बिहार विधानसभा में गुरुवार को पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने राज्य के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। वित्त मंत्री विजेंद्र यादव द्वारा सदन में रखी गई यह रिपोर्ट कृषि, परिवहन, खनन और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और राजस्व प्रबंधन की विफलता को उजागर करती है。
1. कृषि विभाग: आपदा के नाम पर अपात्रों को रेवड़ियाँ
कैग की रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला खुलासा कृषि ‘इनपुट सब्सिडी’ को लेकर हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों रुपयों का भुगतान उन क्षेत्रों में किया गया जो आपदा प्रभावित थे ही नहीं:
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अपात्र जिले: वर्ष 2019 में 10 ऐसे जिलों में ₹21.48 करोड़ की सब्सिडी बांटी गई, जिन्हें आपदा प्रबंधन विभाग ने बाढ़ प्रभावित घोषित नहीं किया था。
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क्षेत्रफल में विसंगति: रबी और खरीफ सीजन 2019-20 के दौरान ₹151.92 करोड़ की सब्सिडी ऐसे क्षेत्रों में दी गई, जो चिन्हित फसल क्षति क्षेत्र से 1.34 लाख हेक्टेयर अधिक थे。
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कम नुकसान पर भी भुगतान: 2019 से 2022 के बीच 6.81 लाख से अधिक मामलों में ₹159.28 करोड़ की सब्सिडी उन किसानों को दी गई, जिनकी फसल क्षति 33% से कम थी。
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नियमों की अनदेखी: राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) के मानकों का पालन न करने के कारण ₹3.74 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान हुआ。
2. परिवहन विभाग: सुरक्षा से समझौता और राजस्व की हानि
परिवहन विभाग में फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में भारी लापरवाही सामने आई है, जो सीधे तौर पर सड़क सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है:
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फर्जी फिटनेस: जांच में पाया गया कि 47,223 वाहनों में से 42,672 वाहनों (90% से अधिक) को नियमों के उल्लंघन के बावजूद फिटनेस सर्टिफिकेट दे दिए गए, जिससे सरकार को ₹2.27 करोड़ की राजस्व हानि हुई。
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अनुत्तीर्ण वाहन सड़कों पर: फिटनेस परीक्षण में अनुत्तीर्ण पाए गए 35,921 वाहनों को भी क्लीन चिट दे दी गई。
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प्रक्रिया में चूक: ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटरों में मानकों का पालन नहीं हुआ और ‘ऑनलाइन अपॉइंटमेंट’ प्रक्रिया को भी नजरअंदाज किया गया。
| विभाग | बकाया राशि (करोड़ रुपये में) |
| खनन एवं भूविज्ञान | ₹1,505.16 |
| भू-राजस्व मद | ₹302.47 |
| परिवहन (माल एवं यात्री कर) | ₹248.58 |
| मुद्रांक एवं निबंधन शुल्क | ₹215.61 |
| राज्य उत्पाद | ₹54.30 |
4. शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में विसंगतियां
रिपोर्ट में बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम का भी उल्लेख है, जहाँ ठेकेदारों को ₹94.25 लाख का अनुचित लाभ पहुँचाने की बात कही गई है。 इसके अलावा, बिजली कर और जीएसटी (GST) मद में भी करोड़ों की राशि बकाया है。
जवाबदेही पर उठते सवाल
चार खंडों में पेश की गई इस रिपोर्ट ने बिहार सरकार की कार्यप्रणाली और राजस्व संग्रहण तंत्र पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सदन में रिपोर्ट पेश होते ही राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। मुख्य सवाल यह है कि बिना मानकों की जांच किए और अपात्रों को इतनी बड़ी राशि का भुगतान कैसे संभव हुआ?
विपक्ष अब इन अनियमितताओं को लेकर संबंधित विभागों की जवाबदेही तय करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहा है。
