‘द लैंसेट’ (The Lancet) मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन ने भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लिए साल 2030 तक ‘सतत विकास लक्ष्यों’ (SDG) के तहत मातृ मृत्यु दर (MMR) को प्रति 1 लाख जीवित जन्मों पर 70 से नीचे लाने का लक्ष्य हासिल करना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।
आंकड़ों में सुधार, लेकिन रफ्तार धीमी
अध्ययन ‘ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज’ के मुताबिक, भारत ने पिछले तीन दशकों में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन हाल के वर्षों में यह रफ्तार सुस्त पड़ी है:
-
1990: मातृ मृत्यु का आंकड़ा 1.19 लाख था (MMR 508)।
-
2015: यह घटकर 36,900 रह गया।
-
2023: वर्तमान में यह संख्या 24,700 (MMR 116) पर है।
दुनिया भर में होने वाली कुल मातृ मौतों में भारत का हिस्सा अब भी दसवां भाग (1/10) है, जो चिंता का विषय है।
उत्तर प्रदेश और असम: राष्ट्रीय औसत को प्रभावित करने वाले राज्य
रिपोर्ट में विशेषज्ञों का कहना है कि जहां दक्षिण भारत के कई राज्य 2030 के लक्ष्य को प्राप्त करने की राह पर हैं, वहीं उत्तर प्रदेश और असम जैसे राज्यों के खराब प्रदर्शन के कारण राष्ट्रीय औसत लक्ष्य से दूर होता जा रहा है।
-
सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) के अनुसार, असम में MMR 215 से घटकर 110 और उत्तर प्रदेश में 197 से घटकर 141 पर आया है, जो अभी भी SDG लक्ष्य (70 से नीचे) से काफी अधिक है।
मौत के मुख्य कारण और चुनौतियां
लैंसेट के अध्ययन में पाया गया कि 40% से अधिक मौतें ऐसी समस्याओं के कारण हुईं जिन्हें आसानी से रोका जा सकता था:
-
रक्तस्राव (Haemorrhage): प्रसव के दौरान अत्यधिक खून बहना।
-
हाइपरटेंसिव डिसऑर्डर: गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप।
-
कोविड-19 का असर: 2020-21 के दौरान सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं में आई बाधा ने भी सुधार की गति को धीमा किया है।
विशेषज्ञों की राय: छोटे देशों से तुलना गलत?
इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन साइंसेज (IIPS) के विशेषज्ञों ने अध्ययन की तुलना पद्धति पर सवाल भी उठाए हैं। डॉ. नंदिता सैकिया के अनुसार, भारत जैसे विशाल देश (2.3 करोड़ जन्म सालाना) की तुलना कांगो या नाइजीरिया जैसे छोटे देशों से करना उचित नहीं है। हालांकि, उन्होंने माना कि प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों को मजबूत करना और प्रजनन दर (Fertility Rate) में कमी लाना MMR को कम करने के लिए अनिवार्य है।
निष्कर्ष
भारत को अपना 2030 का लक्ष्य पाने के लिए ‘मिशन मोड’ में काम करने की जरूरत है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं, संस्थागत प्रसव और प्रसव पूर्व जांच (ANC) पर अधिक निवेश और ध्यान केंद्रित करना होगा।
