उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक बार फिर रसूख और हथियारों के भद्दे प्रदर्शन ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन लीं। भात की रस्म के दौरान ‘हर्ष फायरिंग’ के जुनून में चली एक गोली ने पड़ोस के 9 वर्षीय मासूम रेयांश के सिर को छलनी कर दिया। पिछले कई दिनों से वह अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है, जबकि आरोपी अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।
घटना का विवरण: रस्म में मचा कोहराम
घटना बुलंदशहर के नगर कोतवाली क्षेत्र के सर्राफा बाजार की है। 19 फरवरी की रात एक शादी समारोह में ‘भात’ की रस्म चल रही थी। चश्मदीदों के मुताबिक, खुशियों का माहौल था, लोग नाच-गा रहे थे। इसी बीच, उत्साह के अतिरेक में लाइसेंसी हथियार से फायरिंग शुरू कर दी गई। बताया जा रहा है कि एक 14-15 साल के किशोर ने अपने पिता की पिस्टल से गोली चलाई, जो सीधे पड़ोसी के बच्चे के सिर में जा लगी।
कौन हैं आरोपी? पुलिस की कार्रवाई का स्टेटस
खबरों के मुताबिक, पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी और उसके पिता के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
आरोपी : पुलिस जांच में सामने आया है कि विनोद का नाबालिग बेटा (16) अंदर से लाइसेंसी पिस्टल ले आया। एक राउंड हवाई फायर कर दिया। परिवार के लोगों ने उसे डांटा। विनोद (नाबालिक का पिता ) ने कहा- कृष्णा तू फायरिंग कर… मैं कह रहा हूं ना फायरिंग कर। अगर किसी को गोली लगेगी तो मैं देख लूंगा।
परिवार के लोगों ने विनोद के बेटे को समझाया कि गली तंग है, लोग छतों पर खड़े हैं। हादसा हो सकता है। मगर पिता के उकसाने पर नाबालिग बेटा पूरी गली में घूम-घूमकर कई राउंड फायर करने लगा।
कार्रवाई की स्थिति: घटना के बाद से ही आरोपी पिता-पुत्र फरार हैं। अपर पुलिस अधीक्षक शंकर प्रसाद के अनुसार, पुलिस की कई टीमें दबिश दे रही हैं। हालांकि, घटना के 72 घंटे से अधिक बीत जाने के बाद भी न तो आरोपी पकड़े गए हैं और न ही वह ‘कातिल’ पिस्टल बरामद हुई है। पुलिस अब आरोपी का शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर रही है।
क्या कहता है कानून?
भारत में ‘हर्ष फायरिंग’ केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि एक गंभीर दंडनीय अपराध है।
आर्म्स एक्ट की धारा 25(9): साल 2019 के संशोधन के बाद, लापरवाही से या जश्न में फायरिंग करने पर 2 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
लाइसेंस रद्द: अगर कोई अपने लाइसेंसी हथियार का दुरुपयोग करता है, तो उसका लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिया जाता है।
BNS/IPC की धाराएं: यदि फायरिंग से किसी की मौत हो जाती है या कोई घायल होता है, तो आरोपी पर गैर-इरादतन हत्या (धारा 304) या हत्या के प्रयास (धारा 307) के तहत मुकदमा चलता है, जिसमें उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है।
शादियों में हथियार: कहाँ से आते हैं?
यह एक बड़ा सवाल है कि शादियों में ये हथियार आते कहाँ से हैं?
दिखावे की संस्कृति: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में हथियार रखना ‘मर्दानगी’ और ‘रसूख’ का प्रतीक माना जाता है।
नियमों की अनदेखी: लोग आत्मरक्षा के नाम पर लाइसेंस लेते हैं, लेकिन उसका इस्तेमाल सार्वजनिक कार्यक्रमों में ‘टशन’ दिखाने के लिए करते हैं।
अवैध सप्लाई: लाइसेंसी हथियारों के अलावा, शादियों में अवैध ‘कट्टे’ और पिस्टल की सप्लाई भी बड़े पैमाने पर होती है, जिस पर पुलिस प्रशासन की सख्ती अक्सर कागजों तक सीमित रह जाती है।
माँ-बाप का दर्द: “हमारा बच्चा सही कर दो “
रेयांश फिलहाल नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में वेंटिलेटर पर है। उसके माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता का कहना है, “मेरा बेटा तो बस खड़ा होकर देख रहा था, उसे क्या पता था कि पड़ोसियों का ‘जल्वा’ उसकी जान ले लेगा।” रेयांश के चाचा संस्कार वर्मा ने आरोप लगाया कि रसूखदार होने के कारण पुलिस आरोपियों को पकड़ने में ढील बरत रही है। एक मासूम जो कल तक खेल रहा था, आज कोमा में है और उसका परिवार न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है।
News Drift की अपील: शादी की खुशियां बांटने के लिए होती हैं, गोलियां चलाने के लिए नहीं। आपकी एक मिनट की ‘वाहवाही’ किसी की पूरी जिंदगी उजाड़ सकती है। हर्ष फायरिंग का विरोध करें और ऐसे अपराधियों की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
