| “जब उत्तर प्रदेश की नारी सशक्त होगी, तो प्रदेश स्वतः समर्थ हो जाएगा” — सरकारी दृष्टिकोण, 2017–2026 |
सशक्त नारी, समर्थ प्रदेश: उत्तर प्रदेश — देश की सबसे बड़ी जनसंख्या वाला राज्य, जहाँ महिलाओं की संख्या 11 करोड़ से अधिक है। वर्ष 2017 से लेकर अप्रैल 2026 तक के नौ वर्षों में इस राज्य ने महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक यात्रा तय की है। शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक स्वावलंबन, सुरक्षा और राजनीतिक भागीदारी — हर मोर्चे पर प्रदेश ने नई उपलब्धियाँ हासिल की हैं। किंतु इस चमकती तस्वीर के पीछे कुछ ऐसी चुनौतियाँ भी हैं जिन्हें अभी जीतना बाकी है।
नवनिर्माण के 9 वर्ष: एक समग्र दृष्टि
वर्ष 2017 में जब उत्तर प्रदेश में नई सरकार आई, तो महिला सशक्तीकरण को सरकारी नीति के केंद्र में रखा गया। ‘काम दमदार — जनहितकारी सरकार’ की थीम पर तैयार हुई इस रिपोर्टकार्ड में कुछ आँकड़े हैं जो प्रदेश की बदलती तस्वीर को बयान करते हैं।
| प्रमुख आँकड़े — महिला सशक्तीकरण (2017–2026) | |
| लखपति दीदी लक्ष्य (2024-25) | 35 लाख से अधिक महिलाओं का चिन्हांकन |
| लखपति श्रेणी में | 18.55 लाख से अधिक महिलाएँ |
| PM मातृ वंदना योजना | 60 लाख माताएँ लाभान्वित |
| BC सखी योजना — वित्तीय लेन-देन | ₹42,711 करोड़ से अधिक |
| BC सखी — लाभांश अर्जित | ₹116 करोड़ |
| मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना | 26.81 लाख बेटियाँ लाभान्वित |
| PM स्वनिधि — महिला लाभार्थी | 2 लाख से अधिक |
| UP-112 रिस्पांस टाइम | 1 घंटे से घटकर 6 मिनट 41 सेकंड (2025) |
| UP पुलिस में महिलाएँ | 44,000+ (20% आरक्षण) |
| महिला SHG से जुड़ी महिलाएँ | 1 करोड़ से अधिक |
आर्थिक सशक्तीकरण: स्वावलंबन की नई राह
लखपति महिला योजना
उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘लखपति महिला योजना’ के अंतर्गत राज्य में महिलाओं को प्रतिवर्ष ₹1 लाख से अधिक आय अर्जित करने में सक्षम बनाने का लक्ष्य रखा है। आँकड़ों के अनुसार, 35 लाख से अधिक दीदियों का चिन्हांकन हो चुका है और 18.55 लाख से अधिक महिलाएँ लखपति की श्रेणी में आ गई हैं। कृषि आजीविका संवर्धन गतिविधियों में 64.34 लाख महिला किसान परिवार अंगीकृत हुए हैं।
BC सखी और स्वयं सहायता समूह
BC सखी योजना (22 मई 2020 को प्रारंभ) के अंतर्गत 39,885 BC सखियों ने ग्रामीण महिलाओं को बैंकिंग से जोड़ा। इन्होंने ₹42,711 करोड़ से अधिक का वित्तीय लेन-देन करते हुए ₹116 करोड़ का लाभांश खुद अर्जित किया। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) के अंतर्गत 9.43 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों ने 64,761 ग्राम संगठनों और 3,296 संकुल स्तरीय संघों का गठन करते हुए 1.06 करोड़ से अधिक महिलाओं को जोड़ा है।
महिला स्वयं सहायता समूहों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत 2,682 उचित मूल्य की दुकानों का आवंटन किया गया है और 60,000 समूहों की महिलाओं के माध्यम से ड्राई राशन का वितरण किया जा रहा है।
PM स्वनिधि और उद्यमिता
प्रधानमंत्री SVANidhi योजना के अंतर्गत 2 लाख से अधिक महिलाएँ लाभान्वित हुई हैं। ‘महिला समर्थ्य योजना’ के तहत प्रत्येक SHG को ₹25,000 का बीज अनुदान, 2% ब्याज सब्वेंशन और कॉमन फैसिलिटी सेंटर तक पहुँच प्रदान की जा रही है। मध्यावधि 2025 तक इस योजना ने 4,500 SHG में 1.2 लाख महिलाओं की आय में औसतन 35% की वृद्धि की है।
शिक्षा और स्वास्थ्य: नींव और भविष्य
मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना
2019 में शुरू की गई इस योजना के अंतर्गत गरीब परिवारों की बेटियों को जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक ₹25,000 की सहायता 6 चरणों में दी जाती है। अप्रैल 2026 तक 26.81 लाख बेटियाँ इस योजना से लाभान्वित हो चुकी हैं।
स्वास्थ्य सेवाएँ और मातृत्व सहायता
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के आँकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में संस्थागत प्रसव दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रदेश में SAM (Severely Acute Malnourished) बच्चों की पहचान और प्रबंधन में AMBCs, GMD और AWW तंत्र के माध्यम से 98% efficiency प्राप्त की गई है। 2024-25 तक 1,28,811 से 1,90,065 आंगनवाड़ी केंद्रों को अपग्रेड प्री-स्कूलों में बदलने का कार्य प्रगति पर है।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत उत्तर प्रदेश में 60 लाख माताएँ लाभान्वित हो चुकी हैं। NFHS-4 और NFHS-5 के बीच तुलना करें तो 0 से 5 वर्ष के बच्चों में स्टंटिंग दर 7.5% कम हुई है, जबकि 0 से 5 वर्ष आयु के बच्चों में मृत्यु दर में 6.6% की कमी आई है।
सुरक्षा और न्याय: अभय का आश्वासन
सुरक्षा के मोर्चे पर उत्तर प्रदेश ने 2017 से 2026 के बीच कई ऐतिहासिक बदलाव किए हैं।
| महिला सुरक्षा — प्रमुख सुधार (2017–2026) | |
| UP-112 रिस्पांस टाइम | 65 मिनट से घटकर 6 मिनट 41 सेकंड (2025) |
| बलात्कार के मामलों में कमी | 33.92% की गिरावट |
| अपहरण के मामलों में कमी | 17.03% की गिरावट |
| घरेलू हिंसा में कमी | 9.54% की गिरावट |
| UP पुलिस में महिलाएँ | 44,000+ (20% पद आरक्षित) |
| मिशन शक्ति 5.0 (सितम्बर 2025) | नए दिशा-निर्देश, सिंगल-विंडो शिकायत प्रणाली |
| Operation Garuda | साइबर क्राइम के विरुद्ध विशेष अभियान |
| Operation Majnu | सार्वजनिक स्थलों पर उत्पीड़न के खिलाफ |
Mission Shakti: पाँच चरणों की ताकत
17 अक्टूबर 2020 को बलरामपुर में शुरू हुआ मिशन शक्ति अभियान अब 5.0 संस्करण में है। सितंबर 2025 में शारदीय नवरात्रि के अवसर पर मिशन शक्ति 5.0 के नए दिशा-निर्देश जारी किए गए जिसमें एकल-खिड़की शिकायत प्रणाली, समुदाय संवेदीकरण और साइबर अपराध निवारण को प्राथमिकता दी गई है। हर पुलिस स्थानक पर Mission Shakti केंद्र की स्थापना ने महिलाओं को न्याय तक त्वरित पहुँच दिलाई है।
तीन नई महिला PAC बटालियन का गठन और हर जिले में Anti-Romeo स्क्वाड की तैनाती — ये दो निर्णय यूपी को देश में महिला सुरक्षा के मामले में अग्रणी राज्यों में रखते हैं। 181 महिला हेल्पलाइन अब 24×7 कार्यरत है और 2020-21 से 112 से एकीकृत है।

सामाजिक योजनाएँ: जीवन-चक्र दृष्टिकोण
बाल सेवा और विधवा पेंशन
मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड एवं सामान्य) के तहत 1 लाख 5 हजार बच्चे लाभान्वित हुए हैं। मिशन वात्सल्य योजना के अंतर्गत 1 लाख से अधिक बच्चों को उनके अभिभावकों से मिलाया गया। विधवा/निराश्रित महिला पेंशन योजना में 2016-17 में 17.31 लाख लाभार्थियों से बढ़कर अब 28.62 लाख महिलाएँ ₹1,000 प्रतिमाह पेंशन पा रही हैं।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना
अक्टूबर 2017 में शुरू इस योजना में 2025 में बड़ा सुधार किया गया — प्रति जोड़े सहायता ₹51,000 से बढ़ाकर ₹1,00,000 कर दी गई और पात्रता की वार्षिक आय सीमा ₹2 लाख से बढ़ाकर ₹3 लाख की गई। अब तक 5.20 लाख बेटियों का विवाह इस योजना के तहत हुआ है।
मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना:
प्रदेश में समान लिंगानुपात स्थापित करने, कन्या भ्रूण हत्या को रोकने व जन्म के प्रति जनमानस में सकारात्मक सोच विकसित करने, बालिकाओं के स्वास्थ्य एवं शिक्षा में वृद्धि के साथ उचित उम्र में विवाह तथा बालिकाओं के प्रति सम्मान में बढ़ोत्तरी।

रानी लक्ष्मीबाई महिला और बाल सम्मान कोष:
जघन्य हिंसा की शिकार महिलाओं/बालिकाओं को तत्काल आर्थिक एवं चिकित्सीय राहत, उनको एवं अवयस्क बच्चों के भरण – पोषण हेतु रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष की स्थापना की गयी है। योजना के तहत 2017-18 में लाभार्थियों की संख्या 1606 थी, जो वर्ष 2024-25 में 76.90 % वृद्धि के साथ 2841 हो गयी है।
WEE Index: डेटा-आधारित शासन की दिशा में
2025 में उत्तर प्रदेश की योजना विभाग ने Udaiti Foundation के सहयोग से महिला आर्थिक सशक्तीकरण (WEE) सूचकांक तैयार किया। यह सूचकांक 75 जिलों में महिलाओं की आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति को ट्रैक करता है। मुख्यमंत्री कंट्रोल रूम में इसकी रियल-टाइम मॉनिटरिंग प्रदेश में लैंगिक नीति निर्माण को नई दिशा दे रही है।
यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अभी भी उत्तर प्रदेश में केवल 46% महिलाएँ मोबाइल फोन का उपयोग करती हैं और इंटरनेट साक्षरता राष्ट्रीय औसत से कम है। ऐसे में लैंगिक डेटा का व्यवस्थित संग्रह नीतिगत खामियों को दूर करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
| “प्रदेश 2027 तक $1 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य लेकर चल रहा है — और यह लक्ष्य महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना संभव नहीं है।” |
चुनौतियाँ: जिन्हें अभी जीतना बाकी है
उपलब्धियों की लंबी सूची के बावजूद, उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तीकरण की राह में कई गंभीर चुनौतियाँ बनी हुई हैं —
| चुनौती का क्षेत्र | विवरण |
| डिजिटल असमानता | केवल 46% महिलाएँ मोबाइल उपयोगकर्ता; इंटरनेट साक्षरता राष्ट्रीय औसत से नीचे। डिजिटल योजनाओं का लाभ बड़े वर्ग तक नहीं पहुँचता। |
| श्रम शक्ति भागीदारी | NFHS-5 के अनुसार UP में महिला श्रम शक्ति भागीदारी दर राष्ट्रीय औसत से कम। कृषि के बाहर फॉर्मल रोजगार में महिलाओं की हिस्सेदारी बेहद कम। |
| ग्रामीण-शहरी विभाजन | योजनाओं का लाभ मुख्यतः अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक सीमित। दूरदराज के जिलों में क्रियान्वयन की खाई अभी पाटनी बाकी है। |
| कुपोषण | NFHS-5 के अनुसार 5 वर्ष से कम आयु के 32% बच्चे अभी भी कम वजन के हैं। महिलाओं में एनीमिया की दर चिंताजनक है। |
| बाल विवाह | सरकारी प्रयासों के बावजूद ग्रामीण UP के कुछ जिलों में बाल विवाह की प्रथा जारी है। जागरूकता अभियानों का असर असमान है। |
| साइबर अपराध | महिलाओं के विरुद्ध साइबर अपराधों में तेजी से वृद्धि हो रही है। Operation Garuda जैसे प्रयास जारी हैं लेकिन साइबर फोरेंसिक क्षमता सीमित है। |
| संपत्ति और विरासत अधिकार | कानूनी प्रावधानों के बावजूद जमीन और संपत्ति पर महिलाओं का वास्तविक नियंत्रण सीमित है। |
| डेटा की कमी | लैंगिक आधार पर बँटे हुए आँकड़ों का अभाव नीति निर्माण में बाधा बनता है। WEE Index इस दिशा में पहला कदम है लेकिन अभी पूर्ण एकीकरण बाकी है। |
आगे की राह: ‘अपराजिता’ की संभावनाएँ
‘अपराजिता’ — जिसे पराजित नहीं किया जा सकता। यह शीर्षक उत्तर प्रदेश की उस नारी के लिए है जो कभी हाशिये पर थी, पर आज बदलाव की अग्रदूत है। WEE Index, Mission Shakti 5.0, लखपति दीदी कार्यक्रम और BC सखी नेटवर्क — ये सभी एक व्यापक तंत्र के हिस्से हैं जो महिला सशक्तीकरण को ‘योजना’ से ‘आंदोलन’ में बदल रहे हैं।
आनेवाले वर्षों में जिन क्षेत्रों पर ध्यान आवश्यक है, वे इस प्रकार हैं —
- डिजिटल साक्षरता को प्राथमिकता: हर SHG महिला को स्मार्टफोन और इंटरनेट से जोड़ना।
- फॉर्मल रोजगार: ODOP और MSME के माध्यम से महिलाओं के लिए शहरी और अर्ध-शहरी रोजगार सृजन।
- स्वास्थ्य निवेश: आंगनवाड़ी केंद्रों का पूर्ण प्री-स्कूल रूपांतरण और एनीमिया उन्मूलन अभियान।
- न्यायिक त्वरण: महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में त्वरित सुनवाई हेतु फास्ट-ट्रैक कोर्टों का विस्तार।
- जेंडर बजटिंग: हर विभाग में लैंगिक आवंटन का पारदर्शी ऑडिट और WEE Index का अनिवार्य उपयोग।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश में नौ वर्षों की यह यात्रा यह सिद्ध करती है कि जब नीतियाँ महिलाओं को केंद्र में रखकर बनाई जाती हैं, तो परिणाम दिखते हैं। 60 लाख मातृ वंदना लाभार्थियों से लेकर 44,000 महिला पुलिसकर्मियों तक, 26 लाख कन्या सुमंगला बेटियों से लेकर 18.55 लाख लखपति दीदियों तक – यह संख्याएँ महज आँकड़े नहीं, ये उत्तर प्रदेश की अपराजिता नारी की ताकत की गवाही हैं।
लेकिन ‘अपराजिता’ की कहानी तब पूरी होगी जब प्रदेश की आखिरी महिला – चाहे वह बुंदेलखंड के किसी सूखाग्रस्त गाँव में हो या पूर्वांचल के दूरदराज के टोले में – भी इन योजनाओं का वास्तविक लाभ पाए।
