भारत के शहरी परिवहन (Urban Transport) को प्रदूषण मुक्त और आधुनिक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा अपडेट दिया है। सोमवार को राज्यसभा में जानकारी दी गई कि ‘प्रधानमंत्री ई-बस सेवा’ योजना के तहत वर्ष 2027 तक देश के 116 शहरों में 10,000 वातानुकूलित (AC) ई-बसेंउपलब्ध करा दी जाएंगी। इसके बाद अगले चरण में 35,000 अतिरिक्त बसें प्रदान करने के लिए एक नई योजना शुरू करने की भी तैयारी है।
योजना का मुख्य उद्देश्य और विस्तार
आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने सदन में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 अगस्त 2023 को इस योजना की घोषणा की थी। इसका प्राथमिक लक्ष्य उन छोटे और मंझोले शहरों में परिवहन सुविधा प्रदान करना है, जहाँ व्यवस्थित बस सेवा का अभाव है।
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शहरों का चयन: योजना के लिए 178 पात्र शहरों में से 116 शहरों ने भाग लिया और उन्हें बसें आवंटित की गईं।
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पीपीपी मॉडल: यह पूरी योजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर आधारित है, जिसमें संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी राज्य सरकारों और संबंधित निकायों की होगी।
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इंफ्रास्ट्रक्चर विकास: ई-बसों के लिए डिपो और चार्जिंग बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सरकार ने ₹112.46 करोड़ की राशि भी स्वीकृत की है।
बिहार में समन्वय की कमी से देरी
रिपोर्ट में बिहार का विशेष जिक्र किया गया है। मंत्री ने बताया कि बिहार के केवल चार शहरों को ही इस योजना के लिए योग्य पाया गया, जिनके लिए 400 बसें स्वीकृत की गई हैं:
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पटना: 150 बसें
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भागलपुर, दरभंगा, गया, मुजफ्फरपुर और पूर्णिया: 50-50 बसें हालांकि, बिहार में ‘समन्वय समितियों’ (Coordination Committees) के गठन में देरी के कारण योजना की गति धीमी है।
प्रदूषण पर प्रहार और रोजगार के अवसर
सरकार का मानना है कि इन 10,000 ई-बसों के सड़क पर उतरने से:
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कार्बन उत्सर्जन में कमी: डीजल बसों के मुकाबले ई-बसें पर्यावरण के लिए वरदान साबित होंगी।
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सस्ता सफर: आम जनता के समय और पैसे की बचत होगी।
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रोजगार: बस संचालन, चार्जिंग स्टेशनों के रखरखाव और प्रबंधन में हजारों नए रोजगार पैदा होंगे।
अगला कदम: 35,000 बसों का नया लक्ष्य
मंत्री मनोहर लाल ने स्पष्ट किया कि वर्तमान 10,000 बसों का लक्ष्य 2027 तक पूरा होने के बाद, सरकार 35,000 और ई-बसें देने की नई योजना शुरू करेगी। इसके लिए राज्यों को नए सिरे से आवेदन करना होगा। पिछले महीने ही 225 बसें वितरित की गई हैं और 6,500 बसों के लिए निविदाएं (Tenders) पूरी कर ली गई हैं।
News Drift Analysis: यह योजना भारत के ‘नेट जीरो’ (Net Zero) लक्ष्य की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। विशेषकर टीयर-2 और टीयर-3 शहरों में, जहाँ मेट्रो संभव नहीं है, वहां ये इलेक्ट्रिक बसें लाइफलाइन साबित हो सकती हैं। हालांकि, बिहार जैसे राज्यों में प्रशासनिक सुस्ती इस महत्वपूर्ण परियोजना की राह में रोड़ा बन रही है।
