उत्तर प्रदेश में अब ओला (Ola), उबर (Uber) और इनड्राइवर जैसे राइड-हैलिंग ऐप्स को राज्य सरकार के कड़े नियमों के दायरे में रहना होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, जिसके तहत अब सभी कैब एग्रीगेटर्स को प्रदेश में संचालन के लिए आधिकारिक पंजीकरण (Official Registration) कराना अनिवार्य होगा।
यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि: परिवहन मंत्री का बयान
प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि यह निर्णय यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2025 को कैब एग्रीगेटर्स से जुड़े नियमों में संशोधन किया था, जिसे अब उत्तर प्रदेश सरकार ने भी अपना लिया है।
नए नियमों की मुख्य बातें:
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अनिवार्य पंजीकरण: मोटर वाहन (MV) अधिनियम, 1988 की धारा 93 के तहत, कोई भी एग्रीगेटर तब तक काम नहीं कर पाएगा जब तक उसके पास राज्य सरकार से प्राप्त वैध लाइसेंस न हो।
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ड्राइवरों की कड़ी जांच: अब ड्राइवरों का मेडिकल टेस्ट, पुलिस वेरिफिकेशन और फिटनेस टेस्ट अनिवार्य होगा।
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सार्वजनिक जानकारी: सरकार एक ऐसा ऐप विकसित करेगी जिस पर ड्राइवरों की पूरी जानकारी सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध होगी, ताकि यात्रियों को पता हो कि गाड़ी कौन चला रहा है।
लाइसेंस और फीस का ढांचा
कैबिनेट द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव के अनुसार, कंपनियों को भारी शुल्क चुकाना होगा:
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आवेदन शुल्क: ₹25,000
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लाइसेंस शुल्क: 50-100 या उससे अधिक वाहन संचालित करने वाली कंपनियों के लिए ₹5 लाख।
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नवीनीकरण (Renewal): लाइसेंस हर 5 साल में रिन्यू कराना होगा, जिसका शुल्क ₹5,000 निर्धारित किया गया है।
ग्रामीण परिवहन और सामाजिक सुधार पर भी बड़े फैसले
कैबिनेट बैठक में केवल शहरी परिवहन ही नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों और सामाजिक सुधारों पर भी मुहर लगी है:
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ग्रामीण बस योजना (Rural Bus Scheme): गांव की कनेक्टिविटी सुधारने के लिए कैबिनेट ने ग्रामीण बस योजना को हरी झंडी दे दी है। इससे दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए शहरों तक पहुंचना आसान और सस्ता होगा।
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भिक्षावृत्ति निषेध अधिनियम में संशोधन: सुप्रीम कोर्ट के आदेश (7 मई 2025) के अनुपालन में, उत्तर प्रदेश भिक्षावृत्ति निषेध अधिनियम में संशोधन किया जाएगा। इसके तहत अधिनियम की धारा 21 से ‘कुष्ठ रोग’ (Leprosy) से संबंधित भेदभावपूर्ण प्रावधानों को हटा दिया जाएगा। इसे ‘मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017’ के अनुरूप बनाया जा रहा है ताकि इस बीमारी से प्रभावित व्यक्तियों के खिलाफ भेदभाव खत्म हो सके।
News Drift विश्लेषण: उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम राज्य में डिजिटल परिवहन सेवाओं को व्यवस्थित करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। जहां एक ओर लाइसेंसिंग से सरकार का राजस्व बढ़ेगा, वहीं ड्राइवरों के सत्यापन से महिलाओं और आम यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
