्य विकास मंत्री, उत्तर प्रदेश) द्वारा किया गया। उद्घाटन सत्र में विभागीय योजनाओं की जानकारी साझा की गई और मत्स्य पालन को एक लाभकारी उद्योग के रूप में स्थापित करने पर जोर दिया गया।
तकनीक और व्यापार का संगम
महोत्सव के दूसरे दिन 50 से अधिक प्रतिष्ठित कंपनियों ने अपनी औद्योगिक प्रदर्शनी और स्टॉल लगाए। कार्यक्रम की पहुंच बढ़ाने के लिए इसका सीधा प्रसारण प्रदेश के सभी 75 जनपदों में वेबकास्टिंग और यूट्यूब के माध्यम से किया गया, जिससे हजारों मत्स्य पालक डिजिटल माध्यम से भी जुड़ सके।
महोत्सव के मुख्य आकर्षण निम्नलिखित रहे:
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फिश फूड कोर्ट: प्रोटीन जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट मत्स्य व्यंजनों के स्टॉल लगाए गए।
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तकनीकी सत्र: देश के जाने-माने वैज्ञानिकों और उद्यमियों ने मछली पालन की बारीकियों पर प्रकाश डाला।
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प्रदर्शनी: आधुनिक उपकरण, फीड (चारा), और मत्स्य बीज उत्पादन की नई तकनीकों का प्रदर्शन।
विशेषज्ञों का मार्गदर्शन: उत्पादन से लेकर निर्यात तक
तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने मत्स्य पालन के हर पहलू पर बहुमूल्य जानकारी साझा की:
| विशेषज्ञ | मुख्य विषय |
| श्री अभिजीत नहाते (कोरल लाइफ केयर) | मछली एवं झींगे का स्वास्थ्य प्रबंधन और दवाइयां |
| डॉ. के.एन. मोहन्ता (CIFE मुम्बई) | सस्टेनेबल फिशरीज की आवश्यकता और महत्व |
| डॉ. अतुल जैन (उदयपुर) | रंगीन (ऑर्नामेंटल) मछली पालन और स्वरोजगार |
| आकाश सिंह व अक्षय कुमार सिंह | मत्स्य प्रसंस्करण (Processing), ई-कॉमर्स और एक्सपोर्ट |
| श्रीमती पियूषिखा यादव | जेनेटिकली इम्प्रूव्ड रोहू-कतला और बायोफ्लॉक तकनीक |
| डॉ. डी.के. सिंह (IB ग्रुप) | फिश डायवर्सिफिकेशन और झींगा पालन से आय वृद्धि |
अमरोहा के प्रगतिशील किसान श्री गजेंद्र सिंह ढिल्लो ने उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि मत्स्य पालन में हानि की संभावना न्यूनतम है और यह किसानों के लिए हमेशा लाभ का सौदा साबित होता है। वहीं अशोक मनवानी और डॉ. आनंद त्रिपाठी ने मोती पालन (Pearl Culture) के माध्यम से आय बढ़ाने के गुर सिखाए।
प्रशासनिक सहयोग और समापन
कार्यक्रम के सफल आयोजन में महानिदेशक मत्स्य श्रीमती धनलक्ष्मी के., निदेशक श्री एन.एस. रहमानी और संयुक्त निदेशक श्री अनिल कुमार का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम के अंत में एक्वाएक्स (AquaX) के पदाधिकारियों, वैज्ञानिकों और प्रदेश भर से आए लगभग 1000 मत्स्य पालकों का आभार व्यक्त किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से उत्तर प्रदेश न केवल मत्स्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि ‘ब्लू रिवोल्यूशन’ (नीली क्रांति) के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
