केंद्र सरकार अपनी महत्वाकांक्षी योजना ‘प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान’ (PM-KUSUM) को एक नए और आधुनिक अवतार PM-KUSUM 2.0 में लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। इस संशोधित योजना का सबसे बड़ा आकर्षण बैटरी ऊर्जा भंडारण (Battery Storage)का प्रावधान होगा, जिससे कृषि क्षेत्र में बिजली की समस्या को दूर करने में बड़ी मदद मिलेगी।
क्यों पड़ी बैटरी स्टोरेज की जरूरत?
वर्तमान में चल रही PM-KUSUM योजना (जो 2019 में शुरू हुई थी) मुख्य रूप से सौर पंपों के माध्यम से दिन में बिजली उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। हालांकि, सौर ऊर्जा उत्पादन और खेती के लिए बिजली की मांग के समय में अंतर (Mismatch) रहता है।
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चुनौती: सौर ऊर्जा दोपहर में अपने चरम पर होती है, जबकि किसान अक्सर सुबह या शाम को सिंचाई करना पसंद करते हैं।
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समाधान: प्रस्तावित बैटरी स्टोरेज सिस्टम दोपहर की अतिरिक्त बिजली को स्टोर करेगा, जिसका उपयोग किसान धूप न होने पर या रात के समय भी कर सकेंगे।
ऊर्जा मंत्रालय और MNRE के बीच चर्चा
सूत्रों के अनुसार, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) और विद्युत मंत्रालय के बीच भंडारण की क्षमता को लेकर चर्चा जारी है। ऊर्जा मंत्रालय ने 4 घंटे के बैटरी बैकअप का सुझाव दिया है, जबकि MNRE ने फिलहाल 2 घंटे की क्षमता का प्रस्ताव रखा है।
योजना की समय सीमा बढ़ाई गई
मौजूदा PM-KUSUM योजना की समय सीमा 31 मार्च को समाप्त हो रही है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने शनिवार को उन परियोजनाओं के लिए समय सीमा बढ़ा दी है जो अभी पूरी नहीं हुई हैं। अब इन लंबित परियोजनाओं को PM-KUSUM 2.0 के तहत समाहित (Subsume) किया जाएगा ताकि फंड और कार्यान्वयन में कोई रुकावट न आए।
PM-KUSUM के तीन प्रमुख घटक (Components):
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घटक A: खाली भूमि पर विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करना।
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घटक B: स्टैंडअलोन (ऑफ-ग्रिड) सौर पंप लगाना।
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घटक C: मौजूदा ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों का सौरीकरण करना।
फरवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के तहत कुल 12,164 मेगावाट क्षमता स्थापित की जा चुकी है। नई नीति का उद्देश्य इस प्रक्रिया को और तेज करना और ग्रिड प्रबंधन को बेहतर बनाना है।
