भारतीय नौसेना ने शुक्रवार को अपनी समुद्री मारक क्षमता और परमाणु प्रतिरोधक क्षमता (Nuclear Deterrence) में अब तक का सबसे बड़ा इजाफा किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में भारत की तीसरी परमाणु पनडुब्बी INS अरिदमन को सेना में शामिल किया गया, जबकि एक अन्य समारोह में अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट INS तारागिरी को भी नौसेना के बेड़े का हिस्सा बनाया गया।
अरिदमन: ‘शब्द नहीं, शक्ति है’
INS अरिदमन की कमीशनिंग को लेकर हालांकि कोई आधिकारिक तामझाम नहीं दिखा, लेकिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक रहस्यमयी और शक्तिशाली पोस्ट के जरिए संदेश साफ कर दिया। उन्होंने लिखा— “शब्द नहीं, शक्ति है ‘अरिदमन'”।
INS अरिदमन की खासियतें:
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यह भारत की तीसरी परमाणु ऊर्जा से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) है।
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मारक क्षमता: यह अपने पूर्ववर्तियों (INS अरिहंत और INS अरिघात) की तुलना में अधिक घातक है। यह K-15 मिसाइलों के साथ-साथ 3,500 किमी तक मार करने वाली K-4 परमाणु-सक्षम मिसाइलों से लैस है।
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VLS ट्यूब: इसमें वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) ट्यूबों की संख्या पहले की पनडुब्बियों से लगभग दोगुनी है, जो इसे और अधिक विनाशकारी बनाती है।
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परमाणु ट्रायड: इसकी कमीशनिंग के साथ ही भारत के पास पहली बार समंदर में तीन ऑपरेशनल परमाणु पनडुब्बियां होंगी, जो भारत के ‘न्यूक्लियर ट्रायड’ (जमीन, हवा और पानी से परमाणु हमला करने की क्षमता) को अभेद्य बनाती हैं।
INS तारागिरी: समंदर का नया ‘अदृश्य’ शिकारी
प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित INS तारागिरी नीलगिरी क्लास का चौथा स्टील्थ गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट है। लगभग 6,670 टन वजनी इस युद्धपोत को ‘मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड’ ने तैयार किया है।
तारागिरी की मुख्य विशेषताएं:
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स्टील्थ तकनीक: उन्नत स्टील्थ डिजाइन के कारण यह रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आता।
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स्वदेशी ताकत: इसमें 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
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हथियार: यह ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइलों, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और उन्नत स्वदेशी एंटी-सबमरीन सूट से लैस है।
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बहुआयामी भूमिका: रक्षा मंत्री के अनुसार, यह युद्धपोत समुद्री सुरक्षा, एंटी-पायरेसी ऑपरेशन्स और तटीय निगरानी के साथ-साथ मानवीय मिशनों के लिए भी तैयार है।
हिंद महासागर में भारत का बढ़ता कद
नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने इस मौके पर कहा कि पश्चिम एशिया के तनाव और लाल सागर में जहाजों पर हो रहे हमलों के बीच भारत की यह मजबूती वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। भारत का 95% व्यापार समुद्री मार्गों से होता है, ऐसे में नौसेना की मजबूती महज विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है।
‘न्यूज ड्रिफ्ट’ विश्लेषण: क्यों खास है यह कदम?
भारत की ‘नो फर्स्ट यूज’ (पहले परमाणु हमला न करने) की नीति के तहत, परमाणु पनडुब्बी सबसे विश्वसनीय हथियार मानी जाती है। क्योंकि यह दुश्मन के पहले हमले के बाद भी सुरक्षित रहकर जवाबी कार्रवाई (Second Strike) करने की क्षमता रखती है। INS अरिदमन और INS तारागिरी का शामिल होना चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों के लिए एक कड़ा संदेश है कि हिंद महासागर से लेकर इंडो-पैसिफिक तक, भारत अब एक जिम्मेदार और अत्यंत शक्तिशाली समुद्री महाशक्ति बन चुका है।
