वैश्विक जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की जंग में भारत ने एक बार फिर अपनी मजबूत प्रतिबद्धता जाहिर की है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2035 के लिए भारत के नए ‘नेशनली डिटरमाइंड कंट्रीब्यूशन्स’ (NDCs) यानी जलवायु लक्ष्यों का अनावरण किया है। हालांकि ये लक्ष्य पिछले वादों की तुलना में छोटे अपग्रेड (Small Upgrades) लग सकते हैं, लेकिन वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और अमेरिका जैसे बड़े देशों के पीछे हटने के दौर में भारत का यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या हैं भारत के तीन मुख्य लक्ष्य (NDC-3)?
भारत ने 2035 तक के लिए तीन प्रमुख स्तंभों पर ध्यान केंद्रित किया है:
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उत्सर्जन तीव्रता में कमी (Emissions Intensity): भारत ने अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की उत्सर्जन तीव्रता को 2005 के स्तर के मुकाबले 47% तक कम करने का वादा किया है। यह 2030 के लिए तय किए गए 45% के लक्ष्य से दो प्रतिशत अधिक है। 2020 तक भारत इसमें 36% की कमी पहले ही हासिल कर चुका है।
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गैर-जीवाश्म बिजली का विस्तार: भारत ने संकल्प लिया है कि 2035 तक उसकी कुल बिजली उत्पादन क्षमता का कम से कम 60% हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों (सौर, पवन, पनबिजली आदि) से आएगा। फरवरी 2026 तक भारत 52% का आंकड़ा पार कर चुका है।
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कार्बन सिंक का निर्माण: वनों और वृक्षों के माध्यम से 3.5 से 4 बिलियन टन के अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जो 2005 के स्तर से काफी अधिक है।
वैश्विक अनिश्चितता और भारत का स्टैंड
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के पुनर्निर्वाचन के बाद वैश्विक जलवायु कूटनीति में हलचल मची हुई है। अमेरिका द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा से हाथ खींचने और ‘क्लाइमेट फाइनेंसिंग’ में कमी के बावजूद, भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह अपनी ‘क्लीन एनर्जी’ की राह से पीछे नहीं हटेगा।
विकसित देशों पर दबाव और ‘क्लाइमेट फाइनेंस’ का मुद्दा
लेख के अनुसार, भारत अपने लक्ष्यों को और भी ऊंचा रख सकता था, लेकिन विकसित देशों द्वारा जलवायु वित्त (Climate Finance) की कमी पर भारत ने अपनी नाराजगी जताई है। बाकू (Baku) में हुई वार्ताओं में विकासशील देशों ने सालाना 1.3 ट्रिलियन डॉलर की मांग की थी, जबकि विकसित देश केवल 300 बिलियन डॉलर देने पर सहमत हुए। भारत का तर्क है कि बिना पर्याप्त और कम लागत वाले वित्त पोषण के, विकासशील देशों के लिए अपने लक्ष्यों को बढ़ाना कठिन है।
आर्थिक लाभ और ऊर्जा सुरक्षा
संयुक्त राष्ट्र (UN) के अधिकारियों का मानना है कि भारत का यह नया जलवायु प्लान न केवल पर्यावरण के लिए अच्छा है, बल्कि यह भारत के आर्थिक लाभ (Economic Advantage) को भी गहरा करेगा। पश्चिमी एशिया में युद्ध और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में बाधाओं के बीच, खुद को नवीकरणीय ऊर्जा की ओर ले जाना भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी अनिवार्य है।
निष्कर्ष
भारत के ये 2035 के लक्ष्य दर्शाते हैं कि देश अंतरराष्ट्रीय दबाव में आकर अपनी नीतियों को प्रभावित नहीं होने देगा। भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपनी क्षमता और वैश्विक वित्तीय सहयोग की उपलब्धता के आधार पर ही अपने लक्ष्यों को आगे बढ़ाएगा। यह एक संतुलित दृष्टिकोण है जो पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच तालमेल बिठाता है।
