नई दिल्ली, 26 फरवरी: तकनीक का असली उद्देश्य तब सफल होता है जब वह शारीरिक बाधाओं को पार कर किसी के जीवन में स्वतंत्रता का संचार करे। नई दिल्ली में आयोजित ‘AI Impact Summit 2026’ में IIT गांधीनगर की HAIx Lab ने एक ऐसा ही चमत्कार पेश किया है। इस लैब द्वारा विकसित ‘गेज-कंट्रोल्ड हिंदी वर्चुअल कीबोर्ड’ ने यह साबित कर दिया है कि एआई (AI) के माध्यम से अक्षमता को सक्षमता में बदला जा सकता है।
1. तकनीक जो मानवीय संवेदनाओं को समझती है
IIT गांधीनगर के सहायक प्रोफेसर और एआई-संचालित नवाचार केंद्र के सह-समन्वयक, प्रोफेसर योगेश के मीना ने इस शिखर सम्मेलन में अपने दो प्रमुख प्रोजेक्ट्स का प्रदर्शन किया। इनमें सबसे चर्चित रहा—हैंड्स-फ्री टाइपिंग सिस्टम। यह सिस्टम उन लोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है जो शारीरिक रूप से हाथ हिलाने या बोलने में सक्षम नहीं हैं।
नवाचार के मुख्य तकनीकी पहलू:
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आई-ट्रैकिंग (Eye-Tracking): यह तकनीक उपयोगकर्ता की आँखों की हलचल को ट्रैक करती है, जिससे वे बिना किसी स्पर्श के स्क्रीन पर कर्सर को नियंत्रित कर सकते हैं।
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न्यूरोसिग्नल्स का समावेश: आई-ट्रैकिंग के साथ-साथ इसमें शरीर के सूक्ष्म संकेतों जैसे EMG (Electromyography) और EEG (Electroencephalography) का भी उपयोग किया गया है।
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बहुभाषी समावेश: इस वर्चुअल कीबोर्ड की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें हिंदी सहित 22 प्रमुख भारतीय भाषाओं को शामिल किया गया है, जो इसे वैश्विक स्तर पर अद्वितीय बनाता है।
2. HAIx Lab का मिशन: मेडिकल सेक्टर में क्रांति
HAIx Lab का गठन ही इस उद्देश्य के साथ किया गया है कि एआई के साथ चिकित्सा क्षेत्र का विकास कैसे किया जाए।
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आत्मनिर्भरता की ओर कदम: यह तकनीक लकवाग्रस्त (Paralyzed) रोगियों या सीमित शारीरिक क्षमता वाले व्यक्तियों को डिजिटल दुनिया से जुड़ने और संवाद करने की शक्ति देती है।
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न्यूनतम हस्तक्षेप: यह प्रणाली पूरी तरह से ‘हैंड्स-फ्री’ है, जिससे गंभीर मरीजों को किसी बाहरी मदद की आवश्यकता कम हो जाती है।
3. भविष्य की संभावनाएं और सामाजिक प्रभाव
प्रोफेसर मीना के अनुसार, यह नवाचार तकनीक को हर वर्ग तक पहुँचाने और उसे मानवीय बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। एआई-इम्पैक्ट समिट में इस प्रोजेक्ट को न केवल तकनीकी रूप से उन्नत माना गया, बल्कि इसे समाज के लिए ‘वरदान’ की संज्ञा दी गई।
विशेष बाइट (प्रोफेसर योगेश के मीना):
“यह गेज-कंट्रोल्ड सिस्टम उन लोगों के लिए डिजिटल आजादी की तरह है जो बोल नहीं सकते। अब वे केवल अपनी आँखों की मदद से टाइप कर सकेंगे और अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकेंगे।”
डिजिटल समावेशिता का नया दौर
IIT गांधीनगर की यह पहल बताती है कि भविष्य में एआई केवल डेटा प्रोसेसिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह चिकित्सा सहायता और पुनर्वास (Rehabilitation) का एक सशक्त माध्यम बनेगा। HAIx Lab का यह प्रोजेक्ट भारत में ‘असिस्टेंट टेक्नोलॉजी’ के क्षेत्र में एक नई क्रांति का आगाज है।
