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    Home»राज्य»उत्तरप्रदेश»UP में अब जमीन की रजिस्ट्री आसान नहीं: खतौनी और पहचान पत्र के बिना सब-रजिस्ट्रार कर देंगे ‘Refuse’, नया कानून तैयार
    UP में अब जमीन की रजिस्ट्री आसान नहीं: खतौनी और पहचान पत्र के बिना सब-रजिस्ट्रार कर देंगे ‘Refuse’, नया कानून तैयार

    UP में अब जमीन की रजिस्ट्री आसान नहीं: खतौनी और पहचान पत्र के बिना सब-रजिस्ट्रार कर देंगे ‘Refuse’, नया कानून तैयार

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    By News Drift on March 11, 2026 उत्तरप्रदेश, राज्य
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    उत्तर प्रदेश में जमीन और मकान की खरीद-फरोख्त में होने वाली धोखाधड़ी और सालों-साल चलने वाली मुकदमेबाजी पर लगाम लगाने के लिए योगी सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के प्रमुख सचिव अमित गुप्ता द्वारा जारी ताजा प्रेस नोट के अनुसार, ‘रजिस्ट्रेशन अधिनियम’ में बड़े संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं।

    अब प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री से पहले केवल कागज़ दिखाना काफी नहीं होगा, बल्कि सब-रजिस्ट्रार को मालिकाना हक और खतौनी का गहराई से परीक्षण करना होगा।

    क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?

    प्रेस नोट में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान में कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहाँ:

    • संपत्ति के असली मालिक की जानकारी के बिना कोई अन्य व्यक्ति संपत्ति बेच देता है।

    • प्रतिबंधित या केंद्र/राज्य सरकार की संपत्तियों की अवैध रजिस्ट्री करा ली जाती है।

    • कुर्क (Attached) की गई संपत्तियों को भी धोखाधड़ी से बेच दिया जाता है। इससे आम जनता को कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पड़ते हैं और शासन की छवि भी खराब होती है।

     कानून में क्या बदल रहा है? (नई धाराएं 22-A, 22-B और 35-A)

    सरकार रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 में तीन नई धाराएं जोड़ने जा रही है जो रजिस्ट्री की प्रक्रिया को पूरी तरह बदल देंगी:

    • धारा 22-A: यह सरकार को शक्ति देगी कि वह कुछ विशिष्ट श्रेणियों के दस्तावेजों के पंजीकरण को पूरी तरह प्रतिबंधित कर सके।

    • धारा 22-B: इसके तहत अचल संपत्ति के पंजीकरण से पहले उसकी सटीक पहचान और रिकॉर्ड का मिलान अनिवार्य होगा।

    • धारा 35-A(1): यह सबसे महत्वपूर्ण बदलाव है। यदि रजिस्ट्री के समय मालिकाना हक (Ownership), कब्ज़ा, पहचान या अंतरण संबंधी आवश्यक दस्तावेज (जो गजट में अधिसूचित होंगे) संलग्न नहीं हैं, तो पंजीकरण अधिकारी (Sub-Registrar) रजिस्ट्री करने से साफ इनकार (Refuse) कर देगा।

    अब तक क्या था नियम?

    अब तक धारा 35 के तहत उप-निबंधक (Sub-Registrar) के पास रजिस्ट्री रोकने के बहुत सीमित अधिकार थे। वे दस्तावेजों की सत्यता की जांच करने के बजाय केवल प्रस्तुतीकरण पर ध्यान देते थे। लेकिन अब उन्हें न्यायिक शक्ति की तरह दस्तावेजों के परीक्षण का अधिकार दिया जा रहा है।

    आम जनता पर क्या होगा असर?

    • मुकदमेबाजी में कमी: रजिस्ट्री से पहले ही कागजों की सघन जांच होने से ‘फर्जीवाड़े’ की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।

    • खरीददार की सुरक्षा: जो व्यक्ति जमीन खरीद रहा है, उसे अब इस बात की गारंटी मिलेगी कि जिस संपत्ति की रजिस्ट्री हो रही है, उसके कागजात विभाग द्वारा परखे जा चुके हैं।

    • सरकारी गजट का महत्व: सरकार जल्द ही उन दस्तावेजों की लिस्ट जारी करेगी जो रजिस्ट्री के साथ लगाना अनिवार्य होगा (जैसे अपडेटेड खतौनी, आईडी प्रूफ, और कब्ज़ा प्रमाण पत्र)।


    News Drift एनालिसिस: क्या इससे भ्रष्टाचार बढ़ेगा या घटेगा?

    जहाँ एक ओर यह कदम धोखाधड़ी रोकने के लिए ‘मास्टरस्ट्रोक’ माना जा रहा है, वहीं जानकारों का यह भी मानना है कि सब-रजिस्ट्रार को ‘इनकार करने का अधिकार’ देने से आम आदमी को दफ्तरों के और चक्कर काटने पड़ सकते हैं। हालांकि, सरकार का मानना है कि यह संशोधन भारतीय संविधान की अनुसूची-7 (समवर्ती सूची) के तहत जनहित में लाया जा रहा है और जल्द ही इसे विधान मंडल की स्वीकृति दिलाई जाएगी।

    निष्कर्ष: यदि आप उत्तर प्रदेश में संपत्ति खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अब केवल ‘सौदा’ करना काफी नहीं होगा। अपनी खतौनी और स्वामित्व संबंधी अभिलेखों को आज ही दुरुस्त कर लें, वरना आपकी रजिस्ट्री बीच में ही लटक सकती है।

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