स्वास्थ्य जगत की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘लांसेट’ (The Lancet) में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन ने वैश्विक स्तर पर स्तन कैंसर (Breast Cancer) को लेकर खतरे की घंटी बजा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, 2050 तक दुनिया भर में स्तन कैंसर के मामलों में एक-तिहाई (one-third) की वृद्धि होने का अनुमान है।
विशेष रूप से भारत जैसे निम्न और मध्यम आय वाले देशों में यह स्थिति और भी गंभीर होती जा रही है। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस वृद्धि के पीछे के कारण क्या हैं और आंकड़े क्या कहते हैं।
1. आंकड़ों की जुबानी: एक भयावह तस्वीर
लांसेट की रिपोर्ट के मुताबिक, स्तन कैंसर का बोझ और इसके जोखिम कारक तेजी से बदल रहे हैं:
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वैश्विक वृद्धि: 2023 में नए मामलों की संख्या लगभग 2.3 मिलियन थी, जिसके 2050 तक बढ़कर 3.5 मिलियन होने का अनुमान है।
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मृत्यु दर में उछाल: सालाना मौतों का आंकड़ा भी लगभग 6.7 लाख से बढ़कर 10 लाख तक पहुँच सकता है।
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भारत की स्थिति: भारत में आयु-मानकीकृत घटना दर (ASIR) 1990 में 13.0 प्रति लाख थी, जो 2023 में बढ़कर 29.4 प्रति लाख हो गई है।
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युवाओं पर असर: अब 20 से 54 वर्ष की आयु की महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले 1990 के मुकाबले 29% तक बढ़ गए हैं।
2. स्तन कैंसर बढ़ने के मुख्य कारण (Why cases are rising?)
अध्ययन में उन प्रमुख कारणों की पहचान की गई है जो इस जानलेवा बीमारी को बढ़ावा दे रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 28% से अधिक वैश्विक बोझ को 6 परिवर्तनीय जोखिम कारकों (Modifiable risk factors) से जोड़ा जा सकता है:
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मोटापा और उच्च रक्त शर्करा (Obesity & High Blood Sugar): खराब जीवनशैली और खान-पान के कारण बढ़ता वजन स्तन कैंसर का एक बड़ा कारण बनकर उभरा है।
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शारीरिक सक्रियता की कमी: पर्याप्त व्यायाम न करना शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ता है।
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धूम्रपान और शराब का सेवन: ये दोनों कारक सीधे तौर पर कैंसर कोशिकाओं के पनपने में मदद करते हैं।
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रेड मीट का अधिक सेवन: मांस के अत्यधिक उपयोग को भी एक जोखिम कारक माना गया है।
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डेमोग्राफिक ट्रांजिशन: देशों की आर्थिक स्थिति बदलने के साथ ही जीवनशैली “पश्चिमी” हो रही है, जिससे निम्न और मध्यम आय वाले देशों में जोखिम बढ़ रहा है।
3. भारत में मृत्यु दर अधिक होने की वजह
चिंता की बात यह है कि भारत जैसे देशों में मृत्यु दर (ASIR) अधिक बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे दो प्रमुख कारण हैं:
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देरी से निदान (Late Diagnosis): स्वास्थ्य जागरूकता की कमी और स्क्रीनिंग की सुविधाओं तक सीमित पहुँच के कारण महिलाएं अक्सर कैंसर के तीसरे या चौथे चरण में डॉक्टर के पास पहुँचती हैं।
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इलाज की गुणवत्ता: उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल और समय पर उपचार न मिल पाना भी एक बड़ी बाधा है।
4. बचाव के उपाय: क्या किया जा सकता है?
लांसेट की रिपोर्ट सुझाव देती है कि यदि हम अपनी जीवनशैली में सुधार करें, तो लाखों मौतों को टाला जा सकता है:
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नियमित व्यायाम: शारीरिक रूप से सक्रिय रहना कैंसर के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है।
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संतुलित आहार: रेड मीट और प्रोसेस्ड फूड को कम कर ताजे फल और सब्जियों को तरजीह देना।
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स्वयं जांच (Self-Examination): महिलाओं को नियमित अंतराल पर स्वयं जांच करनी चाहिए ताकि किसी भी गांठ का पता शुरुआती स्तर पर चल सके।
स्तन कैंसर अब केवल एक स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि एक बड़ा सामाजिक और आर्थिक बोझ बनता जा रहा है। भारत के लिए चुनौती यह है कि वह कैंसर रजिस्ट्री के दायरे को बढ़ाए (जो वर्तमान में केवल 10% से 15% आबादी को कवर करती है) ताकि सटीक डेटा और समय पर इलाज सुनिश्चित किया जा सके।
