पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। फारस की खाड़ी क्षेत्र में युद्ध और समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे के कारण तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने लगी है। भारत जैसे देश के लिए यह स्थिति विशेष रूप से संवेदनशील है, क्योंकि उसकी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है।
हाल के घटनाक्रमों के कारण तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) की आपूर्ति पर दबाव बढ़ने लगा है। यह वही ईंधन है जो भारत के करोड़ों घरों में खाना पकाने के लिए उपयोग होता है। पश्चिम एशिया से आने वाले जहाजों की आवाजाही में बाधा और कुछ उत्पादक देशों में उत्पादन धीमा होने के कारण वैश्विक बाजार में आपूर्ति तंग हो गई है।
इसके बावजूद भारत सरकार ने आश्वासन दिया है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि सरकार ने ऐसी व्यवस्था की है जिससे घरेलू उपभोक्ताओं को CNG और PNG की 100% आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके तथा उद्योगों को भी लगभग 70–80% तक गैस मिलती रहे।
भारत में LPG की मांग और आपूर्ति
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक देश है।
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भारत की कुल LPG मांग लगभग 30–31 मिलियन टन प्रति वर्ष है।
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घरेलू उत्पादन लगभग 12–13 मिलियन टन है।
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यानी लगभग 60% LPG भारत आयात करता है।
भारत में LPG का उपयोग मुख्यतः इन क्षेत्रों में होता है:
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घरेलू रसोई गैस (सबसे बड़ा हिस्सा)
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होटल और रेस्तरां
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छोटे उद्योग
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ऑटो LPG
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के बाद देश में LPG उपभोक्ताओं की संख्या 30 करोड़ से अधिक हो गई है, जिससे इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
भारत में LPG उत्पादन करने वाली प्रमुख रिफाइनरियाँ
भारत में LPG मुख्यतः क्रूड ऑयल रिफाइनिंग और प्राकृतिक गैस प्रोसेसिंग से बनती है। देश की प्रमुख रिफाइनरियाँ जो LPG का उत्पादन करती हैं:
सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियाँ
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जामनगर (गुजरात) – Reliance Industries
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वडिनार (गुजरात) – Nayara Energy
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पानिपत रिफाइनरी (हरियाणा) – Indian Oil
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मथुरा रिफाइनरी (उत्तर प्रदेश) – Indian Oil
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कोयली/गुजरात रिफाइनरी – Indian Oil
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बरौनी रिफाइनरी (बिहार) – Indian Oil
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हल्दिया रिफाइनरी (पश्चिम बंगाल) – Indian Oil
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नुमालीगढ़ रिफाइनरी (असम)
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डिगबोई रिफाइनरी (असम)
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मंगलुरु रिफाइनरी (कर्नाटक)
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कोच्चि रिफाइनरी (केरल)
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विशाखापट्टनम रिफाइनरी (आंध्र प्रदेश)
इन रिफाइनरियों के साथ गैस प्रोसेसिंग प्लांट और पेट्रोकेमिकल इकाइयाँ भी LPG उत्पादन में योगदान देती हैं।
भारत कितना तेल और गैस आयात करता है
भारत की ऊर्जा निर्भरता का मुख्य कारण घरेलू उत्पादन का सीमित होना है।
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भारत अपनी लगभग 88% कच्चे तेल की जरूरत आयात से पूरी करता है।
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प्राकृतिक गैस की लगभग 50% जरूरत आयातित LNG से पूरी होती है।
भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता देश:
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रूस
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सऊदी अरब
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इराक
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संयुक्त अरब अमीरात
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अमेरिका
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कुवैत
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नाइजीरिया
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ब्राजील
LPG के मामले में भारत का लगभग 90% आयात खाड़ी देशों (सऊदी अरब, कतर, UAE) से आता है।
अगर सप्लाई प्रभावित होती है तो भारत के पास क्या विकल्प हैं
पश्चिम एशिया संकट के दौरान भारत कई वैकल्पिक उपाय अपना सकता है:
1. सप्लाई का विविधीकरण
भारत पहले ही 40 से अधिक देशों से तेल खरीदता है।
संभावित विकल्प:
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अमेरिका
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नॉर्वे
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ऑस्ट्रेलिया
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ब्राजील
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अफ्रीकी देश
2. अमेरिका से LPG आयात
सरकारी तेल कंपनियों ने अमेरिका से लगभग 2.2 मिलियन टन LPG आयात का समझौता किया है।
3. रूस के साथ नए समुद्री मार्ग
भारत रूस के सुदूर पूर्व से पूर्वी तट तक तेल और गैस आपूर्ति मार्ग विकसित करने की कोशिश कर रहा है।
4. घरेलू उत्पादन बढ़ाना
सरकार “Mission Anveshan” के तहत नए ऑफशोर गैस और तेल क्षेत्रों की खोज कर रही है।
भारत के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व
ऊर्जा संकट से निपटने के लिए भारत ने रणनीतिक तेल भंडार बनाए हैं।
प्रमुख स्थान
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विशाखापट्टनम
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मंगलुरु
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पाडुर (कर्नाटक)
इन भंडारों में लगभग 9.5 दिन की राष्ट्रीय खपत के बराबर कच्चा तेल रखा जा सकता है।
इसके अलावा तेल कंपनियों के पास लगभग 65 दिन का वाणिज्यिक भंडार भी रहता है।
यानी कुल मिलाकर भारत के पास लगभग 74 दिन की तेल आपूर्ति का बफर मौजूद है।
LPG के लिए भी भूमिगत भंडारण क्षमता बढ़ाई जा रही है। मंगलुरु में नई स्टोरेज कैवर्न बनने के बाद LPG भंडारण क्षमता लगभग 1.4 लाख टन तक बढ़ गई है।
अगर युद्ध लंबा चलता है तो महंगाई कितनी बढ़ सकती है
तेल की कीमतें भारत की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालती हैं।
विश्लेषकों के अनुसार:
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कच्चे तेल की कीमत में हर $10 की वृद्धि से
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भारत के चालू खाते का घाटा लगभग $9 अरब बढ़ सकता है।
अगर तेल कीमतें $120 प्रति बैरल तक पहुंचती हैं तो:
संभावित असर:
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पेट्रोल और डीजल महंगे
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LPG सिलेंडर महंगा
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खाद्य महंगाई बढ़ना
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परिवहन लागत बढ़ना
हालांकि सरकार अक्सर टैक्स कम करके या सब्सिडी देकर कीमतों के झटके को कम करने की कोशिश करती है।
भारत सरकार ने LPG संकट पर क्या कदम उठाए
पेट्रोलियम मंत्रालय ने कई आपात कदम उठाए हैं:
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घरेलू LPG आपूर्ति को प्राथमिकता
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रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश
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सिलेंडर बुकिंग के बीच 25 दिन का अंतराल लागू
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अस्पताल और शिक्षा संस्थानों को प्राथमिक आपूर्ति
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गैर-जरूरी औद्योगिक उपयोग की समीक्षा
सरकार का कहना है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए LPG की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।
निष्कर्ष
पश्चिम एशिया संकट ने एक बार फिर भारत की ऊर्जा निर्भरता की वास्तविकता को उजागर कर दिया है। भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को स्थिर ऊर्जा आपूर्ति की आवश्यकता है, जबकि घरेलू उत्पादन अभी मांग से काफी कम है।
हालांकि भारत ने आयात स्रोतों का विविधीकरण, रणनीतिक भंडार और नए आपूर्ति समझौते जैसे कदम उठाए हैं, फिर भी खाड़ी क्षेत्र में किसी बड़े युद्ध का प्रभाव पूरी तरह टाला नहीं जा सकता।
इस स्थिति में ऊर्जा सुरक्षा केवल आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक चुनौती भी बन जाती है। आने वाले वर्षों में भारत के लिए सबसे बड़ा लक्ष्य यही होगा कि वह आयात पर निर्भरता कम करे और घरेलू ऊर्जा उत्पादन को मजबूत बनाए।
