उत्तर प्रदेश की आधी आबादी अब केवल घर की चौखट तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण सुशासन की मजबूत धुरी बनकर उभर रही है। राजधानी दिल्ली में पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित “सशक्त पंचायत नेत्री अभियान” के एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में यूपी की महिला प्रधानों ने अपनी मेधा और नेतृत्व का लोहा मनवाया।
उत्तर प्रदेश की 135 महिला प्रधानों और 10 वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मंच पर प्रदेश की सशक्त पंचायत व्यवस्था का प्रतिनिधित्व किया, जहाँ उनके उत्कृष्ट कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा और सम्मानित किया गया।
सम्मान की श्रेणियों में यूपी का दबदबा
सम्मेलन के दौरान विभिन्न श्रेणियों में उत्तर प्रदेश की महिला नेतृत्व को सम्मानित किया गया, जो उनके द्वारा ग्रामीण स्तर पर लाए गए बदलावों का प्रमाण है:
1. बीकन पंचायत (WER) श्रेणी
इस श्रेणी में उन महिला प्रधानों को चुना गया जिन्होंने अपने गांव को विकास की नई राह दिखाई:
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श्रीमती प्रियंका तिवारी (राजपुर, हाथरस)
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श्रीमती नीलम देवी (भरतपुर, अलीगढ़)
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श्रीमती मनु यादव (फौलादपुर, अमरोहा)
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सुश्री पूनम सिंह (रोरी, गाजियाबाद)
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सुश्री नीलमणि राजे बुंदेला (छिपाई, ललितपुर)
2. चैंपियन ऑफ चेंज
बदलाव की बयार लाने के लिए इन नेत्रियों को सम्मान मिला:
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सुश्री सुलेखा कुशवाहा (तिलसड़ा, कानपुर नगर)
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श्रीमती मधु चौधरी (मखदुमपुर, अमरोहा)
3. महिला हितैषी ग्राम पंचायत (WFGP)
महिलाओं के कल्याण और उनके अधिकारों के लिए काम करने वाली प्रधानों को इस श्रेणी में जगह मिली:
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श्रीमती रूपाली लोधी (सींगनखेड़ा, रामपुर)
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श्रीमती हेमलता पटेल (सुजानपुर, फतेहपुर)
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श्रीमती कृष्णा गंगवार (अल्हैया, बरेली)
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डॉ. अनामिका सिंह (पाला, कन्नौज)
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श्रीमती माधुरी सिंह (थावर, लखनऊ)
“यूपी की महिला प्रधानें देश के लिए प्रेरणा” – ओम प्रकाश राजभर
प्रदेश की इस बड़ी उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए माननीय पंचायती राज मंत्री श्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा:
“पंचायतों में महिला जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी ग्रामीण विकास को नई गति दे रही है। हमारी महिला प्रधानें न केवल गांवों के विकास की मिसाल पेश कर रही हैं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा बन रही हैं।”
वहीं, पंचायती राज निदेशक श्री अमित कुमार सिंह ने इस आयोजन को अनुभव साझा करने का एक बड़ा मंच बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलनों से पंचायत स्तर पर सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में मदद मिलती है।
सुशासन की नई परिभाषा
यह उपलब्धि केवल सम्मान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस सामाजिक परिवर्तन की ओर इशारा करती है जहाँ ‘प्रधान पति’ की पुरानी अवधारणा को पीछे छोड़ते हुए महिलाएं खुद निर्णय ले रही हैं। उत्तर प्रदेश की इन नेत्रियों ने सिद्ध कर दिया है कि यदि नेतृत्व सशक्त हो, तो ग्रामीण विकास की ऊंचाइयों को छूना नामुमकिन नहीं है।
