भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: रूसी तेल पर पाबंदी और कृषि बाजार में ‘इरादों’ की जीत
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुआ अंतरिम व्यापार समझौता वैश्विक भू-राजनीति और आर्थिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है । यह समझौता एक ऐसे नाजुक समय पर हुआ है जब दोनों देशों के व्यापारिक संबंध रूस से तेल खरीद और अतिरिक्त दंडात्मक शुल्कों के कारण तनावपूर्ण थे । जहाँ विपक्ष इसे ‘दबाव की रणनीति’ बता रहा है, वहीं सरकार इसे निर्यातकों के लिए नए अवसर के रूप में देख रही है ।
समझौते के मुख्य बिंदु (Key Terms)
संशोधित दस्तावेज के आधार पर इस समझौते की चार प्रमुख शर्तें निम्नलिखित हैं:
1. आयात-निर्यात शुल्क में बड़ी कटौती
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अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर लगने वाले पारस्परिक शुल्क को 18 फीसद पर तय किया है ।
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यह दर आसियान देशों (19%) और वियतनाम (20%) से भी कम है, जिससे भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में बढ़त मिले
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वस्त्र, चमड़ा, रबर, रसायन और मशीनरी जैसे क्षेत्रों को इसका लाभ मिलेगा, जबकि विमान पुर्जों और जेनेरिक दवाओं पर शुल्क पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है ।
2. भारत की खरीद योजना: ‘प्रतिबद्धता’ से ‘इरादा’ तक
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प्रारंभिक दस्तावेज में भारत पर 500 अरब डॉलर के अमेरिकी उत्पाद खरीदने का कानूनी दबाव था, जिसे संशोधित कर अब केवल ‘खरीदने का इरादा’ कर दिया गया है ।
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अगले पांच वर्षों में भारत अमेरिका से ऊर्जा उत्पाद, विमानन पुर्जे, प्रौद्योगिकी उपकरण और कोकिंग कोल खरीदने की योजना रखता है ।
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वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, यह कोई बाध्यकारी शर्त नहीं है; यदि भारत को अन्यत्र बेहतर सौदे मिलते हैं, तो वह उनका लाभ उठा सकता है ।
3. कृषि बाजार: दालों और डेयरी को सुरक्षा
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भारतीय किसानों के कड़े विरोध के बाद, वाइट हाउस ने संशोधित दस्तावेज से ‘दालों’ का जिक्र पूरी तरह हटा दिया है ।
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500 अरब डॉलर की खरीद सूची से ‘कृषि’ शब्द को भी हटा दिया गया है, जो घरेलू कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी राहत है ।
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हालांकि, भारत कुछ अमेरिकी उत्पादों जैसे बादाम, अखरोट, ताजे फल और सोयाबीन तेल पर शुल्क कम करेगा, लेकिन डेयरी उत्पादों पर कोई छूट नहीं दी गई है ।
4. ऊर्जा सुरक्षा और रूसी तेल विवाद
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समझौते की सबसे विवादास्पद शर्त रूसी तेल की खरीद बंद करना है ।
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भारत ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से रूसी तेल का आयात बंद करने पर सहमति जताई है 。
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अमेरिकी वाणिज्य विभाग इसकी निगरानी करेगा। यदि भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने के संकेत मिले, तो अमेरिका पुनः 25% दंडात्मक शुल्क लागू कर सकता है ।

राजनीतिक सरोकार और चुनौतियाँ
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस समझौते को ‘पूर्ण आत्मसमर्पण’ करार दिया है, उनका आरोप है कि अमेरिका की नजर भारत के डेटा पर है । वहीं, आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि रूस के सस्ते तेल के बजाय वेनेजुएला से तेल खरीदना भारत के आयात बिल को बढ़ा सकता है ।
यह अंतरिम समझौता मार्च 2026 तक अंतिम रूप लेगा । जहाँ 18% शुल्क दर निर्यातकों के लिए उत्सव का कारण है, वहीं रूसी तेल पर लगी पाबंदी और अमेरिकी निगरानी भारत की भविष्य की ऊर्जा रणनीति के लिए एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी ।
