हाल ही में जारी ‘QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स बाय सब्जेक्ट 2026’ में भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों ने शानदार प्रदर्शन किया है। इस साल की रैंकिंग भारत के लिए मिश्रित परिणाम लेकर आई है, जहाँ कुछ संस्थानों ने वैश्विक स्तर पर नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं, वहीं कुछ प्रतिष्ठित संस्थानों की रैंकिंग में गिरावट भी दर्ज की गई है।
खनिज और खनन इंजीनियरिंग में IIT-ISM धनबाद अव्वल
भारतीय संस्थानों में सबसे बड़ी सफलता IIT-ISM धनबाद को मिली है। ‘इंजीनियरिंग – मिनरल एंड माइनिंग’ विषय में यह संस्थान 21वें स्थान पर रहा है, जो इसे भारत का सर्वोच्च रैंक वाला संस्थान बनाता है। पिछले वर्ष भी यह 20वें स्थान पर था।
इसी श्रेणी में IIT खड़गपुर ने जबरदस्त सुधार दिखाते हुए 23 पायदान की छलांग लगाई है। पिछले साल 45वें स्थान पर रहने वाला यह संस्थान अब दुनिया के शीर्ष 25 संस्थानों में शामिल होकर 22वें स्थान पर पहुँच गया है।
मैनेजमेंट में IIM-A का जलवा
मैनेजमेंट की पढ़ाई के क्षेत्र में IIM अहमदाबाद (IIM-A) ने अपनी वैश्विक धाक जमाई है। ‘बिजनेस एंड मैनेजमेंट स्टडीज’ में IIM-A 21वें स्थान पर पहुँच गया है (पिछली बार 27वीं रैंक थी)। इसके अलावा, ‘मार्केटिंग’ विषय में पहली बार प्रवेश करते हुए संस्थान ने सीधे 21वीं रैंक हासिल की है।
कंप्यूटर साइंस में सुधार, लेकिन इंजीनियरिंग में चुनौती
कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में भारत के सभी छह प्रमुख संस्थानों की रैंकिंग में सुधार हुआ है। IIT बॉम्बे 44वें और IIT दिल्ली 45वें स्थान पर रहे हैं।
हालाँकि, ‘इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी’ की व्यापक श्रेणी में भारतीय संस्थानों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा है:
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IIT दिल्ली: 26वें से गिरकर 36वें स्थान पर।
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IIT बॉम्बे: 28वें से गिरकर 42वें स्थान पर।
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IIT कानपुर: 72वें से गिरकर 86वें स्थान पर।
QS के अनुसार, इन संस्थानों की रैंकिंग गिरने का मुख्य कारण ‘एम्प्लॉयर रेपुटेशन’ (नियोक्ता प्रतिष्ठा) और ‘साइटेशन स्कोर’ में आई कमी है। वैश्विक स्तर पर सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन जैसे संस्थानों से मिल रही कड़ी टक्कर ने भी रैंकिंग को प्रभावित किया है।
रैंकिंग की कुछ अन्य मुख्य बातें:
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निजी विश्वविद्यालय: निजी क्षेत्र में सवीथा इंस्टीट्यूट (डेंटिस्ट्री में 25वीं रैंक) और ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी (लॉ में 35वीं रैंक) ने शीर्ष प्रदर्शन किया है।
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JNU की स्थिति: डेवलपमेंट स्टडीज में JNU 26वें स्थान पर रहा है, लेकिन आर्ट्स एंड ह्यूमैनिटीज में इसकी रैंकिंग में भारी गिरावट देखी गई (177 से गिरकर 260)।
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भारत का बढ़ता कद: इस साल रैंकिंग में भारत के कुल 99 संस्थान शामिल हुए हैं, जो पिछले साल 79 थे। अमेरिका, चीन और यूके के बाद भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा प्रतिनिधित्व करने वाला देश बन गया है।
निष्कर्ष
QS रैंकिंग 2026 यह दर्शाती है कि भारत विशेष रूप से इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस जैसे तकनीकी विषयों में वैश्विक स्तर पर मजबूती से उभर रहा है। हालाँकि, आर्ट्स, लाइफ साइंसेज और एम्प्लॉयर रेपुटेशन जैसे क्षेत्रों में अभी और सुधार की आवश्यकता है ताकि भारतीय छात्र वैश्विक बाजार की जरूरतों पर पूरी तरह खरे उतर सकें।
