हाल ही में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले ने देश की राजनीति में एक नई चर्चा छेड़ दी है। अक्सर लोग लोकसभा चुनाव की गहमागहमी तो समझते हैं, लेकिन राज्यसभा (Rajya Sabha) के चुनाव की प्रक्रिया काफी तकनीकी और पेचीदा होती है। आइए जानते हैं कि आपके राज्य के विधायक (MLA) कैसे चुनते हैं देश के सबसे बड़े सदन के प्रतिनिधि।
1. कौन होता है वोटर और क्या है योग्यता?
राज्यसभा एक स्थाई सदन है, जो कभी भंग नहीं होता। इसके सदस्यों का चुनाव सीधे जनता नहीं करती, बल्कि राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य (MLAs) करते हैं।
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उम्र: उम्मीदवार की आयु कम से कम 30 वर्ष होनी चाहिए।
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कार्यकाल: एक सदस्य 6 साल के लिए चुना जाता है। हर दो साल में एक-तिहाई सदस्य रिटायर होते हैं, जिससे सदन की निरंतरता बनी रहती है।
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नामांकन: राष्ट्रपति साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों से 12 सदस्यों को सीधे मनोनीत (Nominate) भी करते हैं।
2. ‘सिंगल ट्रांसफरेबल वोट’ (STV) क्या है?
यहाँ चुनाव ‘फर्स्ट पास्ट द पोस्ट’ (जिसे सबसे ज्यादा वोट मिले वो जीता) के आधार पर नहीं होता। यहाँ ‘समानुपातिक प्रतिनिधित्व’ प्रणाली अपनाई जाती है। विधायक एक बैलट पेपर पर अपनी पसंद (Preference) मार्क करते हैं— पहली पसंद, दूसरी पसंद, तीसरी पसंद आदि।
3. जीत का गणित: ‘कोटा’ (Winning Math)
एक उम्मीदवार को जीतने के लिए एक निश्चित संख्या में वोटों की जरूरत होती है जिसे ‘कोटा’ कहा जाता है। इसका एक खास फॉर्मूला है:
उदाहरण के तौर पर: मान लीजिए किसी राज्य में 200 विधायक हैं और 4 सीटों पर चुनाव होना है।
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कुल सीटें:
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200 को 5 से भाग देने पर आएगा 40।
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अब इसमें 1 जोड़ने पर कोटा बनेगा 41। यानी किसी भी उम्मीदवार को अपनी सीट पक्की करने के लिए कम से कम 41 ‘पहली पसंद’ के वोटों की जरूरत होगी।
4. सरप्लस वोट और एलिमिनेशन
अगर किसी उम्मीदवार को 41 से ज्यादा वोट (जैसे 45 वोट) मिल जाते हैं, तो उसके अतिरिक्त 4 वोट बेकार नहीं जाते। वे उन उम्मीदवारों को ट्रांसफर कर दिए जाते हैं जिन्हें विधायकों ने अपनी दूसरी पसंद (Second Preference) के रूप में चुना था। यही कारण है कि इसे ‘ट्रांसफरेबल वोट’ कहा जाता है।
निष्कर्ष
राज्यसभा चुनाव में छोटी पार्टियों और निर्दलीय विधायकों की भूमिका बहुत बढ़ जाती है। अक्सर पार्टियां ‘क्रॉस-वोटिंग’ के डर से अपने विधायकों की घेराबंदी करती हैं, क्योंकि यहाँ एक-एक वोट का हिसाब सत्ता के समीकरण बदल सकता है।
