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    Home»राज्य»जनाक्रोश महिला पदयात्रा : महिला अधिकारों की राजनीति या राजनीतिक अधिकारों की लड़ाई?
    जनाक्रोश महिला पदयात्रा : महिला अधिकारों की राजनीति या राजनीतिक अधिकारों की लड़ाई?

    जनाक्रोश महिला पदयात्रा : महिला अधिकारों की राजनीति या राजनीतिक अधिकारों की लड़ाई?

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    By News Drift on April 22, 2026 राज्य, उत्तरप्रदेश
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    लखनऊ की सड़कों पर हाल ही में निकली “जनाक्रोश महिला पदयात्रा” ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को एक बार फिर महिला अधिकारों के मुद्दे पर केंद्रित कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में निकली इस पदयात्रा को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विपक्ष, खासकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा), के “महिला विरोधी चेहरे” को उजागर करने का अभियान बताया है। वहीं विपक्ष ने इसे राजनीतिक दिखावा और चुनावी रणनीति करार दिया है।

    पदयात्रा का संदेश और सरकार का दावा
    भाजपा का कहना है कि यह पदयात्रा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में विपक्ष पर आरोप लगाया कि जब भी महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण कानून और सुधारों की बात आती है, विपक्ष बाधा खड़ी करता है।
    सरकार का तर्क है कि पिछले वर्षों में महिला सुरक्षा, शिक्षा और स्वावलंबन के क्षेत्र में कई योजनाएं लागू की गई हैं, जिनसे प्रदेश में सकारात्मक बदलाव आया है।

    विपक्ष का पलटवार
    वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पदयात्रा को “राजनीतिक अभ्यास” बताते हुए कहा कि वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे आयोजन किए जा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि अगर सरकार सच में महिलाओं के हित में काम कर रही होती, तो ज़मीनी स्तर पर अपराध और असुरक्षा के मामलों में अधिक ठोस सुधार दिखता।
    कांग्रेस नेताओं ने भी महिला आरक्षण और अधिकारों के मुद्दे पर भाजपा की नीतियों पर सवाल उठाए हैं और दावा किया है कि अगर मौजूदा संसद में महिला आरक्षण लागू किया जाए, तो कांग्रेस समर्थन देने को तैयार है।

    जानिए क्या है नारी शक्ति वंदन अधिनियम:

    https://newsdrift.in/2026/04/19/deadline-of-nari-shakti-vandan-act-2029-and-struggle-of-parliament/

    महिला आरक्षण: राजनीति का केंद्र बिंदु
    इस पूरे विवाद के केंद्र में महिला आरक्षण का मुद्दा भी है। भाजपा जहां इसे लागू करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराती है, वहीं विपक्ष आरोप लगाता है कि यह केवल चुनावी वादा बनकर रह गया है।
    महिला आरक्षण को लेकर दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी यह दिखाती है कि यह मुद्दा आने वाले चुनावों में अहम भूमिका निभा सकता है।

    राजनीतिक संदेश बनाम सामाजिक वास्तविकता
    यह पदयात्रा केवल एक राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक व्यापक संदेश देने की कोशिश भी है—कि महिला अधिकार अब राजनीति के केंद्र में हैं। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या यह विमर्श ज़मीनी बदलाव में बदल पाएगा या केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहेगा?

    निष्कर्ष
    लखनऊ की यह पदयात्रा उत्तर प्रदेश की राजनीति में महिला मुद्दों की बढ़ती अहमियत को दर्शाती है। जहां एक ओर सत्तापक्ष इसे अपनी उपलब्धियों का प्रदर्शन मानता है, वहीं विपक्ष इसे महज चुनावी रणनीति बताता है।
    अंततः, असली कसौटी यही होगी कि इन राजनीतिक अभियानों का असर महिलाओं के जीवन में कितनी वास्तविक और स्थायी सुधार के रूप में दिखाई देता है।

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