उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। यहाँ की एक विशेष POCSO (पॉक्सो) अदालत ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश बटुकों (विद्यार्थियों) के साथ कथित यौन शोषण के आरोपों की जांच के लिए दिया गया है।
कोर्ट का आदेश और धाराएं
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) विनोद कुमार चौरसिया की अदालत ने शनिवार को झुंसी थाना प्रभारी को निर्देश दिया कि वे प्राप्त तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर कानून के मुताबिक जांच शुरू करें।
याचिकाकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज एवं अन्य द्वारा दी गई अर्जी में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ पॉक्सो अधिनियम की धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी। कोर्ट ने पिछले सप्ताह गवाहों के बयान दर्ज करने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
जिन प्रमुख धाराओं के तहत जांच का आदेश दिया गया है, उनमें शामिल हैं:
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BNS की धाराएं: 69, 74, 75, 76, 79 और 109
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पॉक्सो अधिनियम: धारा 3/5/9 और 17
शंकराचार्य का पक्ष: “सत्य की जीत होगी”
इस अदालती आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे एक गहरी साजिश का हिस्सा बताया है। उन्होंने वाराणसी में मीडिया से बात करते हुए कहा:
“मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और मैं अदालत के आदेश का सम्मान करता हूँ। मामला दर्ज होने से ही दूध का दूध और पानी का पानी हो सकेगा। यह उन लोगों को बेनकाब करने का मौका है जिन्होंने झूठे आरोप लगाए हैं।”
स्वामी जी ने आगे आरोप लगाया कि वे लंबे समय से ‘गौ माता’ के संरक्षण और सनातन धर्म के लिए आवाज उठा रहे हैं, जिसे दबाने के लिए यह प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाने वाले व्यक्ति को ‘अपराधी’ बताते हुए कहा कि उसका इतिहास शामली जिले के कांधला पुलिस थाने के रिकॉर्ड में दर्ज है।
क्या है पूरा विवाद?
यह मामला उस समय और गरमा गया जब प्रयागराज में चल रहे माघ मेला 2026 के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का मेला प्रशासन से टकराव हुआ। उन्होंने प्रशासन पर मौनी अमावस्या का स्नान रोकने का आरोप लगाया था। अब यौन शोषण जैसे गंभीर आरोपों ने इस विवाद को एक नया और संवेदनशील मोड़ दे दिया है।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उनके पास वाराणसी स्थित विद्या मठ के पांचवें तल पर होने वाली अनैतिक गतिविधियों के पुख्ता सबूत हैं, जिन्हें वे अदालत और पुलिस के समक्ष पेश करेंगे।
