पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी युद्ध के चौथे सप्ताह में प्रवेश करने के साथ ही भारत सरकार ने देश की तैयारियों और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों की समीक्षा तेज कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राज्यसभा में देश को आश्वस्त किया कि भारत के पास कच्चे तेल (Crude Oil) का पर्याप्त भंडार और निरंतर आपूर्ति के पुख्ता इंतजाम हैं।
इस गंभीर स्थिति पर चर्चा के लिए आज (बुधवार) सरकार ने एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर सहित कई वरिष्ठ मंत्री शामिल होंगे।
7 अधिकार प्राप्त समूह (Empowered Groups) करेंगे निगरानी
युद्ध के वैश्विक असर से निपटने के लिए सरकार ने सचिवों के 7 अधिकार प्राप्त समूहों का गठन किया है। ये समूह ठीक उसी तरह काम करेंगे जैसे कोविड-19 महामारी के दौरान रणनीति बनाने के लिए बनाए गए थे। इन समूहों की जिम्मेदारी होगी:
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ऊर्जा सुरक्षा: पेट्रोलियम उत्पादों की वैकल्पिक व्यवस्था और मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करना।
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सप्लाई चेन: व्यापारिक मार्गों, बंदरगाहों और रसद (Logistics) में आने वाली बाधाओं को दूर करना।
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खाद्य एवं उर्वरक: आने वाले बुवाई सीजन के लिए उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना।
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आवश्यक वस्तुएं: घरेलू बाजार में जरूरी सामानों की उपलब्धता और कालाबाजारी पर रोक लगाना।
पीएम मोदी का संसद में वक्तव्य
प्रधानमंत्री ने युद्ध की स्थिति को “चिंताजनक” बताते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति बाधित हुई है। उन्होंने कहा:
“पिछले 11 वर्षों में हमने 53 लाख मीट्रिक टन रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (Strategic Petroleum Reserves) विकसित किया है और हम अतिरिक्त 65 लाख मीट्रिक टन के भंडार पर काम कर रहे हैं। देशवासियों को घबराने की आवश्यकता नहीं है, सरकार हर स्थिति पर नजर रखे हुए है।”
भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा सर्वोपरि
खाड़ी देशों में रह रहे करीब एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री ने गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 3.75 लाख भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा चुकी है और सरकार ईरान, इजरायल तथा अमेरिका जैसे देशों के संपर्क में है।
शांति और संवाद की अपील
प्रधानमंत्री ने संसद से एक स्वर में शांति और संवाद की बात करने का आह्वान किया। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यापारिक जहाजों पर हमलों और ब्लॉकिंग को “अस्वीकार्य” करार दिया।
संपादन नोट: इस संकट के बीच भारत की रणनीति अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ वैश्विक शांति के लिए कूटनीतिक दबाव बनाए रखने की है। सर्वदलीय बैठक में विपक्ष की ओर से एलपीजी कीमतों और महंगाई जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की संभावना है।
