कभी खूंखार डाकुओं और उनके आतंक के लिए दुनिया भर में मशहूर रही चंबल घाटी की तस्वीर अब पूरी तरह बदल चुकी है। जिस चंबल के नाम से लोग कभी कांपते थे, आज वही चंबल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और दुर्लभ जलीय जीवों (Aquatic Animals) के कारण अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी चमक बिखेर रही है।
इटावा स्थित राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी के अधिकारियों के अनुसार, अब चंबल की पहचान बंदूकों से नहीं, बल्कि यहाँ की लहरों में खेलने वाले दुर्लभ जलचरों से होने लगी है।
तीन राज्यों में फैला ‘कुदरत का खजाना’
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के करीब 400 किलोमीटर के दायरे में फैली चंबल नदी आज हजारों दुर्लभ प्रजातियों का सुरक्षित आशियाना है। यहाँ न केवल घड़ियाल और मगरमच्छों का बसेरा है, बल्कि गंगा डॉल्फिन जैसी विलुप्तप्राय प्रजातियां भी बड़ी संख्या में देखी जा रही हैं।
प्रमुख आकर्षण:
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हजारों घड़ियाल और मगरमच्छ: सेंचुरी में इनकी संख्या रिकॉर्ड स्तर पर है।
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दुर्लभ कछुए: चंबल में कछुओं की कई ऐसी प्रजातियां हैं जो दुनिया में कहीं और नहीं मिलतीं।
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प्रवासी पक्षी: करीब 300 प्रजातियों के प्रवासी और अप्रवासी पक्षी यहाँ की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं।
विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद
इटावा स्थित राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी के वन्य जीव प्रतिपालक कृष्ण चंद्र शेखर बताते हैं कि डाकुओं के खात्मे के बाद चंबल में पर्यटकों की आवाजाही व्यापक पैमाने पर शुरू हो गई है। यहाँ की मिट्टी के अनोखे टीले (Ravines) और शांत नदी का नजारा देश में शायद ही कहीं और देखने को मिले।
सर्दियों के मौसम में यहाँ विदेशी पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। ‘सोसायटी फॉर कंजर्वेशन’ के महासचिव राजीव चौहान के मुताबिक, यहाँ ‘कोमन्टिल, कोटनटिल, स्पॉटविल्डक, पिन्टैल, गैलियार्ड और कांट’ जैसे विदेशी पक्षी मुख्य आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
सरकार और वन विभाग की पहल लाई रंग
परिवर्तन समिति के संयोजक संजय चौहान का कहना है कि विदेशी पर्यटकों की रुचि चंबल की ओर तब बढ़ी जब उत्तर प्रदेश सरकार और वन विभाग ने मिलकर ईको-टूरिज्म को बढ़ावा दिया। दुर्लभ जलचरों के दीदार के लिए बनाए गए विशेष रास्तों और सुरक्षा व्यवस्था ने पर्यटकों का भरोसा जीता है।
चंबल की यह ‘बदली हुई फिजा’ न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रही है।
संपादन नोट: चंबल का यह हृदय परिवर्तन भारत के सफल वन्यजीव संरक्षण और ईको-टूरिज्म का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। ‘News Drift’ ऐसी सकारात्मक खबरों को प्रमुखता से कवर करता रहेगा।
