चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि के पावन अवसर पर आज पूरी रामनगरी अयोध्या त्रेतायुग जैसी आभा से सराबोर हो उठी। आज दोपहर ठीक 12:00 बजे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव पर उनके बाल स्वरूप ‘रामलला’ का भव्य सूर्य तिलक संपन्न हुआ। विज्ञान और अध्यात्म के इस अनूठे संगम को देखने के लिए अयोध्या में करीब 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा।
दोपहर 12 बजे: जब सूर्य की रश्मियों ने किया ‘कुलभूषण’ का अभिषेक
अयोध्या के भव्य राम मंदिर में आज वह क्षण अद्भुत था जब घड़ी की सुइयां दोपहर 12 पर पहुँचीं। ठीक उसी समय, वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किए गए दर्पणों और लेंसों के विशेष ऑप्टिकल सिस्टम के जरिए सूर्य की किरणें सीधे गर्भगृह में रामलला के मस्तक पर पड़ीं।
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समय: दोपहर 12:00 बजे से 12:04 बजे तक (करीब 4 मिनट)।
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दृश्य: सूर्य की नीली और सुनहरी किरणों ने रामलला के ललाट पर 75 मिलीमीटर का दिव्य तिलक बनाया।
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महत्व: भगवान राम ‘सूर्यवंशी’ माने जाते हैं, ऐसे में सूर्य की किरणों द्वारा उनका राजतिलक उनकी वंशावली और दैवीय शक्ति का प्रतीक माना गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने टैबलेट पर किए ‘लाइव’ दर्शन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अलौकिक दृश्य का सीधा प्रसारण देखा। पीएम मोदी ने अपने आवास पर टीवी के माध्यम से इस भव्य नजारे के दर्शन किए।
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भावपूर्ण क्षण: जैसे ही सूर्य की किरणों ने रामलला का मस्तक छुआ, पीएम मोदी भावुक नजर आए। उन्होंने हाथ जोड़कर प्रभु को नमन किया और तालियां बजाकर इस ऐतिहासिक पल का स्वागत किया।
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पीएम का संदेश: प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया (X) पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, “अयोध्या की रामनवमी और रामलला का यह सूर्य तिलक… यह क्षण करोड़ों रामभक्तों के लिए भावुक और अविस्मरणीय है। प्रभु श्री राम का आशीर्वाद देशवासियों पर बना रहे।”
भक्ति और तकनीक का अद्भुत संगम
इस सूर्य तिलक को संभव बनाने के लिए CBRI (सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट), रुड़की के वैज्ञानिकों ने कड़ी मेहनत की है। मंदिर के शिखर पर लगे पीतल के पाइप और दर्पणों के माध्यम से सूर्य की रोशनी को बिना बिजली के सीधे गर्भगृह तक पहुँचाया गया। यह तकनीक सुनिश्चित करती है कि हर साल रामनवमी के दिन ठीक दोपहर 12 बजे यह अलौकिक घटना घटे।
अयोध्या में सुरक्षा और दर्शन की व्यवस्था
राम जन्मोत्सव को देखते हुए अयोध्या में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे:
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दर्शन: श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के पट सुबह 6:00 बजे से ही खुल गए थे, जो रात देर तक खुले रहेंगे।
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एलईडी स्क्रीन्स: भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पूरी अयोध्या नगरी में लगभग 100 बड़ी एलईडी स्क्रीन्स लगाई गईं, ताकि जो लोग मंदिर के अंदर नहीं जा सके, वे बाहर से ही ‘सूर्य तिलक’ का लाइव दर्शन कर सकें।
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56 भोग: जन्मोत्सव के बाद रामलला को 56 प्रकार के व्यंजनों का दिव्य भोग लगाया गया।
निष्कर्ष
22 जनवरी 2024 को हुई प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यह दूसरी रामनवमी है, लेकिन ‘सूर्य तिलक’ की भव्यता और श्रद्धालुओं का उत्साह पहले से कहीं अधिक नजर आया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि नए भारत की वैज्ञानिक प्रगति और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का भी प्रमाण है।
