केंद्र सरकार डिजिटल कंटेंट पर अपना नियंत्रण और कड़ा करने की तैयारी में है। आईटी नियमों (IT Rules 2021) में हाल ही में किए गए बदलावों के बाद, अब सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट हटाने (Takedown) की समय सीमा को वर्तमान 2-3 घंटे से घटाकर मात्र 1 घंटा करने पर विचार कर रही है।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो भारत दुनिया का सबसे सख्त ऑनलाइन कंटेंट विनियमन कानून वाला देश बन जाएगा।
क्या है नया प्रस्ताव?
सरकारी सूत्रों के अनुसार, पिछले महीने अधिसूचित की गई 2-3 घंटे की समय सीमा को और कम करने पर उच्च स्तरीय चर्चा चल रही है। इसके पीछे मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
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त्वरित कार्रवाई: सरकार का मानना है कि ‘अवैध’ या ‘भ्रामक’ कंटेंट को वायरल होने से रोकने के लिए 1 घंटे का समय पर्याप्त और आवश्यक है।
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अधिकारों का विस्तार: आईटी मंत्रालय के अलावा अब गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को भी सीधे कंटेंट ब्लॉकिंग ऑर्डर जारी करने का अधिकार देने पर विचार किया जा रहा है।
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IT नियमों में संशोधन: सरकार आईटी नियम 2021 में संशोधन कर वीडियो-ऑन-डिमांड प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल न्यूज पोर्टल्स पर “अश्लील” (Obscene) कंटेंट के प्रसार को रोकने के लिए कड़े प्रावधान लाने की तैयारी में है।
टेक कंपनियों और विशेषज्ञों की चिंता
इस संभावित बदलाव ने तकनीकी विशेषज्ञों और सोशल मीडिया दिग्गजों (जैसे Meta और X) के बीच हलचल पैदा कर दी है:
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चुनौतीपूर्ण अनुपालन: मेटा (Meta) के अधिकारियों का कहना है कि इतने कम समय में कंटेंट की समीक्षा करना और उसे हटाना तकनीकी और परिचालन की दृष्टि से बहुत कठिन होगा।
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सेंसरशिप का डर: डिजिटल राइट्स कार्यकर्ताओं का तर्क है कि सरकार इस शक्ति का उपयोग आलोचनात्मक आवाजों, व्यंग्य (Satire) और सरकार विरोधी विचारों को दबाने के लिए कर सकती है।
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परिभाषा का अभाव: “अश्लील” या “आपत्तिजनक” कंटेंट की स्पष्ट परिभाषा न होने से इसका दुरुपयोग होने की संभावना बढ़ जाती है।
अब तक का नियम क्या है?
फरवरी 2026 में, आईटी मंत्रालय ने नियमों में संशोधन किया था जिसके तहत प्लेटफॉर्म्स को 24-36 घंटे के बजाय 2-3 घंटे के भीतर आपत्तिजनक सामग्री हटानी अनिवार्य की गई थी। इसके अलावा, गैर-सहमति वाली अंतरंग तस्वीरों (Non-consensual intimate imagery) को अब भी 24 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य है।
क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि 1 घंटे की समय सीमा से ‘सल्लम-सल्ला’ (Shadow Banning) और ऑटोमेटेड एल्गोरिदम द्वारा कंटेंट को बिना मानवीय समीक्षा के हटाने की प्रवृत्ति बढ़ेगी। इससे सोशल मीडिया पर स्वतंत्र चर्चाओं के लिए जगह कम हो सकती है।
संपादन नोट: वर्तमान में यह प्रस्ताव प्रारंभिक चरण में है, लेकिन सरकार की मंशा स्पष्ट है कि वह डिजिटल स्पेस में ‘क्विक रिस्पॉन्स’ मैकेनिज्म चाहती है। क्या यह सुरक्षा के लिए है या नियंत्रण के लिए, यह बहस का विषय है।
