नई दिल्ली: पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण सेल (PPAC) द्वारा जारी हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत में LPG उपभोक्ताओं की संख्या बढ़कर लगभग 34 करोड़ (सटीक आंकड़ा 33.37 करोड़) हो गई है। हालांकि, रिपोर्ट में एक दिलचस्प विरोधाभास सामने आया है—जहाँ एक ओर गैस कनेक्शन की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, वहीं प्रति परिवार औसत मासिक खपत अब भी आधा सिलेंडर के करीब बनी हुई है।
मुख्य सांख्यिकी और उत्तर प्रदेश की स्थिति
आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश देश में LPG उपभोक्ताओं के मामले में अग्रणी राज्य बना हुआ है:
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उत्तर प्रदेश: कुल 4.87 करोड़ उपभोक्ता (भारत का 15%), जिनमें 1.88 करोड़ उज्ज्वला लाभार्थी हैं।
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अन्य प्रमुख राज्य: महाराष्ट्र (3.2 करोड़), पश्चिम बंगाल (2.72 करोड़) और बिहार (2.33 करोड़)।
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PMUY का प्रभाव: कुल कनेक्शनों में से लगभग 10.56 करोड़ कनेक्शन प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत दिए गए हैं।
शहरी बनाम ग्रामीण उपभोग का अंतर
रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि राज्यों की कुल खपत और प्रति परिवार औसत खपत में बड़ा अंतर है:
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ज्यादा खपत वाले राज्य: उत्तर प्रदेश औसतन 377.4 TMT (हजार मीट्रिक टन) प्रति माह के साथ कुल खपत में सबसे ऊपर है।
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प्रति परिवार औसत: औसत मासिक खपत के मामले में उत्तर प्रदेश देश में 22वें स्थान पर है। यहाँ के ग्रामीण परिवारों में औसत खपत मात्र 7.7 किलोग्राम है, जबकि दिल्ली जैसे शहरी क्षेत्रों में यह 11.4 किलोग्राम प्रति माह है।
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कारण: ग्रामीण क्षेत्रों में 80% उज्ज्वला लाभार्थी रहते हैं। आर्थिक कारणों या वैकल्पिक ईंधन (लकड़ी, उपले) की उपलब्धता की वजह से ये परिवार एक सिलेंडर को लंबे समय तक चलाते हैं।
तीन दशकों का सफर
पिछले 30 वर्षों में भारत की LPG खपत में छह गुना वृद्धि देखी गई है।
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1998-99: 446 TMT
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2025-26 (अनुमानित): 2,754 TMT सबसे अधिक वृद्धि (8% से 11% प्रति वर्ष) 2000 और 2010 के दशकों में दर्ज की गई। 2016-17 में उज्ज्वला योजना की शुरुआत के बाद इसमें 10.1% का बड़ा उछाल आया था, जो अब सैचुरेशन (संतृप्ति) स्तर पर पहुंचने के कारण थोड़ा धीमा हुआ है।
निष्कर्ष
डेटा से स्पष्ट है कि ‘पहुंच’ (Access) के मामले में भारत ने शानदार प्रगति की है, लेकिन ‘निरंतर उपयोग’ (Sustained Usage) अब भी आय और क्षेत्रीय भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करता है। अमीर और शहरी राज्यों में गैस का उपयोग अधिक सघन है, जबकि ग्रामीण भारत में अब भी सिलेंडर का उपयोग पारंपरिक ईंधनों के पूरक के रूप में किया जा रहा है।
