उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को $1 ट्रिलियन बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। आगामी चुनावों और आर्थिक विकास को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने राज्य के 5 प्रमुख एक्सप्रेसवे के किनारे 27 मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक क्लस्टर (IMLCs) विकसित करने की योजना को मंजूरी दी है। यह कदम न केवल राज्य में औद्योगिक विस्तार करेगा, बल्कि लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।
इन 5 एक्सप्रेसवे के साथ बदलेगी प्रदेश की सूरत
सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना मुख्य रूप से पांच प्रमुख एक्सप्रेसवे के आसपास केंद्रित है:
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पूर्वांचल एक्सप्रेसवे
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बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे
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आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे
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गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे
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गंगा एक्सप्रेसवे
योजना की खास बातें और निवेश
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जमीन का विशाल हिस्सा: 26 जिलों में फैले इन 27 क्लस्टर्स के लिए 12,700 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है, जिसमें से लगभग 85% जमीन का अधिग्रहण पहले ही पूरा हो चुका है।
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बजट का आवंटन: हाल ही में संभल के लॉजिस्टिक हब के लिए ₹245 करोड़ और मेरठ क्लस्टर के लिए ₹213 करोड़ के फंड को हरी झंडी दी गई है।
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पहले चरण का आगाज: पहले चरण में 12 क्लस्टर्स को विकसित किया जाएगा। उन्नाव के 300 एकड़ वाले क्लस्टर में लगभग पूरा आवंटन हो चुका है।
किन जिलों को मिलेगा लाभ?
इस औद्योगिक क्रांति से मेरठ, संभल, हरदोई, उन्नाव, शाहजहाँपुर, फिरोजाबाद, इटावा, बदायूँ, सुल्तानपुर, अमेठी, अंबेडकर नगर और हमीरपुरजैसे जिले सीधे तौर पर जुड़ेंगे। सरकार की रणनीति ‘एंकर इन्वेस्टर’ (बड़े निवेशकों) को आकर्षित करने की है, जिससे उनके इर्द-गिर्द छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) का एक पूरा ईकोसिस्टम तैयार हो सके।
बुनियादी ढांचे पर जोर
औद्योगिक इकाइयों के लिए सरकार एक्सप्रेसवे से सीधे संपर्क वाली सर्विस रोड तैयार कर रही है। इसके साथ ही क्लस्टर्स के भीतर 30 मीटर चौड़ी आंतरिक सड़कें, पावर सब-स्टेशन और ट्रंक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है ताकि कंपनियों को काम शुरू करने में कोई देरी न हो।
विशेषज्ञ का मत: अधिकारियों का कहना है कि जब कोई बड़ी कंपनी (जैसे CAN-PACK या यूनाइटेड ब्रुअरीज) किसी क्लस्टर में आती है, तो उसका ‘मल्टीप्लायर इफेक्ट’ होता है। इससे लॉजिस्टिक खर्च कम होगा और स्थानीय सप्लाई चेन मजबूत होगी।
