न्यूज़ ड्रिफ्ट डेस्क: आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए 24 अप्रैल का दिन किसी बड़े झटके से कम नहीं रहा। पार्टी के सबसे चर्चित चेहरों में से एक, राघव चड्ढा ने अपने 6 अन्य साथी सांसदों के साथ अधिकारिक रूप से भाजपा का दामन थाम लिया है। इस कदम ने न केवल दिल्ली और पंजाब की राजनीति को हिला दिया है, बल्कि राज्यसभा के समीकरणों को भी बदल दिया है।
आखिर मामला क्या है?
शुक्रवार (24 अप्रैल) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने घोषणा की कि वे राज्यसभा में AAP के दो-तिहाई (2/3) सदस्यों के बहुमत के साथ भाजपा में विलय कर रहे हैं।
विलय की रणनीति: चूँकि 10 में से 7 सांसद एक साथ गए हैं, इसलिए उन पर ‘दल-बदल विरोधी कानून’ (Anti-Defection Law) लागू नहीं होगा और उनकी सदस्यता बरकरार रहेगी।
शामिल होने वाले अन्य प्रमुख नाम: हरभजन सिंह, स्वाति मालिवाल, विक्रम साहनी और राजिंदर गुप्ता।
क्यों छोड़ी राघव चड्ढा ने पार्टी ?
राघव चड्ढा, जिन्हें कभी अरविंद केजरीवाल की ‘दाहिनी भुजा’ कहा जाता था, उनके पार्टी छोड़ने के पीछे कई गहरे कारण सामने आ रहे हैं:
आंतरिक अनबन और पद में कटौती: कुछ हफ़्तों पहले ही राघव चड्ढा को राज्यसभा में AAP के ‘डिप्टी लीडर’ के पद से हटा दिया गया था। उनकी जगह अशोक मित्तल को लाया गया था (जो अब खुद भाजपा में चले गए हैं)।
“राइट मैन इन रोंग पार्टी”: प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव ने भावुक होते हुए कहा, “मैं एक गलत पार्टी में सही व्यक्ति था। आज की AAP भ्रष्टाचार के दलदल में फंस गई है।”
स्वाति मालिवाल का प्रभाव: स्वाति मालिवाल ने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है और वहां महिलाओं का सम्मान नहीं रहा।
एजेंसियों का दबाव या राजनीतिक महत्वाकांक्षा? विपक्ष इसे ‘ऑपरेशन लोटस’ कह रहा है, जबकि राघव चड्ढा का कहना है कि वे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश सेवा करना चाहते हैं।
राघव चड्ढा का इतिहास: ‘ब्लू-आईड बॉय’ से ‘बागी’ तक
शुरुआती दौर: एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में राघव 2012 के अन्ना आंदोलन से ही केजरीवाल के साथ थे।
पंजाब की जीत: 2022 में पंजाब में ‘झाड़ू’ चलाने के पीछे राघव की रणनीति सबसे अहम मानी गई थी।
ग्लोबल पहचान: वे ‘यंग ग्लोबल लीडर’ (WEF) के रूप में चुने गए और AAP के सबसे ग्लैमरस और पढ़े-लिखे चेहरों में गिने जाते थे।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
अरविंद केजरीवाल: उन्होंने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “भाजपा ने एक बार फिर पंजाबियों के साथ धोखा किया है।”
संजय सिंह: उन्होंने इसे पार्टी और जनता के साथ बड़ी गद्दारी करार दिया है।
न्यूज़ ड्रिफ्ट विश्लेषण: आगे क्या होगा?
इस घटना के बाद राज्यसभा में भाजपा की स्थिति और मजबूत हो गई है। पंजाब की राजनीति में भी एक बड़ा शून्य पैदा होगा क्योंकि ये सभी सांसद पंजाब से राज्यसभा पहुंचे थे। अब देखना यह है कि क्या इसका असर आगामी विधानसभा चुनावों पर भी पड़ेगा?
एक पत्रकार की डायरी से: यह घटना दिखाती है कि राजनीति में कोई भी दोस्त या दुश्मन स्थाई नहीं होता। जो राघव कल तक भाजपा पर सबसे तीखे प्रहार करते थे, आज उसी कमल के साथ अपनी नई पारी शुरू कर रहे हैं।
