प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। केंद्र सरकार ने केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। यह कदम केरल विधानसभा द्वारा भेजे गए उस प्रस्ताव के बाद उठाया गया है, जिसमें राज्य का नाम उसकी मूल भाषा ‘मलयालम’ के अनुरूप करने की मांग की गई थी。
नाम परिवर्तन की संवैधानिक प्रक्रिया
इस बदलाव को अमलीजामा पहनाने के लिए संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा:
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अनुच्छेद 3 का प्रयोग: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत संसद को किसी भी राज्य का नाम बदलने का अधिकार है。
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राष्ट्रपति की भूमिका: नाम बदलने वाले विधेयक को राष्ट्रपति की अनुशंसा के बाद संसद में पेश किया जाएगा और फिर विधानसभा की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा。
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अंतिम मुहर: प्रक्रिया पूरी होने के बाद केंद्र सरकार इस पर अंतिम मुहर लगाएगी。
‘केरलम’ ही क्यों?
केरल विधानसभा के प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया है कि मलयालम भाषा में राज्य का नाम ‘केरलम’ है, जबकि संविधान की पहली अनुसूची में यह ‘केरल’ दर्ज है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर कहा कि यह निर्णय “राज्य की इच्छा और हमारी गौरवशाली संस्कृति से जुड़ाव को मजबूत करने के प्रयासों के अनुरूप है”。
मंत्रिमंडल के अन्य महत्वपूर्ण फैसले
नाम परिवर्तन के अलावा, कैबिनेट बैठक में बुनियादी ढांचे और कृषि क्षेत्र के लिए भी कई बड़े ऐलान किए गए:
