उत्तर प्रदेश को $1 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में योगी सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक सुधार किया है। कैबिनेट की हालिया बैठक में दो महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है जो न केवल रियल एस्टेट और औद्योगिक विकास की रफ्तार बढ़ाएंगे, बल्कि जल संरक्षण के क्षेत्र में भी मील का पत्थर साबित होंगे।
1. भूमि परिवर्तन की ‘दोहरी मंजूरी’ खत्म: अब एक ही खिड़की से होगा काम
राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 80 में संशोधन के लिए अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ उन निवेशकों और आम नागरिकों को मिलेगा जो कृषि भूमि को गैर-कृषि (आवासीय या औद्योगिक) उपयोग में बदलना चाहते थे।
क्या बदला है?
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पुरानी व्यवस्था: पहले लोगों को पहले धारा 80 के तहत भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति लेनी पड़ती थी और फिर संबंधित प्राधिकरण (जैसे LDA, नोएडा या आवास विकास) से नक्शा पास कराना पड़ता था। इस दोहरी प्रक्रिया में समय और पैसा दोनों अधिक खर्च होते थे।
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नई व्यवस्था: अब अधिसूचित शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में ‘मैप अप्रूवल’ (नक्शा पास) होते ही भूमि परिवर्तन (Land-use conversion) स्वतः स्वीकृत मान लिया जाएगा। यानी नक्शा पास होते ही ज़मीन का स्टेटस कृषि से गैर-कृषि हो जाएगा।
इसका प्रभाव: इस ‘सिंगल-विंडो’ मैकेनिज्म से लालफीताशाही कम होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में होने वाली देरी पर लगाम लगेगी।
2. सुरक्षित उपचारित जल पुन: उपयोग नीति 2026: हर घर में दो पाइपलाइन का सपना
बढ़ते जल संकट को देखते हुए यूपी कैबिनेट ने ‘सेफ रियूज ऑफ ट्रीटेड वॉटर पॉलिसी 2026’ को मंजूरी दी है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट जल को साफ करके उसे दोबारा इस्तेमाल के लायक बनाना है।
नीति की मुख्य विशेषताएं:
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डबल पाइपलाइन सिस्टम: भविष्य में शहरी घरों में दो तरह की पाइपलाइन होंगी। एक पीने और खाना पकाने के लिए (Potable water) और दूसरी उपचारित पानी (Treated water) के लिए, जिसका उपयोग टॉयलेट फ्लश, पौधों को पानी देने और सफाई में किया जा सकेगा।
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चरणबद्ध क्रियान्वयन: पहले चरण में इस पानी का उपयोग नगर निकायों द्वारा पार्कों, निर्माण कार्यों और बागवानी के लिए किया जाएगा। दूसरे चरण में इसे उद्योगों, कृषि और रेलवे (कोच धुलाई) के लिए विस्तारित किया जाएगा।
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पर्यावरण संरक्षण: सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और फेकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (FSTP) के माध्यम से प्रदूषित पानी को नदियों में गिरने से रोका जाएगा, जिससे गंगा और अन्य नदियाँ स्वच्छ रहेंगी।
निष्कर्ष
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के अनुसार, ये सुधार प्रदेश को ‘मैन्युफैक्चरिंग हब’ बनाने और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए उठाए गए हैं। जहाँ एक ओर भूमि सुधारों से ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा मिलेगा, वहीं जल नीति से प्रदेश भविष्य की जल किल्लत से निपटने के लिए तैयार होगा।
