लखनऊ, 2 फरवरी।
राजधानी के अलीगंज स्थित LDA स्टेडियम को हाल ही में एक निजी संस्था को सौंपे जाने के निर्णय के बाद स्थानीय खिलाड़ियों, अभिभावकों और प्रशिक्षकों में चर्चा तेज हो गई है। यह वही स्टेडियम है जहाँ लगभग 400 बच्चे क्रिकेट, टेनिस, हॉकी, फुटबॉल सहित विभिन्न खेलों का नियमित प्रशिक्षण लेते रहे हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह स्टेडियम वर्षों से क्षेत्र के बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण खेल केंद्र रहा है, जहाँ न्यूनतम शुल्क पर प्रशिक्षण दिया जाता था, लड़कियों से कोई फीस नहीं ली जाती थी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को निःशुल्क अवसर उपलब्ध कराए जाते थे। कई परिवारों के लिए यह मैदान केवल खेल स्थल नहीं, बल्कि बच्चों के आत्मविश्वास और अनुशासन निर्माण का माध्यम रहा है।
हालाँकि इस बदलाव से कुछ असमंजस की स्थिति बनी है, लेकिन अभिभावकों को उम्मीद है कि प्रशासन इस निर्णय पर पुनर्विचार करेगा या बच्चों के लिए समान स्तर की वैकल्पिक खेल सुविधा सुनिश्चित करेगा। उनका मानना है कि इससे “फिट इंडिया” और “खेलो इंडिया” अभियानों की भावना और मजबूत होगी।
अभिभावकों का यह भी कहना है कि खेल गतिविधियाँ बच्चों को मोबाइल और इंटरनेट की लत से दूर रखने में मदद करती हैं, इसलिए उन्हें सुरक्षित और सुलभ खेल स्थल मिलना बेहद जरूरी है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि स्टेडियम किस निजी संस्था को दिया गया है, और इस संबंध में LDA या जिला प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है।
स्टेडियम में कार्यरत कोच और कर्मचारियों ने भी अपनी चिंता जताई है, साथ ही उम्मीद व्यक्त की है कि उनके अनुभव और सेवाओं का उपयोग किसी न किसी रूप में जारी रहेगा।
स्थानीय खिलाड़ियों और अभिभावकों ने सरकार से आग्रह किया है कि या तो स्टेडियम को पुनः सार्वजनिक उपयोग के लिए खोला जाए, या बच्चों के लिए बेहतर वैकल्पिक खेल व्यवस्था की जाए ताकि राजधानी में खेल संस्कृति और मजबूत हो सके।
रवि कान्त त्रिपाठी
