उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण परिवारों तक स्वच्छ पेयजल पहुँचाने वाली अपनी महत्वाकांक्षी योजना ‘जल जीवन मिशन’ (JJM) के क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा हंटर चलाया है। राज्य सरकार ने कर्तव्य में लापरवाही और काम की खराब गुणवत्ता के आरोप में 12 इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है, जबकि कुल 26 इंजीनियरों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई शुरू की गई है।
क्यों हुई यह कार्रवाई?
अपर मुख्य सचिव (नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति) अनुराग श्रीवास्तव द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह कार्रवाई उन शिकायतों के बाद की गई है जिनमें योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने और नल कनेक्शन देने के कार्यों में भारी अनियमितताएं और देरी पाई गई थी। सरकार ने इसे राज्य जल निगम के इतिहास में कर्मियों के खिलाफ की गई अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई बताया है।
निलंबित किए गए इंजीनियरों की सूची
निलंबित किए गए 12 इंजीनियरों में विभिन्न रैंक के अधिकारी शामिल हैं, जो प्रदेश के अलग-अलग जिलों में तैनात थे:
अविनाश गुप्ता (लखीमपुर खीरी), सौमित्र श्रीवास्तव (जौनपुर), मोहम्मद कासिम हाशमी (गाजीपुर), अमित राजपूत और सीताराम यादव (चंदौली), अकबर हसन (बिजनौर), अनुराग गोयल (औरैया), कुलदीप कुमार सिंह (हाथरस), राजेंद्र कुमार यादव (आजमगढ़) , रूप चंद्र (बरेली) , अविनीश प्रताप सिंह (बाराबंकी) , धर्म प्रकाश माहेश्वरी (कुशीनगर)
जांच और कारण बताओ नोटिस
केवल निलंबन ही नहीं, सरकार ने इस मामले में गहराई से जांच के आदेश भी दिए हैं:
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विभागीय जांच: चार अन्य इंजीनियरों के खिलाफ विस्तृत विभागीय जांच (Departmental Probe) के आदेश दिए गए हैं।
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कारण बताओ नोटिस (Show-cause Notice): तीन इंजीनियरों को प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन में अत्यधिक धीमी गति के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
शिकायत के आधार पर सात इंजीनियरों का तबादला
सहायक अभियंता विपिन कुमार वर्मा को प्रतापगढ़ से चंदौली स्थानांतरित कर दिया गया है। रामपुर में तैनात मो.असजद को रामपुर से चंदौली, प्रदीप कुमार मिश्रा को बाराबंकी से बिजनौर, उदयराज गुप्ता को चंदौली से रामपुर, अमित कुमार को शामली से बाराबंकी, चन्द्र बोध त्यागी को मैनपुरी से आजमगढ और जूनियर इंजिनियर अजय कुमार को कौशांबी से आजमगढ़ स्थानांतरित कर दिया गया है।
सरकार का सख्त रुख
‘हर घर जल’ योजना केंद्र और राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। इस कार्रवाई के माध्यम से सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और जनता को मिलने वाली सुविधाओं में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे तय समयसीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता मानकों के साथ कार्यों को पूरा करें।
