देश में बढ़ते साइबर क्राइम और ऑनलाइन ठगी के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आम जनता के लिए एक सुरक्षा कवच तैयार कर रहा है। अब बैंक फ्रॉड के छोटे मामलों में ग्राहकों को 25,000 रुपये तक का मुआवजा मिल सकेगा।
RBI गवर्नर का बड़ा ऐलान
4 से 6 फरवरी तक चली मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक के बाद, RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को इस नई पहल की घोषणा की। उन्होंने बताया कि केंद्रीय बैंक छोटे मूल्य के धोखाधड़ी वाले लेनदेन (Small-value fraudulent transactions) के लिए एक नया रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार कर रहा है। इसका सीधा मकसद उन मासूम और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को राहत देना है, जो साइबर ठगों के जाल में फंसकर अपनी मेहनत की कमाई गंवा देते हैं।
क्या हैं नियम:
- ग्राहक को जीवन में सिर्फ एक बार यह क्षतिपूर्ति मिलेगी।
- धोखाधड़ी में गलत नीयत नहीं होनी चाहिए।
- फ्रॉड अमाउंट का 15% हिस्सा ग्राहक को खुद उठाना होगा, चाहे रकम 25,000 रुपए से कम ही क्यों न हो।
- बड़े फ्रॉड केस में भी मुआवजा अधिकतम 25,000 रुपए तक ही सीमित रहेगा।
क्यों पड़ी इस नियम की जरूरत?
- आजकल साइबर अपराधी ठगी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। जैसे:
- मोबाइल पर फर्जी OTP भेजकर।
- डिजिटल शादी कार्ड या इनविटेशन के बहाने।
- नकली बैंक या इंश्योरेंस एजेंट बनकर।
- पेंशन रोकने का डर दिखाकर।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इन मामलों में सबसे ज्यादा शिकार गरीब और कम पढ़े-लिखे लोग होते हैं। RBI का यह कदम इन्हीं ‘भोले-भाले’ ग्राहकों को वित्तीय सुरक्षा देने की एक कोशिश है।
डिजिटल फ्रॉड से कैसे बचें?
- किसी भी अनजान या संदिग्ध व्यक्ति के साथ ईमेल, मैसेज और कॉल पर OPT, पासवर्ड जैसी सेंसेटिव इंफोर्मेशन शेयर न करें।
- किसी ऑफर के लालच में आकर संदिग्ध लगने वाली वेबसाइट और ऐप्स पर अपनी बैंकिंग डिटेल्स न दें।
- अपने एटीएम और बैंकिंग ऐप्स के पासवर्ड नियमित तौर पर बदलते रहें।
- किसी अनजान व्यक्ति से मैसेज या ईमेल के जरिए मिली अटैचमेंट पर क्लिक न करें।
