भारत में बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर सरकार स्तर पर गंभीर विचार-विमर्श जारी है। हाल के महीनों में डिजिटल लत, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े बढ़ते मामलों के बीच केंद्र सरकार बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर आयु-आधारित प्रतिबंध (Age-based restrictions) लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
नई दिल्ली में आयोजित ‘AI इम्पैक्ट समिट 2026’ के दौरान केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संकेत दिए कि सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस को सीमित या प्रतिबंधित करने के लिए कानूनी ढांचे पर चर्चा कर रही है।
भारत में क्या हो सकता है बदलाव?
🔹 16 वर्ष से कम उम्र पर प्रतिबंध की चर्चा
सरकार के स्तर पर यह विचार किया जा रहा है कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया उपयोग से रोका जाए या उस पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए।
🔹 राज्यों की पहल
गोवा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में भी इस दिशा में कानून बनाने पर विचार चल रहा है
कुछ प्रस्तावों में यह भी है कि 16 वर्ष से कम बच्चों के अकाउंट बंद किए जाएं
🔹 आर्थिक सर्वेक्षण की सिफारिश
भारत के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने भी सोशल मीडिया के लिए आयु सीमा तय करने की सिफारिश की है, क्योंकि डिजिटल लत एक बड़ी समस्या बन रही है
🔹 बच्चों के डेटा की सुरक्षा
DPDP Act, 2023 के तहत:
- बच्चों के डेटा के लिए पैरेंटल कंसेंट जरूरी
- बच्चों पर लक्षित विज्ञापन व ट्रैकिंग पर रोक
समस्या कितनी गंभीर है?
- भारत में 90% से अधिक किशोर सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं
- मानसिक स्वास्थ्य, चिंता, अवसाद और स्क्रीन एडिक्शन तेजी से बढ़ रहे हैं
- कई मामलों में सोशल मीडिया से जुड़ी घटनाएं आत्महत्या तक पहुंच रही हैं
👉 इसलिए सरकार इसे पब्लिक हेल्थ और सुरक्षा का मुद्दा मान रही है
दुनिया भर में कई देश बच्चों को सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए कड़े कानून बना चुके हैं या प्रक्रिया में हैं:
| देश | प्रतिबंध/नियम की स्थिति | विवरण |
| ऑस्ट्रेलिया | पूर्ण प्रतिबंध (16 साल से कम) | नवंबर 2024 में कानून पास किया गया। 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट बनाना गैरकानूनी है। |
| फ्रांस | प्रतिबंधित (15 साल से कम) | 15 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के लिए माता-पिता की स्पष्ट अनुमति की आवश्यकता होती है। |
| चीन | समय सीमा और ‘माइनर मोड’ | बच्चों के लिए ‘यूथ मोड’ अनिवार्य है, जो रात में ऐप एक्सेस बंद कर देता है और दैनिक समय (40-90 मिनट) सीमित करता है। |
| ब्रिटेन (UK) | ऑनलाइन सेफ्टी एक्ट | सोशल मीडिया कंपनियों पर भारी जुर्माने का प्रावधान है यदि वे बच्चों को हानिकारक कंटेंट से बचाने में विफल रहती हैं। |
| अमेरिका (फ्लोरिडा) | प्रतिबंधित (14 साल से कम) | फ्लोरिडा जैसे राज्यों ने 14 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध के कानून बनाए हैं। |
पक्ष में तर्क (लाभ):
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मानसिक स्वास्थ्य: अध्ययनों के अनुसार, अत्यधिक सोशल मीडिया इस्तेमाल से बच्चों में अवसाद, एंग्जायटी और नींद की कमी की समस्या बढ़ रही है।
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साइबर बुलिंग और ग्रूमिंग: कम उम्र के बच्चे ऑनलाइन शिकारियों और साइबर बुलिंग को पहचानने में सक्षम नहीं होते। प्रतिबंध उन्हें इन खतरों से बचाएगा।
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एल्गोरिदम का प्रभाव: सोशल मीडिया एल्गोरिदम बच्चों को एडिक्ट बनाने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं, जो उनके संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development) को प्रभावित करते हैं।
चुनौतियां और विपक्ष:
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क्रियान्वयन (Enforcement): सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बच्चे फर्जी जन्मतिथि या VPN का उपयोग करके इन प्रतिबंधों को कैसे चकमा देंगे?
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निजता (Privacy): उम्र सत्यापन के लिए सरकार या कंपनियों को आईडी प्रूफ मांगना पड़ सकता है, जिससे डेटा प्राइवेसी का खतरा बढ़ जाता है।
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डिजिटल साक्षरता: कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ‘बैन’ करने के बजाय बच्चों को ‘डिजिटल साक्षर’ बनाना और सुरक्षित इंटरनेट सिखाना बेहतर विकल्प है।
भारत सरकार का यह कदम वैश्विक रुझान के अनुरूप है। हालांकि, पूर्ण प्रतिबंध के बजाय सरकार एक मध्यम मार्ग अपना सकती है, जिसमें माता-पिता की अनुमति और सख्त उम्र सत्यापन अनिवार्य होगा।
