आज 10 राज्यों की रिक्त हो रही 37 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान हो रहा है। इस चुनाव में महाराष्ट्र, तमिलनाडु, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों के साथ-साथ ओडिशा और हरियाणा में भी दिलचस्प मुकाबले देखने को मिल रहे हैं।
1. महाराष्ट्र (7 सीटें): समीकरण और चेहरे
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स्थिति: यहाँ राकांपा (शरद पवार) प्रमुख शरद पवार, आरपीआई के रामदास अठावले और शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी जैसे दिग्गज रिटायर हो रहे हैं।
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गणित: 235 विधायकों की ताकत के साथ सत्तारूढ़ महायुति (NDA) 6 सीटें जीतने की ओर है। विपक्षी MVA (50 विधायक) केवल एक सीट सुरक्षित कर सकती है।
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खास बात: महायुति ने अजित पवार के बेटे पार्थ पवार को मैदान में उतारा है, जबकि विपक्ष ने शरद पवार को फिर से नामांकित किया है।
2. तमिलनाडु (6 सीटें): निर्विरोध की संभावना
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सत्तारूढ़ DMK गठबंधन के पास 4 सीटें जीतने लायक पर्याप्त विधायक (159) हैं।
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AIADMK-NDA गठबंधन के पास 75 विधायक हैं, जिससे वे 2 सीटें जीत सकते हैं। सभी 6 सांसदों के निर्विरोध चुने जाने की संभावना है।
3. बिहार (5 सीटें): असली मुकाबला पांचवीं सीट पर
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गणित: NDA (202 विधायक) चार सीटें आसानी से जीत रहा है। पांचवीं सीट के लिए उसे केवल 3 और विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है।
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रणनीति: भाजपा ने दलित नेता शिवेश राम को पांचवीं सीट के लिए उतारा है। विपक्षी महागठबंधन को अपनी सीट बचाने के लिए 6 और विधायकों की जरूरत है। यहाँ AIMIM (5 विधायक) किंगमेकर की भूमिका में हो सकती है।
4. पश्चिम बंगाल (5 सीटें)
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223 विधायकों के साथ TMC 5 में से 4 सीटें जीतने की स्थिति में है।
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भाजपा (64 विधायक) केवल 1 सीट जीत पाएगी। कांग्रेस और वामपंथियों का अब बंगाल से कोई प्रतिनिधित्व नहीं रहेगा।
5. ओडिशा (4 सीटें): कांटे की टक्कर
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भाजपा और BJD के पास वर्तमान में 2-2 सीटें हैं।
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चौथी सीट के लिए मुकाबला दिलचस्प है। BJD ने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर एक ‘सहमति उम्मीदवार’ (डॉ. दत्तेश्वर होता) को उतारा है ताकि भाजपा को रोका जा सके। भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय पर दांव लगाया है।
6. अन्य राज्यों में जीत का कोटा (प्रति सीट न्यूनतम वोट)
विभिन्न राज्यों में एक उम्मीदवार को जीतने के लिए आवश्यक न्यूनतम विधायकों की संख्या इस प्रकार है:
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तेलंगाना: 40 विधायक
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हिमाचल प्रदेश: 35 विधायक
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असम: 32 विधायक
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छत्तीसगढ़ & हरियाणा: 30 विधायक
यह चुनाव आगामी लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय राजनीति के लिए एक लिटमस टेस्ट की तरह है, जहाँ क्षेत्रीय गठबंधन और क्रॉस-वोटिंग की संभावनाएं परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं।
राज्यसभा: कभी न खत्म होने वाला सदन
राज्यसभा का कार्यकाल अनिश्चित होता है, लेकिन इसके सदस्यों (MPs) का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है।
रिटायरमेंट का नियम: हर 2 साल बाद राज्यसभा के एक-तिहाई (1/3) सदस्य रिटायर हो जाते हैं।
निरंतरता: क्योंकि केवल एक-तिहाई सदस्य ही रिटायर होते हैं, बाकी दो-तिहाई सदन में बने रहते हैं। इसीलिए इसे ‘स्थायी सदन’ कहते हैं।
चुनाव प्रक्रिया: अप्रत्यक्ष मतदान
राज्यसभा के चुनाव आम चुनावों (लोकसभा) से अलग होते हैं। इसमें आम जनता वोट नहीं देती, बल्कि आपके द्वारा चुने गए विधायक (MLAs) वोट देते हैं।
मतदान की पद्धति:
इसे ‘आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली’ (Proportional Representation) और ‘एकल संक्रमणीय मत’ (Single Transferable Vote – STV) कहा जाता है।
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खुला मतपत्र: इसमें विधायक को अपना वोट अपनी पार्टी के अधिकृत एजेंट को दिखाना अनिवार्य होता है (क्रॉस-वोटिंग रोकने के लिए)।
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प्राथमिकता (Preference): विधायक बैलेट पेपर पर उम्मीदवारों के नाम के आगे 1, 2, 3 लिखकर अपनी पसंद बताते हैं।
जीत के लिए वोटों का गणित (कोटा)
किसी उम्मीदवार को जीतने के लिए कितने वोटों की जरूरत होगी, इसका एक निश्चित फॉर्मूला है। जैसा कि आपके द्वारा साझा की गई अखबार की रिपोर्ट में भी ‘न्यूनतम विधायक’ (Minimum MLAs required) का जिक्र था।
सीटों का बंटवारा और मनोनयन
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राज्यों का प्रतिनिधित्व: सीटों की संख्या राज्य की जनसंख्या पर निर्भर करती है (जैसे उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 31 सीटें हैं)।
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मनोनीत सदस्य (Nominated Members): राष्ट्रपति कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा के क्षेत्र से 12 सदस्यों को सीधे मनोनीत करते हैं।
| विशेषता | लोकसभा | राज्यसभा |
| कार्यकाल | 5 साल (भंग हो सकती है) | स्थायी (सदस्य का कार्यकाल 6 साल) |
| चुनाव | जनता द्वारा प्रत्यक्ष | विधायकों द्वारा अप्रत्यक्ष |
| न्यूनतम आयु | 25 वर्ष | 30 वर्ष |
| अध्यक्ष | लोकसभा स्पीकर | उपराष्ट्रपति (पदेन सभापति) |
