पश्चिमी एशिया (West Asia) में जारी युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से उत्पन्न वैश्विक तेल संकट के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती से संभाला है। मार्च महीने में रूस से भारत आने वाले कच्चे तेल की आपूर्ति में 82% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो अब अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर के करीब पहुँच गई है।
हॉर्मुज संकट और भारत की रणनीति
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाला व्यापार पूरी तरह ठप है। इसके चलते इराक, सऊदी अरब और यूएई जैसे खाड़ी देशों से भारत को होने वाली तेल आपूर्ति में 45% से 72% तक की गिरावट आई है। भारत अपनी तेल जरूरतों का 88% आयात पर निर्भर है, ऐसे में खाड़ी देशों से सप्लाई कटना एक बड़ा खतरा था।
रूस बना भारत का सबसे बड़ा सहारा
इस संकट के समय में रूस भारत के लिए सबसे भरोसेमंद भागीदार बनकर उभरा है। आंकड़ों के अनुसार:
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मार्च में रूस से तेल आयात बढ़कर 1.9 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) तक पहुँच गया है।
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भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी फरवरी के 20.1% से बढ़कर मार्च में 45.2% हो गई है।
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अनुमान है कि अप्रैल में भी यही रुझान जारी रहेगा और आयात 2 मिलियन bpd के आंकड़े को छू सकता है।
अमेरिका ने दी 30 दिनों की छूट
एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम में, अमेरिका ने भारतीय रिफाइनरियों को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की विशेष छूट (Waiver) दी है। हॉर्मुज मार्ग बंद होने के कारण अमेरिका ने वैश्विक आपूर्ति को संतुलित रखने के लिए यह कदम उठाया है। वाशिंगटन अब भारत द्वारा रूसी तेल के उपभोग पर पहले की तुलना में अधिक लचीला रुख अपना रहा है।
बाजार विशेषज्ञों की राय
मार्केट एनालिटिक्स फर्म केप्लर (Kpler) के अनुसार, खाड़ी देशों से होने वाली कमी को रूसी तेल ने बखूबी पूरा किया है। इससे भारतीय रिफाइनरियों को बिना किसी बाधा के काम जारी रखने में मदद मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस अब भारत के आयात बास्केट की ‘रीढ़’ बन चुका है।
