पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में समुद्री यातायात बाधित होने के कारण दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ रहा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है, क्योंकि देश की बड़ी मात्रा में रसोई गैस (LPG) खाड़ी देशों से आती है। इस स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने आपात कदम उठाते हुए घरेलू एलपीजी उत्पादन में लगभग 25% की वृद्धि कर दी है और नागरिकों से घबराकर सिलेंडर बुकिंग न करने की अपील की है।
सरकार का कहना है कि घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल गैस की आपूर्ति सामान्य है और अधिकांश शहरों में सिलेंडर की डिलीवरी सामान्य समय—लगभग ढाई दिन—में की जा रही है।
संकट की जड़: वेस्ट एशिया युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य
भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर मौजूदा संकट का सीधा संबंध पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष से है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल और गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है। हालिया संघर्ष के कारण इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अस्थिरता पैदा हो गई है।
भारत के लिए यह मार्ग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 60% आयात करता है, और इनमें से लगभग 90% आयात इसी जलडमरूमध्य से होकर आते हैं।
इस कारण वैश्विक आपूर्ति में थोड़ी सी भी बाधा भारत जैसे बड़े आयातक देश पर तुरंत असर डाल सकती है।
सरकार ने उठाए आपात कदम
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, मौजूदा स्थिति को देखते हुए कई आपात उपाय लागू किए गए हैं।
1. घरेलू उत्पादन में 25% वृद्धि
रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया है कि वे अधिकतम क्षमता पर काम करें और पेट्रोकेमिकल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली गैस को भी एलपीजी उत्पादन की ओर मोड़ें। इससे घरेलू उत्पादन में लगभग 25% की बढ़ोतरी हुई है।
2. आवश्यक वस्तु अधिनियम का इस्तेमाल
सरकार ने Essential Commodities Act के तहत एलपीजी को प्राथमिकता देते हुए घरेलू उपभोक्ताओं को आपूर्ति सुनिश्चित करने का फैसला किया है। इसके तहत औद्योगिक और व्यावसायिक उपयोग के मुकाबले घरेलू गैस को प्राथमिकता दी जा रही है।
3. बुकिंग अंतराल बढ़ाया गया
घबराकर सिलेंडर जमा करने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए घरेलू एलपीजी सिलेंडर की अगली बुकिंग के बीच का न्यूनतम अंतर 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है।
4. जमाखोरी और कालाबाजारी पर निगरानी
कई राज्यों में प्रशासन ने गैस एजेंसियों और गोदामों पर छापे मारकर जमाखोरी और अवैध उपयोग की जांच शुरू की है।
घरेलू उपभोक्ताओं को राहत, लेकिन व्यवसाय प्रभावित
भारत में एलपीजी का इस्तेमाल करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं की संख्या 33 करोड़ से अधिक है, इसलिए सरकार की पहली प्राथमिकता घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
हालांकि इस नीति का असर व्यावसायिक क्षेत्रों पर पड़ने लगा है।
कई शहरों में होटल, ढाबे, कैटरिंग सेवाएं और छोटे रेस्तरां व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की कमी से जूझ रहे हैं। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों में होटल और कैटरिंग उद्योग ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो कई छोटे प्रतिष्ठानों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है।
कुछ व्यवसाय अब वैकल्पिक ईंधन—जैसे कोयला, लकड़ी या बिजली—का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं।
क्यों बढ़ रही है एलपीजी को लेकर चिंता
एलपीजी भारत में सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाला रसोई ईंधन है।
उज्ज्वला योजना और शहरीकरण के कारण पिछले दशक में एलपीजी उपभोक्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है।
ऐसे में यदि आयात प्रभावित होता है तो पूरे देश में आपूर्ति पर दबाव पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान संकट ने भारत की ऊर्जा निर्भरता को भी उजागर किया है।
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भारत अपनी एलपीजी जरूरत का लगभग 60% आयात करता है
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इनमें से अधिकांश आयात खाड़ी देशों से आते हैं
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वैश्विक युद्ध या समुद्री मार्ग अवरुद्ध होने पर आपूर्ति तुरंत प्रभावित होती है
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर
पश्चिम एशिया के संघर्ष ने केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरे एशिया के ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है।
विश्लेषकों के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा आने के कारण वैश्विक तेल कीमतें तेजी से बढ़ीं और कई देशों को अपने रणनीतिक तेल भंडार खोलने पड़े
एशिया के कई देशों ने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए अलग-अलग कदम उठाए हैं, जैसे—
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रणनीतिक तेल भंडार जारी करना
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ईंधन सब्सिडी देना
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ऊर्जा बचत के लिए नीतियां लागू करना
आगे की रणनीति: आयात के नए स्रोत
भारत सरकार ने एलपीजी और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति सुरक्षित रखने के लिए वैकल्पिक स्रोतों और मार्गों की भी तलाश शुरू कर दी है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार भारत अब—
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ऑस्ट्रेलिया
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अमेरिका
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ओमान
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यूएई
जैसे देशों से गैस आयात बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है, ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो सके।
इसके अलावा देश में नए एलपीजी भंडारण टर्मिनल और बॉटलिंग प्लांट विकसित करने की योजनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।
उपभोक्ताओं के लिए सरकार की सलाह
पेट्रोलियम मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराकर गैस सिलेंडर की बुकिंग न करें।
सरकार का कहना है कि—
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घरेलू गैस की आपूर्ति सामान्य है
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वितरण प्रणाली काम कर रही है
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आवश्यक होने पर अतिरिक्त आपूर्ति भी उपलब्ध कराई जाएगी
यदि लोग घबराकर अधिक बुकिंग करते हैं तो इससे कृत्रिम कमी पैदा हो सकती है।
निष्कर्ष
वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की संवेदनशीलता को एक बार फिर उजागर कर दिया है। भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए यह स्थिति ऊर्जा सुरक्षा की नई चुनौती बन सकती है।
हालांकि सरकार द्वारा घरेलू उत्पादन बढ़ाने, आपूर्ति को प्राथमिकता देने और जमाखोरी रोकने जैसे कदमों से फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।
फिर भी यह संकट इस बात की याद दिलाता है कि भारत को भविष्य में ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को तेजी से विकसित करने की दिशा में और तेज कदम उठाने होंगे।
