पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से उत्पन्न संकट के बीच, केंद्र सरकार ने भारतीय उद्योगों को बड़ी संजीवनी दी है। शुक्रवार को सरकार ने कमर्शियल एलपीजी (LPG) के आवंटन में 20% की अतिरिक्त वृद्धि की घोषणा की, जिससे अब कुल आपूर्ति संकट-पूर्व स्तर के 70% तक पहुँच गई है।
किन उद्योगों को मिलेगा सबसे ज्यादा लाभ?
पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, आपूर्ति में इस वृद्धि का मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों को समर्थन देना है जो श्रम-प्रधान (Labour Intensive) हैं। प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में शामिल हैं:
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स्टील और ऑटोमोबाइल
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टेक्सटाइल और केमिकल्स
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प्लास्टिक और डाइस (Dyes)
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होटल, रेस्तरां और डेयरी: छोटे व्यवसायों जैसे ढाबों और फूड प्रोसेसिंग इकाइयों को भी राहत मिलेगी।
आपूर्ति बढ़ने के पीछे के मुख्य कारण
युद्ध के बावजूद भारत ने एलपीजी की कमी को दूर करने के लिए दोहरी रणनीति अपनाई है:
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घरेलू उत्पादन में वृद्धि: सरकार ने रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने का आदेश दिया है, जिससे घरेलू उत्पादन में लगभग 40% का उछाल आया है।
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गैर-पश्चिम एशियाई देशों से आयात: भारत अब पश्चिम एशिया के बजाय अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से एलपीजी मंगा रहा है।
एक महीने की आपूर्ति सुरक्षित
पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि घरेलू उपयोग (रसोई गैस) के लिए कोई कमी नहीं है। सरकार ने भविष्य के लिए लगभग एक महीने का स्टॉकसुरक्षित कर लिया है। साथ ही, कमर्शियल उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे जहाँ संभव हो, एलपीजी से पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) की ओर शिफ्ट हों।
