उत्तर प्रदेश के इतिहास में आज एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरदोई जिले के मल्लावां में भारत के सबसे लंबे 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे — गंगा एक्सप्रेसवे — का भव्य लोकार्पण किया। 594 किलोमीटर लंबा यह महामार्ग मेरठ से प्रयागराज तक उत्तर प्रदेश के पश्चिमी, मध्य और पूर्वी छोर को एक सूत्र में पिरोता है। यह सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन को बदलने वाली आर्थिक क्रांति की नींव है।
क्या है गंगा एक्सप्रेसवे — एक नज़र में
लगभग ₹36,230 करोड़ की लागत से बना यह एक्सप्रेसवे मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जुदापुर दांडू गांव तक फैला हुआ है। इस रूट पर 12 जिले — मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज — सीधे जुड़ते हैं।
अभी तक मेरठ से प्रयागराज का सफर 10 से 12 घंटे में पूरा होता था। गंगा एक्सप्रेसवे पर यही दूरी अब महज 6 घंटे में तय होगी। यात्रा समय में लगभग 40 प्रतिशत की यह कमी आम यात्रियों से लेकर व्यापारियों और किसानों तक — सभी के लिए क्रांतिकारी साबित होगी।
एक्सप्रेसवे पर 21 इंटरचेंज, 381 अंडरपास, 14 मुख्य पुल, 929 पुलिया और 14 टोल प्लाजा बनाए गए हैं। टोल की अनुमानित दर लगभग ₹2.55 प्रति किलोमीटर है, जिससे पूरे एक्सप्रेसवे का सफर करीब ₹1,500 में पूरा होगा। खास बात यह है कि एंट्री बिल्कुल निशुल्क होगी और टोल का भुगतान केवल एग्जिट पर तय दूरी के आधार पर करना होगा — वह भी अत्याधुनिक सेंसर प्रणाली के जरिए बिना रुके।
सामरिक दृष्टि से भी अनूठा — IAF ने की फाइटर जेट लैंडिंग
गंगा एक्सप्रेसवे केवल नागरिक यातायात का साधन नहीं है। इसे रणनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखकर भी डिज़ाइन किया गया है। शाहजहांपुर के निकट 3.5 किलोमीटर लंबी इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप का निर्माण किया गया है, जहाँ आवश्यकता पड़ने पर भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान उतर सकते हैं।
2 मई 2025 को भारतीय वायुसेना ने इस पट्टी पर Su-30MKI, Mirage 2000, MiG-29, Jaguar, C-130J सुपर हरक्यूलिस, An-32 और Mi-17 V5 हेलीकॉप्टर की सफल लैंडिंग और टेकऑफ का अभ्यास किया। इस सामरिक क्षमता ने शाहजहांपुर और समूचे एक्सप्रेसवे कॉरिडोर को राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से भी बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है।
औद्योगिक कॉरिडोर — ‘सड़क के साथ उद्योग’ का नया मॉडल
योगी सरकार ने गंगा एक्सप्रेसवे को महज एक यातायात परियोजना तक सीमित नहीं रखा। इसे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर (IMLC) के रूप में विकसित किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) द्वारा 12 जिलों में 12 IMLC नोड्स विकसित किए जा रहे हैं, जिनके लिए 6,507 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है।
इस योजना को निवेशकों से जबर्दस्त प्रतिक्रिया मिली है। अब तक 987 इंटेंट्स ऑफ इन्वेस्टमेंट (EOI) प्राप्त हुए हैं, जिनसे ₹46,660 करोड़ के निवेश की संभावना है। यह निवेश मुख्यतः मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग, ई-कॉमर्स सप्लाई चेन और एग्री-प्रोसेसिंग सेक्टर में आएगा।
जिलेवार औद्योगिक विकास की झलक:
- मेरठ: खेल सामग्री, कैंची और वाद्य यंत्रों के परंपरागत उद्योगों को ग्लोबल लॉजिस्टिक्स सपोर्ट मिलेगा।
- शाहजहांपुर: 3.5 किमी हवाई पट्टी के साथ कौशल विकास केंद्र — युवाओं को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण।
- हरदोई: एक्सप्रेसवे का सबसे लंबा हिस्सा यहाँ से गुजरता है। नॉलेज पार्क और टेक्सटाइल पार्क प्रस्तावित।
- रायबरेली: लालगंज रेलवे कोच फैक्ट्री के आसपास एंसिलरी उद्योगों का तेज विस्तार।
- उन्नाव: लखनऊ-कानपुर के साथ मिलकर ‘ट्राई-सिटी इकोनॉमिक मॉडल’ — कानपुर के लेदर उद्योग को अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक सीधी राह।
- अमरोहा: UPEIDA को पहले ही ₹1,120 करोड़ के चार निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं।
किसानों और ग्रामीणों के लिए वरदान
गंगा एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा सामाजिक लाभ खेतों से जुड़ा है। अब किसान अपनी उपज को दिल्ली और लखनऊ की मंडियों तक रिकॉर्ड समय में पहुंचा सकेंगे। इससे परिवहन लागत घटेगी और उपज की बेहतर कीमत मिलेगी। इसके अलावा एक्सप्रेसवे के साथ ऊर्जा गंगा परियोजना के तहत गैस पाइपलाइन बिछाने की योजना है, जिससे रास्ते में आने वाले गांवों और उद्योगों को PNG और CNG जैसी सस्ती ऊर्जा सुविधाएं मिल सकेंगी।
उद्घाटन के बाद यूपी में एक्सप्रेसवे नेटवर्क की तस्वीर
गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होते ही उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे का कुल संचालित नेटवर्क 1,911 किलोमीटर हो गया है। इसके साथ यूपी देश का सबसे ज्यादा एक्सप्रेसवे वाला राज्य बन गया है — देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अब अकेले उत्तर प्रदेश में है।
इससे पहले प्रदेश में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे (341 किमी), आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे (302 किमी), यमुना एक्सप्रेसवे (165 किमी), बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे (296 किमी), गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे (91 किमी) और दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे (210 किमी) संचालित थे। इनकी कुल लंबाई 1,316 किलोमीटर थी।
अब योगी सरकार और केंद्र सरकार मिलकर 11 और नए एक्सप्रेसवे एवं लिंक एक्सप्रेसवे पर काम कर रही हैं — जिनमें विंध्य एक्सप्रेसवे (277 किमी), मेरठ-हरिद्वार लिंक (130 किमी), फर्रुखाबाद लिंक, जेवर लिंक, चित्रकूट लिंक और लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे प्रमुख हैं। सरकार का लक्ष्य है कि 2029 तक प्रदेश का एक्सप्रेसवे नेटवर्क 3,200 किलोमीटर तक पहुंच जाए।
